ग्राउंड रिपोर्ट: चौंकाने वाले होंगे बिहार उपचुनाव के नतीजे, NDA को लग सकता है झटका

पिछली बार बीजेपी के उम्मीदवार आनंद भूषण पांडेय के जीतने में सबसे बड़ा कारण बसपा का मैदान में होना भी था. महादलित वोटर्स के बंटने से बीजेपी उम्मदीवार की जीत हो गई.

Prem Ranjan | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 13, 2018, 8:50 PM IST
ग्राउंड रिपोर्ट: चौंकाने वाले होंगे बिहार उपचुनाव के नतीजे, NDA को लग सकता है झटका
फाइल फोटो
Prem Ranjan | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 13, 2018, 8:50 PM IST
बिहार विधानसभा की दो सीटों समेत तीन जगहों पर हुए उपचुनाव के नतीजे बुधवार को आएंगे. अररिया लोकसभा के साथ भभुआ और जहानबााद विधानसभा सीटों पर बिहार के साथ देशभर की नजरें टिकी हुई है. महागठबंधन से अलग होने के बाद सीएम नीतीश कुमार के लिए यह उपचुनाव लिटमस टेस्ट माना जा रहा है तो तेजस्वी के नेतृत्व वाले महागठबंधन की भी यह अग्निपरीक्षा है. न्यूज18 हिंदी ने इन तीनों सीटों पर अररिया, भभुआ और जहानाबाद के स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों से समझने की कोशिश की है कि ग्राउंड रिपोर्ट पर स्थिति क्या है और किस गठबंधन की जीत की संभावना है.

अररिया लोकसभा उपचुनाव
सुदन सहाय, पीटीआई संवाददाता

बिहार के अररिया लोकसभा उपचुनाव पर सबकी नजर है. वोटिंग के बाद दोनों गठबंधन जीत का दावा कर रहे हैं. इस इलाके में कई सालों से पत्राकरिता कर रहे पीटीआई के संवाददाता सूदन सहाय का कहना है कि अररिया लोकसभा सीट पर महागठबंधन का पलड़ा भारी है.

सूदन सहाय के अनुसार, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बीजेपी की इंटरनल पॉलिटिक्स और वोटरों को ध्रुवीकरण न होना है. उनके अनुसार, इस सीट पर बीजेपी वोटरों के ध्रुवीकरण करने में असफल रही है. ध्रुवीकरण के चक्कर में बीजेपी इस चुनाव में अपने परंपरागत वोटरों पर भी ध्यान देने में असफल रही है.

सूदन सहाय ने अनुसार, बीजेपी उम्मीदवार की अगर हार होती है तो इसके लिए काफी हद तक बीजेपी की अंदरुनी पॉलिटिक्स ही जिम्मेदार होगी. इस सीट से पार्टी के कई कद्दवार नेता बतौर उम्मीदवार दावेदार थे. लेकिन अति पिछड़ी जाति के प्रदीप सिंह को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया. बनिया और महादलित वोटरों में प्रदीप सिंह को कैंडिडेट बनाने से नाराजगी दिखी. अररिया लोकसभा उपचुनाव के ठीक पहले पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के महाठबंधन में शामिल होना भी एक बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है.

बता दें, अररिया लोकसभा सीट पर कुल वोटरों की संख्या 17 लाख 38 हजार 867 है. जिसमें मुस्लिम- 6 लाख 37 हजार, यादव- 2 लाख 51 हजार, भूमिहार- 18 हजार, राजूपत- 15 हजार, मुसहर- एक लाख 47 हजार 840, पासवान- 45 हजार 312 अन्य- 6 लाख 87 हजार है. जातीय समीकरण को देखते हुए भी अररिया लोकसभा सीट पर महाठबंधन का पलड़ा भारी पड़ता दिख रहा है.

जहानाबाद विधानसभा सीट

संजय पांडे, स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार

जहानाबाद में सन 1986 से पत्रकारिता कर रहे स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार संजय पांडे ने अनुसार शहरी क्षेत्र में वोटरों की उदासीनता और एनडीए प्रत्याशी से लोगों की नाराजगी एनडीए उम्मीदवार अभिराम शर्मा पर भारी पड़ सकता है. ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं को नीतीश के विकास पर भरोसा तो है परंतु स्थानीय मुद्दे इस चुनाव पर अपना असर छोड़ रहा है.  महागठबंधन ने ग्रामीण इलाकों में शराबबंदी, बालू बंदी और केरोसीन बंदी का मुद्दा उठाया. चुनाव के दौरान एनडीए के कार्यकर्ता इसका तोड़ नहीं खोज पाए और ना ही लोगों को समझाने में कामयाब हो पाए.

