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पटना जिम ट्रेनर गोलीकांड: एडमिट हुआ विक्रम, नाम भाई का! इंज्युरी रिपोर्ट से पहले PMCH पर उठा सवाल

पटना जिम ट्रेनर गोलीकांड: एडमिट हुआ विक्रम, नाम भाई का! इंज्युरी रिपोर्ट से पहले PMCH पर उठा सवाल

जिम ट्रेनर विक्रम गोलीकांड में पीएमसीएच का गड़बड़झाला सामने आया है.

जिम ट्रेनर विक्रम गोलीकांड में पीएमसीएच का गड़बड़झाला सामने आया है.

Gym Trainer Vikram Shooting case: मिली जानकारी के अनुसार विक्रम के एडमिशन रिकॉर्ड में मरीज का नाम सचिन है जबकि पता सेम है और पिता का नाम भी हरेराम सिंह लिखा है. इधर विक्रम की मानें तो इसमें साजिश की गई है और विक्रम के बदले नाम सचिन करा दिया गया, जो उन्हें मालूम नहीं है. नाम ठीक कराने के लिए विक्रम और उनके परिजन पीएमसीएच का चक्कर लगा रहा हैं. दाे बार शपथपत्र भी देने के बाद अब तक कुछ नहीं हुआ.

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पटना. जरा सोचिए अगर कोई मरीज इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट हो और महीनों बाद ये पता चले कि जो शख्स एडमिट था उसके बदले उसके भाई का नाम अस्प्ताल के रिकॉर्ड में अंकित है, तो सिर्फ हैरानी नहीं होगी, बल्कि सिस्टम पर भी सवाल उठना लाजिमी है. मामला पटना के जिम ट्रेनर विक्रम गोलीकांड से जुड़ा है. इस मामले में 2 महीने बाद ये खुलासा हुआ है कि पीएमसीएच में भर्ती विक्रम का भले 10 दिनों तक इलाज हुआ, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने का रिकॉर्ड घायल विक्रम के भाई सचिन के नाम से है. ये खुलासा तब हुआ जब पुलिस को विक्रम की इंज्युरी रिपोर्ट की जरूरत पड़ी और पुलिस ने अस्पताल से संपर्क साधा. बता दें कि गत 18 सितंबर काे कदमकुआं के लाेहानीपुर में अपराधियों ने जिम ट्रेनर विक्रम काे गोली मारी थी जिसके बाद घायल अवस्था में विक्रम खुद स्कूटी चलाकर पीएमसीएच पहुंचे थे और वहां 10 दिनों तक इलाज हुआ था.

मिली जानकारी के अनुसार विक्रम के एडमिशन रिकॉर्ड में मरीज का नाम सचिन है जबकि पता सेम है और पिता का नाम भी हरेराम सिंह लिखा है. इधर विक्रम की मानें तो इसमें साजिश की गई है और विक्रम के बदले नाम सचिन करा दिया गया, जो उन्हें मालूम नहीं है. नाम ठीक कराने के लिए विक्रम और उनके परिजन पीएमसीएच का चक्कर लगा रहा हैं. दाे बार शपथपत्र भी देने के बाद अब तक कुछ नहीं हुआ.

दूसरी ओर इस मामले जमानत पर बाहर आये आरोपी डॉ. राजीव सिंह ने भी इसे साजिश बताया और कहा कि मुझे फंसाने के लिए ऐसा किया गया है. वहीं, पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आईएएस ठाकुर की मानें तो अस्पताल की कोई लापरवाही नहीं है क्योंकि एडमिट होते वक्त जो रजिस्ट्रेशन में नाम अंकित होता है, वही रिकॉर्ड रहता है.

Tags: Big crime, Bihar News, Crime In Bihar, Crime News

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