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पटना के NMCH में भगवान भरोसे मरीज, डॉक्टरों की हड़ताल से बिगड़े हालात

Rajneesh Kumar | News18 Bihar
Updated: November 18, 2019, 1:26 PM IST
पटना के NMCH में भगवान भरोसे मरीज, डॉक्टरों की हड़ताल से बिगड़े हालात
पटना के एनएमसीएच में डॉक्टरों का इंतजार करते मरीज

जूनियर डॉक्टरों (Junior Doctors) ने हड़ताल खत्म करने को लेकर 6 सूत्री मांग सामने रखी है और अपनी मांगों के पूरी होने तक हड़ताल (Strike) जारी रखने की बात कही है.

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पटना. बिहार के दूसरे सबसे बड़ अस्पताल एनएमसीएच (NMCH) में पिछले तीन दिनों से मरीजों का भगवान ही मालिक है क्योंकि जिंदगी बचाने वाले डॉक्टर फिर से हड़ताल (Doctor Strike) पर चले गए हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो गई है. शिशु वार्ड में एक 12 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद परिजनों की पिटाई से आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों ने बिना देर किए अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी और मरीजों को अपने हाल पर छोड़ दिया.

12 फीसदी मरीजों को ही मिल पा रही सुविधा

आलम यह है कि इमरजेंसी वार्ड से लेकर गायनी और शिशु सभी वार्ड में दर्द से कराह रहे मरीजों का हाल जानने वाला भी कोई नहीं है. अस्पताल ने हालात को सामान्य करने के लिए सभी सीनियर डॉक्टरों की तैनाती जरूर कर दी है लेकिन महज 12 प्रतिशत मरीजों का ही सीनियर डॉक्टर इलाज कर पा रहे हैं और बाकि मरीज की हालत बिगड़ती जा रही है. सबसे ज्यादा मुसीबत में ऐसे मरीज हैं जिनका ऑपरेशन तो हो गया लेकिन ड्रेसिंग करनेवाला कोई नहीं है ऐसे में बीमारी कम होने के वजाय बढती ही जा रही है.

300 से अधिक मरीजों का हुआ पलायन

जिनके पास थोड़े भी पैसे हैं वो जिंदगी को दाव पर लगाना नहीं चाह रहे और सीधे यहां से पलायन कर रहे हैं अब तक 300 से ज्यादा मरीज अस्पताल से पलायन कर चुके हैं तो बाकि मरीज इलाज के इंतजार में हैं. पटना सिटी की बॉबी देवी ,नालंदा के शंकर दास समेत कई ऐसे परिजन हैं जो इलाज की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सीनियर डॉक्टर का दर्शन भी होना मुश्किल लग रहा है. बताते चलें कि जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म करने को लेकर 6 सूत्री मांग सामने रखा है जिसमें आरोपी परिजनों की गिरफ्तारी,अस्पताल के सीसीटीवी को दुरूस्त करना,डॉक्टरों को सुरक्षा मुहैया करना,अस्पताल के सिक्यूरिटी कंपनी को बदलने और शिशु वॉर्ड के एचओडी को हटाने की मांग की है.

साल में पांचवीं हड़ताल

हड़ताल पर जाने के बाद लगातार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और अस्पताल प्रशासन डॉक्टरों को मनाने का प्रयास कर रही है लेकिन मांगें पूरी नहीं होने तक जूनियर डॉक्टरों ने कार्य ठप रखने का फैसला लिया है. हड़ताल पर गौर करें तो राज्य में 9 मेडिकल कॉलेज हैं जहां इस साल अबतक 5 बार एक साथ जूनियर डॉक्टर एकेडमिक और सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल पर जा चुके हैं. सबसे ज्यादा रिकॉर्ड तोड़ हड़ताल पीएमसीएच ने किया है जो कि 7 बार हड़ताल कर चुके हैं जबकि 6 बार एनएमसीएच, 5 बार भागलपुर जेएलएनएमसीएच, 4 बार एएनएमसीएच समेत बाकि मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर भी जरा -जरा सी बात पर हड़ताल पर गए थे.ये भी पढ़ें- गोपालगंज में मवेशी चरा रहे बच्चों पर पलटा ट्रक, छह की दर्दनाक मौत

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First published: November 18, 2019, 1:21 PM IST
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