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हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 'क्यों न पूर्व CM के सरकारी बंगले के आवंटन को रद्द कर दिया जाए'
Patna News in Hindi

News18 Bihar
Updated: January 9, 2019, 8:47 AM IST
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 'क्यों न पूर्व CM के सरकारी बंगले के आवंटन को रद्द कर दिया जाए'
पटना हाई कोर्ट

सतीश प्रसाद मात्र पांच दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने और 1968 से अब तक बंगले की सुविधा भोग रहे हैं. वे 28 जनवरी 1968 से 01फरवरी 1968 तक मुख्यमंत्री रहे थे.

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उत्तर प्रदेश की तरह  बिहार में भी पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले खाली करवाए जा सकते हैं. क्योंकि पटना हाईकोर्ट ने आजीवन बंगले के आवंटन पर का तल्ख टिप्पणी की है. हाई कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा है कि क्यों ना इन आवंटन को रद्द कर दिया जाए. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, जगन्नाथ मिश्र और सतिश प्रसाद को बंगला आवंटित है. हद तो ये है कि एक भी पूर्व मुख्यमंत्री ने अपना सरकारी बंगला देखा तक नहीं है.

सतीश प्रसाद मात्र पांच दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने और 1968 से अब तक बंगले की सुविधा भोग रहे हैं. वे 28 जनवरी 1968 से 01फरवरी 1968 तक मुख्यमंत्री रहे थे. वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र भी ये स्वीकार कर रहे हैं कि उनके पिजाती ने कभी भी अपने सरकारी बंगले में कदम नहीं रखा है.

बता दें कि 7 जनवरी को पटना हाई कोर्ट ने बिहार विधानसभा में विपक्ष केनेता तेजस्वी यादव के बंगला विवाद पर दायर अपील खारिज करते हुए उन्हें राहत देने से इंकार कर दिया था. चीफ जस्टिस एपी शाही की खंडपीठ ने पिछले सप्ताह तेजश्वी यादव की अपील पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था,जिसे आज सुनाया गया.

दरअसल, राज्य सरकार ने तेजस्वी यादव के उप  मुख्यमंत्री से हटने के बाद उन्हे 5 देशरत्न  मार्ग पर स्थित सरकारी बंगला को खाली का आदेश दिया था. इस आदेश को तेजस्वी ने याचिका दायर कर चुनौती दी, लेकिन एकल पीठ ने राज्य सरकार के आदेश को सही ठहराया.

रिपोर्ट- रूपेश कुमार

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First published: January 9, 2019, 7:59 AM IST
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