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क्यों खत्म हो गई बिहार के ऐतिहासिक सोनपुर पशु मेले की चमक?

News18 Bihar
Updated: November 18, 2019, 11:52 PM IST
क्यों खत्म हो गई बिहार के ऐतिहासिक सोनपुर पशु मेले की चमक?
आकर्षण खो रहा है सोनपुर का ऐतिहासिक पशु मेला

कभी एशिया (Asia) का सबसे बड़ा कहा जाने वाला सोनपुर मेला (Sonpur Mela) संकट में है. बिजली (Electricity) पानी (Water) समेत तमाम अव्यवस्थाओं के चलते मेले में आने वाले किसान और गायों की संख्या में लगातार कमी आई है. न्यूज़18 ने मेले का जायज़ा लिया तो पाया कि अव्यवस्था प्रशासन के दावों पर भारी पड़ती नज़र आती है.

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  • Last Updated: November 18, 2019, 11:52 PM IST
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पटना. किसी जमाने में पूरे एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला (Cattle Fare) कहलाने वाला सोनपुर (Sonpur) का ऐतिहासिक मेला धीरे धीरे अपना आकर्षण खोता जा रहा है. एक समय था जब यहां मेला खत्म होने के बाद भी पशुओं का बाजार महीने दो महीने तक चलता रहता था, खासकर पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) जैसे राज्यों से किसान बड़ी संख्या में गाय लाकर यहां बेचा करते थे. लेकिन ये बातें इतिहास के सुनहरे दिनों की यादों में सिमट कर रह गई हैं. आज हालात बदल गए हैं. आज का गाय बाजार महज एक खटाल की तरह दिखता है.

कम होने लगी गायों की संख्या
ऐतिहासिक सोनपुर मेले की पहचान कभी बिहार के सबसे बड़े गाय मेले के रुप में होती थी. साल 1994-95 तक यहां 4-5 हजार गायें बिक्री के लिये आती थीं. पंजाब और हरियाणा से लाई जाने वाली गायें ना केवल उन्नत किस्म की होती थीं बल्कि दुधारू भी मानी जाती थीं. इसके बाद से मानों सोनपुर मेले के गाय बाजार पर ग्रहण लग गया. पिछले कुछ सालों में यहां आने वाली गायों की संख्या काफी कम हो गई है. साल 1996 से हर साल मेला समिति की बैठकों में पंजाब और हरियाण की गायों को मेले में लाने के लिये सरकारी स्तर पर प्रयास किये जाने को लेकर सवाल उठते रहे हैं. साल 1997 में एक अधिकारी के नेतृ्त्व में टीम हरियाणा और पंजाब भी गई ताकि यहां आनेवाली गायों की संख्या बढ़ाई जा सके. टीम ने किसानों और कारोबारियों से गाय लेकर आने का अनुरोध भी किया.

News - प्रशासन के दावों पर भरोसा कर वहां आने वाले किसान खुद को ठगा हुआ पाते हैं, Sonpur Mela
प्रशासन के दावों पर भरोसा कर वहां आने वाले किसान खुद को ठगा हुआ पाते हैं


मेले में अव्यवस्था
मेले में पंहुचने वाले किसान सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते नजर आते हैं. वैशाली के गौपालक राम नरेश सिंह ने आरोप लगाया कि मेले में आने से पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा सुविधाओं को लेकर तमाम तरह के दावे किये गये थे लेकिन यहां आने के बाद वे अपने को ठगा महसूस करते हैं.

बिजली पानी तक की सही व्यवस्था नहीं
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न्यूज़18 की टीम ने जब मेले का जायजा लिया तो वाकई सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आई. सरकार से लेकर प्रशासन तक मेले में गायों की संख्या बढ़ाने को लेकर तमाम तरह के प्रयासों का दम भरते हैं. लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है. मेले में पहुंचे किसान बिजली के एक बल्ब तक के लिये तरसते नजर आते हैं. पीने के पानी से लेकर रहने तक की व्यवस्था का अभाव साफ तौर पर दिखता है. सोनपुर मेले में कभी गौ पालकों को प्रोत्साहित करने के लिये पुरस्कारों की भी व्यवस्था थी, लेकिन आज पुस्कार और सम्मान समारोह अतीत की बातें रह गईं हैं.

(पटना से संजय कुमार)

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First published: November 18, 2019, 11:52 PM IST
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