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बिहार के निगम और बोर्डों में करोड़ों का घोटाला ! किसी भी वक्त लटक सकता है ताला

News18 Bihar
Updated: November 26, 2019, 11:47 AM IST
बिहार के निगम और बोर्डों में करोड़ों का घोटाला ! किसी भी वक्त लटक सकता है ताला
बिहार विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति ने बताया कि महालेखाकार से इस मामले को लेकर चर्चा चल रही है (नीतीश कमार की फाइल फोटो)

बिहार विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति ने खुलासा किया है कि महालेखाकार से इस मामले को लेकर चर्चा चल रही है. सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही पंगु बने निगम बोर्डो को खत्म करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जायेगा.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 11:47 AM IST
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रिपोर्ट- संजय कुमार 

पटना. बिहार में वैसे निगम और बोर्ड खत्म होंगे जिनसे सरकार को कोई फायदा नहीं है. ये ऐसे निगम और बोर्ड हैं जिन्हें सरकार हर साल संचालन के नाम पर भारी भरकम राशि का आवंटन तो करती है लेकिन इनके द्वारा ना तो अपनी आय-व्यय का वार्षिक ब्योरा दिया जाता है और ना ही ये किसी तरह के दायित्व का निर्वहन ही कर रहे हैं.

महालेखाकार से हो रही है चर्चा

विधानसभा के सार्वजनिक उपक्रम समिति इन निगम बोर्डो को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. बिहार विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति ने खुलासा किया है कि महालेखाकार से इस मामले को लेकर चर्चा चल रही है. सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही पंगु बने निगम बोर्डो को खत्म करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जायेगा. न्यूज18 ने पिछले दिनों दिखाया था कि कैसे बिहार में 74 निगम बोर्डो में कई निगम और बोर्ड अब सफेद हाथी बन चुके हैं. कहने को तो ये सभी कागजों पर काम कर रहे हैं लेकिन हकीकत में ये पंगु बन चुके हैं.

हर साल मिलती है वित्तीय मदद

सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ये निगम बोर्ड बिहार विधानसभा को वार्षिक प्रतिवेदन भी नहीं सौंप रहे हैं. बिहार विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम समिति के चेयरमैन हरिनारायण सिंह ने माना है कि बिहार के कई निगम बोर्डों को सरकार हर साल पैसा तो देती है लेकिन लाखों-करोड़ों खर्च करने के बाद भी ये निगम बोर्ड फायदे से कोसों दूर है. इन निगम बोर्डों द्वारा आय-व्यय का ब्यौरा नहीं दिये जाने को लेकर कई बार आपत्ति जता चुका है. सार्वजनिक उपक्रम समिति कई बार महालेखाकार इन निगम बोर्डों को लेकर चर्चा कर चुकी है.

राजनीतिक फायदे के लिए होता है पदों का इस्तेमालदरअसल सरकार की लगातार हो रही किरकिरी और निगम बोर्डों की लापरवाही ने उनके अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर दिया है. ​हैरानी की बात है कि सरकार किसी भी पार्टी की रही हो लेकिन निगम औऱ बोर्ड का सभी ने अपने हिसाब से इस्तेमाल किया. लंबे अर्से से निगम बोर्ड के शीर्ष पदों को राजनितिक फायदे के लिये उपयोग में लाया जाता रहा है लिहाजा अब पंगु बने निगम बोर्ड को खत्म करने के फैसले का विपक्ष से लेकर सतापक्ष सभी एक सुर से स्वागत करने में जुटे हैं.

पार्टियां बोलीं

कांग्रेस नेता प्रोफेसर उमाकांत सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हर सरकार ने अपने शासनकाल में निगम बोर्ड के पद रेवड़ियो की तरह बांटे हैं, ऐसे में सभी के शासनकाल की जांच होनी चाहिये. चाहे कांग्रेस की सरकार से भी जुड़ा ही मामला क्यों नहीं हो. सत्तारूढ़ भाजापा भी मानती है कि पंगु बने निगम और बोर्ड को खत्म करना बेहद जरूरी है. भाजपा नेता प्रेमरंजन पटेल का दावा है कि उनकी सरकार के शासन काल में कई निगम बोर्डों की हालत पहले से बेहतर हुई है. बहरहाल देर से ही सही अगर खस्ता हाल बोर्ड और निगमों को खत्म करने का फैसला लिया जाता है औऱ सरकार इसे स्वीकृति दे देती है तो यह राज्य हित में कारगर साबित होगा. इससे ना केवल वित्तिय अनियमितता पर रोक लग सकेगी बल्कि राज्य की माली हालत भी बेहतर होगी.

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First published: November 26, 2019, 11:43 AM IST
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