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भोजपुरी को लेकर हेमंत सोरेन के बयान का पॉजिटिव इम्पैक्ट! प्रचलित कहावतों-मुहावरों का होगा संग्रह

भोजपुरी व महही को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए जदयू एमपी वशिष्ठ ना. सिंह की अगुवाई में कोशिश शुरू.

भोजपुरी व महही को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के लिए जदयू एमपी वशिष्ठ ना. सिंह की अगुवाई में कोशिश शुरू.

Bihar News: हेमंत सोरेन के बयान के बाद बिहार के भोजपुरी भाषी लोगों को काफी पीड़ा और नारजगी हुई है. अब भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के मुहिम के साथ-साथ भाषा का सार्थक व सकारात्मक स्वरूप को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेशर ग्रुप बनाने की तैयारी की जा रही है.

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पटना. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Jharkhand CM Hemant Soren) के भोजपुरी और मगही भाषा (Bhojpuri and Maghi Language) को लेकर दिए एक विवादित बयान ने बिहार के भोजपुरी भाषी और मगही भाषी लोगों को नाराज कर दिया है. लेकिन, इस नाराजगी के साथ ही भोजपुरी और मगही भाषा को आगे बढ़ाने और लोकप्रिय बनाने की कवायद भी शुरू हो गई है. इसी क्रम में JDU के राज्य सभा सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह (JDU MP Vashistha Narayan Singh) के आवास पर भोजपुरी और मगही भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल (Bhojpuri and Magahi language in Eighth Schedule of the Constitution) करने को लेकर लम्बे समय से आंदोलन में लगे लोगों की एक बैठक हुई.

बैठक में ये तय किया गया कि बहुत जल्द भोजपुरी भाषा में बोले जाने वाले मुहावरों और कहावतों का संग्रह तैयार होगा. इसे आम लोगों की पहुंच में लाया जाएगा  जिससे लोग भोजपुरी भाषा (Bhojpuri language) की मधुर बोली का स्वाद ले सकें. इससे न सिर्फ भाषा का विकास और तेज होगा बल्कि भोजपुरी भाषा के प्रति युवाओं में भी जागरूकता आएगी और रुझान भी बढ़ेगा.

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वशिष्ठ नारायण सिंह, जो बक्सर जिले के डुमरांव से आते है और भोजपुरी भाषी हैं, कहते है कि भोजपुरी भाषा में काफी मिठास है और बेहद समृद्ध भाषा भी है. इसके विकास के लिए हम काफी समय से लगे हुए हैं, लेकिन इस भाषा को और आगे बढ़ाने के लिए और लोगों तक इसकी लोकप्रियता को पहुंचाने के लिए हमारे साथ के लोगों ने तय किया है कि आम भाषा में कहावतों और मुहावरों का संग्रह करावाया जाए. उस संग्रह को  बिहार और उतर प्रदेश भोजपुरी भाषी सांसद और विधायकों को इसकी प्रति सौंपी जाए ताकि इस भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए लड़ाई तेज हो सके. साथ ही इसके प्रति बिहार और उतर प्रदेश के मुख्य मंत्री को पत्र सौंपा जाए जो अपने स्तर से इस लड़ाई को आगे बढ़ाने में योगदान कर सकें.

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दरअसल हेमंत सोरेन के बयान के बाद बिहार के भोजपुरी भाषी लोगों को काफी पीड़ा और नारजगी हुई है. अब भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के मुहिम के साथ-साथ भाषा का सार्थक व सकारात्मक स्वरूप को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेशर ग्रुप बनाने की तैयारी की जा रही है. साथ ही जो मुहावरों और कहावतों का संग्रह तैयार होगा.

मुहावरों और कहावतों का यह संग्रह डिजिटल फोरम पर तैयार किया जाएगा ताकि लोगों तक इसकी पहुच आसान हो जाए. भोजपुरी साहित्यकार चंद्र भूषण तिवारी कहते हैं कि जब तक हमारा प्रयास तेज नहीं होगा लोगों तक आसानी से भोजपुरी साहित्य से लेकर इस बोली की मिठास लोगों तक नहीं पहुंचेगी. भोजपुरी को आठवीं सूची में शामिल कराने में समस्या आएगी इसीलिए हम इस प्रयास में लगे हैं.

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