लोकसभा चुनाव 2019: कन्हैया कुमार के सामने मुकाबले से 'डर' रहे हैं गिरिराज सिंह!

पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार (फ़ाइल)

गिरिराज सिंह के बेगूसराय भेजे जाने का उनके द्वारा विरोध किए जाने पर पार्टी में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई. विधान पार्षद रजनीश कुमार और पूर्व एमएलसी विवेक ठाकुर (डॉ सीपी ठाकुर के पुत्र) ने गिरिराज सिंह के तेवर का खुलकर विरोध किया.

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बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे के बाद सबसे अधिक चर्चा में केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह हैं.  वजह ये है कि उन्हें नवादा से बेगूसराय चुनाव लड़ने के लिए भेजा जा रहा है. बीजेपी के इस फायर ब्रांड नेता ने अपनी सीट बदले जाने को पर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी. बड़ा सवाल ये है कि गिरिराज सिंह नवादा से बेगूसराय क्यों नहीं जाना चाहते हैं? क्या वह कन्हैया कुमार का सामना नहीं करना चाहते हैं? आइये हम उन वजहों पर नजर डालते हैं जिस कारण वे बेगूसराय नहीं जाना चाहते हैं.

पहली वजह- कन्हैया फैक्टर
लखीसराय के मूल निवासी गिरिराज सिंह के सामने बेगूसराय जिले के ही कन्हैया कुमार (गिरिराज सिंह की जाति के ही हैं) सीपीआई के टिकट पर खड़े हो सकते हैं. ऐसे में उन्हें यह डर सता रहा है कि कहीं स्थानीय बनाम बाहरी के मुद्दे ने जोर पकड़ा तो उनके लिए राह आसान नहीं होगी. यही नहीं कन्हैया के नाम पर भाजपा विरोधी मतों की गोलबंदी गिरिराज सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है.

जनसभा को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार (फाइल फोटो)


दूसरी वजह- नया क्षेत्र, नयी चुनौती
बता दें कि बेगूसराय का चुनावी समीकरण कुछ अलग ही है. दरअसल गिरिराज सिंह नवादा के सांसद थे और नवादा में लोगों से जुड़ने के साथ-साथ वहां अपने काम करने का तरीका जनता को बता दिया था. अब उन्हें नवादा छोड़कर बेगूसराय जाना है ऐसे में बेगूसराय क्षेत्र उनके लिए बिलकुल नया होगा. ऐसे में उन्हें यह डर सता रहा है कि आखिरकार बेगूसराय की जनता ने उन्हें अगर नहीं समर्थन किया तो फिर क्या होगा?

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तीसरी वजह- बीजेपी का अंदरूनी संघर्ष
माना जाता है कि गिरिराज सिंह के विरोधी उनकी ही पार्टी में बहुतेरे हैं. उनकी जाति से आने वाले विधान पार्षद रजनीश कुमार (बेगूसराय के स्थानीय निवासी ) खुद ही टिकट चाह रहे थे. ऐसे में स्थानीय फैक्टर को वह प्रभावित कर सकते हैं. यही नहीं गिरिराज सिंह बिहार बीजेपी के भीतर गुटबाजी के भी शिकार हो सकते हैं.

चौथी वजह- नीतीश से अनबन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गिरिराज सिंह की कभी तालमेल अच्छा नहीं रहा है. नीतीश मंत्रिमंडल में दो ऐसे मंत्री रहे जो हमेशा नीतीश सरकार के खिलाफ बोलते रहे, उनमें एक नाम गिरिराज सिंह का था और दूसरा अश्विनी चौबे का.  ये दोनों लोग गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का खुलकर समर्थन करते थे. जाहिर है ऐसे हालात में नीतीश कुमार उनका समर्थन करेंगे या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा.

फाइल फोटो


पांचवी वजह-कम्यूनल होने का ठप्पा
रामनवमी के मौके पर बिहार में दंगे-फसाद के मामले में मोदी सरकार के ये दोनों मंत्री खुलकर नीतीश सरकार की आलोचना करते रहे .नीतीश और गिरिराज में कई मौकों पर तल्खी दिख चुकी है. दरभंगा में मोदी चौक नाम को लेकर एक हत्या हुई तो गिरिराज ने बिहार सरकार पर सवाल खड़े किए. अश्विनी चौबे के बेटे वाले मामले में भी गिरिराज नीतीश की लाइन से अलग दिखे थे.

गौरतलब है कि गिरिराज सिंह के बेगूसराय भेजे जाने का उनके द्वारा विरोध किए जाने पर पार्टी में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई. विधान पार्षद रजनीश कुमार और पूर्व एमएलसी विवेक ठाकुर (डॉ सीपी ठाकुर के पुत्र) ने गिरिराज सिंह के तेवर का खुलकर विरोध किया. जाहिर है गिरिराज सिंह के सामने कन्हैया जैसी चुनौती सामने आने वाली है वहीं पार्टी के भीतर भी उन्हें कई तरह के चैलेंज का सामना करना पड़ेगा.

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