बिहार के स्वास्थ्य विभाग में मुर्दे का तबादला, बना दिया गया सिविल सर्जन

विक्रमगंज रोहतास के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी रामनारायण राम का 7 फरवरी को ही निधन हो चुका है (शोक सभा की फाइल फोटो)

विक्रमगंज रोहतास के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी रामनारायण राम का 7 फरवरी को ही निधन हो चुका है (शोक सभा की फाइल फोटो)

मुर्दे के तबादले का मामला शेखपुरा जिला से जुड़ा है जहां के सिविल सर्जन की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐसे डॉक्टर को दी है जिसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 9, 2021, 11:56 AM IST
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पटना. बिहार में स्वास्थ्य विभाग का अजीबो गरीब कारनामा सामने आया है जहां चिकित्सा पदाधिकारियों के तबादले में मुर्दे को भी सिविल सर्जन बना दिया गया. राज्य में 17 चिकित्सा पदाधिकारियों का तबादला किया गया है जिसमें कई को सिविल सर्जन बनाया गया है. ऐसे में आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने डॉ रामनारायण राम का भी तबादला कर दिया और शेखपुरा का सिविल सर्जन बना दिया.

हैरानी की बात तो ये है कि विक्रमगंज रोहतास के तत्कालीन चिकित्सा प्रभारी रामनारायण राम का 7 फरवरी को ही निधन हो चुका है और वहां दूसरे अधिकारी अभी प्रभारी के चार्ज में हैं. स्वास्थ्य विभाग को ये भी नहीं पता है कि रामनारायण राम अभी विक्रमगंज पीएचसी के प्रभारी नहीं हैं क्योंकि वो जिंदा ही नहीं हैं लेकिन तबादले में वर्तमान पदस्थापन विक्रमगंज पीएचसी अंकित है. मूल रूप से भोजपुर के रहने वाले रामनारायण राम के निधन के बाद अस्पताल कर्मियों ने यहां तक कि 8 फरवरी को ही विक्रमगंज पीएचसी में शोक सभा का भी आयोजन किया था और सभी डॉक्टरों ने उन्हें श्रद्धाजंलि दी थी.

रोहतास जिले के सिविल सर्जन डॉ सुधीर कुमार से जब न्यूज 18 ने जानकारी लेने की कोशिश की तो वे खुद हैरान हो गए और साफ कहा कि उनकी तो मौत हो चुकी है. ऐसा बिहार में पहली बार नहीं हुआ है कि मुर्दे का तबादला किया गया है, बल्कि कई बार मुर्दे को प्रोन्नति देने का भी मामला सामने आया है.

इसे विडम्बना कहिये कि स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव अनिल कुमार का बतौर तबादले के आदेश पत्र पर हस्ताक्षर भी है लेकिन अनिल कुमार ने बिना यह जाने हस्ताक्षर कैसे कर दिया कि रामनारायण राम जिंदा हैं या मुर्दा. अब स्वास्थ्य विभाग के इस कारनामे के बाद जहां सासाराम में सभी हैरान हैं वहीं मृतक अधिकारी के पैतृक जिले के अलावे शेखपुरा में भी डॉक्टरों को समझ में नहीं आ रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही स्वास्थ्य विभाग से कैसे हो सकती है.
अब देखने वाली बात होती है कि स्वास्थ्य विभाग नए किन अधिकारी को शेखपुरा का सिविल सर्जन बनाता है और दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है.
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