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लालू यादव की बेल पर 11 दिसंबर तक सुनवाई टली तो कांग्रेस बोली- संदेह होता है, JDU ने कहा- वे जेल में ही अच्छे

लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)
लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)

जेडीयू नेता व विधान पार्षद नीरज कुमार (JDU leader and MLC Neeraj Kumar) ने कहा कि न्यायपालिका से हमारी अपेक्षा है कि वह इस पर विचार करेगी जो जेल मेनुअल की अवहेलना कर रहा हो, जो आदतन अपराधी हो, क्या उसकी जमानत पर विचार करेगी?

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 11:05 PM IST
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पटना/रांची.  राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की जमानत याचिका पर रांची हाईकोर्ट  (Ranchi High Court) में सुनवाई टल गई है. अब यह 11 दिसंबर को होगी. लालू यादव के जमानत टलने पर सियासत गरमा गई है. आरजेडी और काँग्रेस ने इसे साजिश बताया है. ज़मानत टलने के बाद राजद ने  प्रतिक्रिया देते हुए सीबीआई पर संदेह जताते हुए न्यायपालिका पर भरोसा जताया है. वहीं, कांग्रेस ने कहा कि बार-बार सुनवाई टलने से संदेह पैदा होता है.

आरजेडी नेता सुबोध राय ने कहा कि हमें न्यायपालिका पर भरोसा है पर जिस तरीके से सीबीआई साजिश कर रही है वो चिंताजनक है. सीबीआई की साजिश के कारण लालू की जमानत नहीं हुई. हालांकि आलोक मेहता ने कहा कि हमें न्यायपालिका पर यक़ीन है और हमारे नेता को अवश्य न्याय मिलेगा. वहीं, कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि कुछ तो बात है जिसके कारण लालू की जमानत बार-बार टाल दी जाती है. राजनीतिक साजिश की जा रही है. कांग्रेस नेता ने कहा कि बार-बार सुनवाई टलना संदेह पैदा करता है. आज या कल जब सुनवाई होगी न्याय मिलेगा.

आरजेडी के बयानों पर पलटवार करते हुए जेडीयू नेता मदन सहनी ने कहा के जब जेल में रहकर के लालू इतने  प्रलोभन और धमकी दे सकते हैं तो बाहर आकर ना जाने क्या कर सकते हैं. इसलिए ऐसे लोगों को कभी जमानत नहीं मिली चाहिए. वहीं, जेडीयू नेता व विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि ये न्यायालय का फ़ैसला है, लेकिन न्यायपालिका से हमारी अपेक्षा है कि वह इस पर विचार करेगी जो जेल मेनुअल की अवहेलना कर रहा हो, जो आदतन अपराधी हो क्या उसकी जमानत पर विचार करेगी?




बीजेपी नेता संजय मयूख ने कहा कि आप जल्दी को ना तो जन्नत पर भरोसा है और ना ही लोकतंत्र पर उन्हें सिर्फ अपने परिवार पर भरोसा है. कांग्रेस नेता के द्वारा जमानत पर सुनवाई टलने पर संदेह करने पर भाजपा नेता प्रमोद कुमार ने कहा कि न्यायपालिका पर संदेह करना अनुचित है. न्यायपालिका हर वक्त कानून के अनुसार अपना काम करती है और उसे राजनीति से कुछ भी लेना-देना नहीं होता है.

बता दें कि सुनवाई से पहले  राबड़ी देवी ने कहा था कि न्यायपालिका पर हमें भरोसा है और न्यायालय के हर फ़ैसले को हम मानेंगे. बता दें कि लालू के खिलाफ चारा घोटाले से संबंधित पांच मामले झारखंड में चल रहे हैं. इनमें से चार मामलों में सीबीआई कोर्ट उन्हें सजा सुना चुकी है. पांचवां मामला डोरंडा कोषागार का है, जिसकी सुनवाई अभी सीबीआई कोर्ट में चल रही है.

जिन चार मामलों में लालू प्रसाद को सजा मिली है, उसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की है. इनमें तीन मामले में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. गौरतलब है कि लालू प्रसाद को सभी मामलों में आधी सजा काटने के आधार पर जमानत दी गई है.

दुमका कोषागार मामले में भी उन्होंने इसी आधार पर जमानत मांगी है. साथ ही अपनी बीमारी का हवाला भी दिया है. अब यदि  11 दिसंबर को हाई कोर्ट से उन्‍हें दुमका कोषागार के मामले में जमानत मिल जाती है तो वे जेल से बाहर आ जाएंगे. जाहिर है इसका बिहार की राजनीति पर भी बड़ा असर पड़ेगा.

हालांकि जमानत का विरोध करते हुए सीबीआई ने अपने जवाब में कहा है कि सीबीआई कोर्ट ने दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव को दो अलग-अलग मामलों में सात-सात साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने दोनों सजाएं एक साथ चलाने का आदेश नहीं दिया है. इस कारण लालू प्रसाद यादव ने दुमका कोषागार के मामले में एक दिन की सजा भी नहीं काटी है.
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