शराबबंदी से महादलित के लोग काफी नाराज हैं. इस समुदाय के लोगों की यह पुश्तैनी धंधा रहा है. शराबबंदी से इस समुदाय में नाराजगी दिख रही है. दूसरा बालू बंद होने से भी लोगों में काफी नाराजगी है और लोग बाहर पलायन करने को मजबूर हो गए. इसके अलावा चुनाव के दौरान एनडीए प्रत्याशी अभिराम शर्मा के प्रति लोगों की नाराजागी भी देखने को मिली है. इस चुनाव में यादव और मुस्लिम वोटरों ने जहां बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, वहीं सर्वण वोटरों में उदासीनता देखने को मिली है. शराबबंदी से महादलित समुदाय के लोग सरकार के फैसले से खुश नहीं हैं.

संजय पांडेय के अनुसार, जहानाबाद सीट पर कुल 51 फीसदी वोटिंग हुई है लेकिन हमलोगों के पास ऐसी जानकारी है कि महागठबंधन बहुल (जाति) वाले मतदान केद्रों पर 60 फीसदी तक मतदान हुआ है. शहर के गांधी मैदान के समीप केंद्रों पर सवर्ण वोटरों की अच्छी खासी तादाद है. लेकिन इन केंद्रों पर 35 फीसदी के आसपास ही मतदान होने की खबर है.

जहानाबाद विधानसभा सीट पर लगभग यादव 50 हजार, भूमिहार 35 हजार, मुस्लिम 15 हजार, महादलित 40- 45 हजार हैं. कुर्मी और कोईरी मतदाता लगभग 8 और 10 हजार हैं. संजय पांडेय के अनुसार राजपूत और कोरी मतदाताओं में डिविजन हुआ है जबकि 80 फीसदी महादलित वोट महागठबंधन के पक्ष में वोट होने की खबर है.

भभुआ विधानसभा सीट
प्रसून्न कुमार मिश्र, हिन्दुस्तान के ब्यूरो संवाददाता

प्रसून्न कुमार मिश्र कैमूर और रोहतास जिले में कई सालों में पत्रकारिता में सक्रिय हैं. प्रसून्न के अनुसार भभुआ की फाइट काफी टफ है. इस सीट पर फैसला अंतिम राउंड तक जाने की उम्मीद है. बीजेपी की रिंकी रानी पांडेय और कांग्रेस के शंभू पटेल के बीच कड़ा मुकबला है. शंभू पटेल महागठबंधन के उम्मीदवार हैं. लिहाजा मुस्लिम, यादव, कुर्मी उनके साथ गोलबंद होते दिखाई दे रहे हैं. इसके अलावा इलाके में महादलित वोटरों की तादाद भी अच्छी खासी है. सबसे बड़ी बात है कि इस विधानसभा से इस बार बसपा के चुनावी मैदान में नहीं होने के कारण ये वोट शंभू पटेल के पक्ष में जाने की संभावना है.

दूसरी तरफ बीजेपी की उम्मदीवार की नजर ब्रहामण और राजपूत वोटरों पर है. जिसकी तादाद अच्छी खासी है. इसके अलावा बीजेपी को बनिया और अति पिछड़ी जातियों के वोट भी मिलने की उम्मीद है.  अगर दोनों वोटों को मिला दिया जाए तो टक्कर बराबर की बनती दिख रही है.

प्रसून्न के अनुसार, इस सीट पर सबसे बड़ा फैक्टर कुशवाहा वोटर्स का हो सकता है. लेकिन अभी इस बात को लेकर संशय बरकरार है कि कुशवाहा वोटरों ने किसके पक्ष में मतदान किया है. प्रसून्न के मुताबिक, इस सीट पर कुशवाहा वोटर्स काफी महत्वपूर्ण है. केंद्रीय राज्यमंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी जोरदार प्रचार किया है.

इस सीट पर लगभग मुस्लिम 16 हजार, यादव -11 हजार, पासवान- 13 हजार, महादलित (राम) 33 हजार के साथ ब्रहामण-33 हजार, कुर्मी-17 हजार, राजपूत- 7 हजार, बनिया- 13 हजार, बिंद- 28 हजार,  कुशवाहा 15 हजार है. इसके अलावा बिंद वोट 10 हजार के करीब है. अति पिछड़ा समुदाय के 20 हजार के करीब वोटर्स हैं. ये भी माना जा रहा है कि सवर्ण वोटरों का प्रतिशत सामान्यत कम रहता है.

प्रसून्न के मुताबिक, पिछली बार बीजेपी के उम्मीदवार आनंद भूषण पांडेय के जीतने में सबसे बड़ा कारण बसपा का मैदान में होना भी था. महादलित वोटर्स के बंटने से बीजेपी उम्मदीवार की जीत हो गई.
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