अब नाटे नहीं होंगे बिहार के लोग, जानें पिछले 15 सालों में लंबाई में कितना आया बदलाव

बिहार के लोगों की औसत उंचाई में हुआ इजाफा (सांकेतिक चित्र)

बिहार के लोगों की औसत उंचाई में हुआ इजाफा (सांकेतिक चित्र)

Dwarfism in Bihar: बिहार में पिछले 15 साल के दौरान लोगों की लंबाई में औसतन काफी सुधार आया है, लेकिन राज्य के दो जिले सीतामढ़ी और शेखपुरा में नाटेपन का औसत आज भी सबसे ज्यादा है.

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पटना. कद और काठी को लेकर लोगों को हमेशा चिंता रहती है. सभी को लगता है कि व्यक्ति की लंबाई अच्छी हो. अगर बिहार की बात करें तो यहां लोगों की औसत ऊंचाई जहां पहले कम थी वही अब ऊंचाई बढ़ने लगी है. बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 में यह बात निकलकर सामने आई है कि बिहार में अब लोगों के नाटेपन में तेजी से सुधार आया है. बिहार में पहले की तुलना में आज नाटेपन में 5.4 फीसदी की कमी आई है.

2015-16 में बिहार के 48.3 प्रतिशत बच्चे नाटेपन का शिकार थे वहीं अब ये दर घटकर 42.9 फीसदी रह गया है. पिछले चार सालों में बच्चो के नाटेपन में तेजी से सुधार हुआ है, हालांकि अब भी 43 प्रतिशत बच्चों में नाटापन है पर इसमें तेजी से हो रहा सुधार लोगों के लिए अच्छा संकेत है.

नीतीश कुमार ने 2005 से ही शुरू कर दिया था काम

बिहार के बच्चों में नाटेपन को लेकर सबसे चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे. 2005 के आंकड़ों की अगर बात करें तो बिहार में 55.6 प्रतिशत बच्चे नाटेपन का शिकार थे. नीतीश कुमार ने 2005 में मुख्यमंत्री पद संभालने के साथ ही इस पर तेजी से कम करना शुरू किया. सभी जिलों में तेजी से पोषण अभियान चलाना शुरू हुआ. बच्चो में पोषण को लेकर सालों भर लगातार सघन अभियान चलाया गया. आंगनबाड़ी केंद्रों पर दूध के साथ अंडे भी दिए गए. पिछले 15 सालों में लगातार अभियान का नतीजा है कि आज नाटेपन में 12.7 फीसदी की कमी आई है. आज आंकड़ा 55.6 प्रतिशत से घटकर 42 प्रतिशत तक आ पहुंचा है.
सीतामढ़ी में सबसे ज्यादा नाटापन तो शिवहर बेहतर स्थिति में

अगर जिलों की बात करे तो सीतामढ़ी और शेखपुरा में नाटेपन का औसत आज सबसे ज्यादा है. सीतामढ़ी में जहां 54.2 प्रतिशत तो शेखपुरा में 53.6 प्रतिशत नाटापन आज भी है, वहीं गोपालगंज और शिवहर की सबसे बेहतर स्थिति है. गोपालगंज में 34.2 प्रतिशत तो शिवहर में 34.4 प्रतिशत ही नाटापन है.
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