परदेश से बिहार लौटे बच्चों का घर जाकर एडमिशन ले रहे गुरुजी, किताब-पोशाक के लिए भी मिलेंगे पैसे
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परदेश से बिहार लौटे बच्चों का घर जाकर एडमिशन ले रहे गुरुजी, किताब-पोशाक के लिए भी मिलेंगे पैसे
बच्चे का एडमिशन लेने उसके घर पहुंचे टीचर

बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक डॉक्टर रणजीत सिंह ने बताया कि शिक्षकों, टोला सेवकों को नामांकन के लिए मुहिम चलाने का निर्देश दिया गया है और जुलाई तक नामांकन और टीसी का काम भी पूरा करने का निर्देश दिया गया है.

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पटना. बिहार में कोरोना महामारी के बीच शिक्षा विभाग के निर्देश पर प्रवासी बिहारियों के बच्चों को नामांकन लेने की मुहिम तेज हो गयी है. शहर से लेकर गांव तक गुरुजी घर-घर दाखिला लेने के लिए दस्तक दे रहे हैं, खासकर वैसे बच्चों का जो हाल में बिहार पहुंचे हैं. गुरुजी उनके घर जा रहे हैं और बिना किसी कागजात के भी सरकारी स्कूलों में बच्चे को दाखिला लेने की लिस्टिंग कर रहे हैं.

प्राथमिक शिक्षा निदेशक डॉक्टर रणजीत सिंह ने बताया कि शिक्षकों, टोला सेवकों को नामांकन के लिए मुहिम चलाने का निर्देश दिया गया है और जुलाई तक नामांकन और टीसी का काम भी पूरा करने का निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग ने बच्चों को समय पर किताब उपलब्ध कराने की भी पहल इसी दौरान शुरू कर दी है जिसको लेकर क्लास 1 से लेकर 8 तक के बच्चों के खाते पर डीबीटी के माध्यम से किताब की राशि भेजने की तैयारी अंतिम चरण में  है.

रणजीत सिंह ने कहा कि 600 करोड़ रुपये किताब की राशि के लिए जल्द भेज दी जाएगी जिसको लेकर सभी जिलों को किताब की भी आपूर्ति करा दी गयी है. उन्होंने कहा कि बच्चे किताब लेने नहीं जाएंगे बल्कि अभिभावक सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर भेजी गई राशि से सीआरसी से किताब प्राप्त कर सकेंगे. वहीं शैक्षणिक संस्थान खोले जाने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि जुलाई तक शैक्षणिक संस्थान नहीं खोले जाएंगे जिसको लेकर बच्चों को क्लास के आधार पर प्रोमोट भी किया जा रहा है.



बताते चलें कि कोरोना काल में काम धंधा बन्द होने के बाद अपने प्रदेश पहुंचे प्रवासी श्रमिकों को अब बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं सताए इसको लेकर राज्य सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त में नामांकन करवाने की मुहिम चलाई है. दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, जयपुर, उड़ीसा, कोलकाता से तकरीबन 22 लाख की संख्या में पहुंचे प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की बतौर सर्वे भी कराई जा रही है और सूची तैयार कर सभी बीईओ, डीईओ शिक्षा विभाग को भेज भी रहे हैं.
नामांकन लेने वाले बच्चों को सरकार न सिर्फ मिड डे मील देगी बल्कि पोशाक, छात्रवृति की राशि भी प्रदान करेगी. निदेशक ने कहा कि जिन बच्चों में जो भी योग्यता होगी उन्हें उसी आधार पर वर्ग में दाखिला लिया जाएगा ताकि सिलेबस समझने में कठिनाई न हो. इसको लेकर माना जा रहा है कि पहले से राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले पौने 2 करोड़ बच्चों के अलावे तकरीबन 4 लाख और बच्चों का बोझ पड़ेगा.
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