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घर छोड़ने पर हो रही कुत्ते की फिक्र तो पटना के इन डॉग हॉस्टस्ल का करें रूख

News18 Bihar
Updated: February 13, 2020, 1:16 PM IST
घर छोड़ने पर हो रही कुत्ते की फिक्र तो पटना के इन डॉग हॉस्टस्ल का करें रूख
पटना के डॉग केयर में कुत्ते की देखभाल करता ट्रेनर

पटना के इन डॉग हॉस्टल्स (Dog Hostels) में कई ऐसे लोग भी आते हैं जो सुबह दफ्तर जाते हैं और शाम में फिर वापस लेने आ जाते हैं तब तक केयर टेकर बेहतर ढंग से देखभाल करते हैं.

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पटना. कहते हैं कुत्ता वफादार जानवर होता है और यही वफादारी का असर है कि लोग कुत्ते पालने का ना सिर्फ शौक रखते हैं बल्कि उसका सही से देखभाल भी करना चाहते हैं लेकिन परेशानी तब होती है जब उन्हें कुत्ते को छोड़कर कहीं बाहर जाना पड़ता है. पर हम जो खबर आपको बता रहे हैं उससे कुत्ते के शौकीन लोगों को ना सिर्फ सुकून मिलेगा बल्कि उनके कुत्ते की भी बेहतर ढंग से रखवाली हो सकेगी.

शहर में शुरू हुआ डॉग हॉस्टल्स का ट्रेंड

आखिर कौन हैं जो आपके कुत्तों की अब रखवाली करेगा तो इसका सवाल है डॉग हॉस्टल्स. अब तक आपने इंसानों का हॉस्टल तो देखा होगा और सुना होगा लेकिन बदलते जमाने में जानवरों के लिए भी हॉस्टल की जरूरत पड़ने लगी है और यही वजह है कि राजधानी पटना में डॉग हॉस्टल ट्रेंड भी शुरू हो गया है. ये हॉस्टल खासकर उन लोगों को राहत दे रहे हैं जो कुत्ते की वजह से घर छोड़ना नहीं चाहते थे पर अब डॉग हॉस्टल के खुल जाने से बेफिक्र होकर छुट्टियों में घर से बाहर घूमने फिरने निकल रहे हैं.

सेंटर्स में देखभाल से ट्रेनिंग तक की व्यवस्था

राजधानी पटना में आधा दर्जन से ज्यादा डॉग हॉस्टल खुल गए हैं जहां केयर टेकर से लेकर डॉक्टर तक उपलब्ध रहते हैं और आपके डॉग की खूब खातिरदारी भी होती है. यहां तक कि डॉग हॉस्टल ऐसी सारी सुविधाओं से लैस है जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हैं. अलग-अलग डॉग के लिए अलग -अलग केज बने हैं तो हॉस्टल में सीसीटीवी, एसी, ब्लोअर सभी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.

इन इलाकों में खोले गए हैं सेंटर्स

ऐसे तो गर्दनीबाग, राजेंद्र नगर, बोरिंग रोड में भी डॉग हॉस्टल खोल दिए गए हैं लेकिन जगदेव पथ स्थित इंटाइसिंग पेट्स नामक हॉस्टल का सबसे ज्यादा डिमांड है और यहां लोग इत्मीनान से अपने डॉग-डॉगी  को छोड़कर घूमने बाहर निकल रहे हैं. हॉस्टल संचालक अक्षय सिंह काफी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं क्योंकि उन्हें जानवरों से बचपन से ही खास लगाव था यही वजह है कि आर्किटेक्ट इंजीनियरिंग की पढाई करने के बाद इन्होंने नौकरी छोड़कर डॉग हॉस्टल खोला और देखते ही देखते इनकी चांदी कटने लगी.2 से 20 दिनों तक होती है देखभाल

डॉग हॉस्टल में जर्मन शेफर्ड, पग, बुलडॉग, डाबर मैन, पमेलियन, लेब्रा समेत कई अलग-अलग नस्ल के कुत्ते इस वक्त मौजूद हैं जिन्हें मालिकों ने 2 दिन से लेकर 20 दिनों तक के लिए देखभाल के लिए छोड़ा है. यानि इसके लिए एक दिन की कीमत अधिकतम 400 रूपये अदा करनी पड़ती है और लोग बड़े शौक से हॉस्टल में देखभाल के लिए छोड़ जाते हैं. कई ऐसे लोग भी हॉस्टल में डॉग रखने आते हैं जो सुबह दफ्तर जाते हैं और शाम में फिर वापस लेने आ जाते हैं तब तक केयर टेकर बेहतर ढंग से देखभाल करते हैं और यहां ट्रेनिंग भी देते हैं.

वीडियो कॉल से भी देते हैं कुत्ते की जानकारी

हॉस्टल में कुत्ते की सही से देखभाल हो रही है या नहीं इसको लेकर हॉस्टल संचालक रोज वीडियो कॉलिंग और वाट्सऐप कॉल भी करते हैं जिससे कुत्ते मालिक भी संतुष्ट रहते हैं. कुत्ते के मालिक रवि भी बताते हैं कि जैसे ही जानकारी मिली कि डॉग हॉस्टल खुला है तो हमने भी कुत्ते को हॉस्टल में रख दिया है क्योंकि 15 दिनों के लिए विदेश जाना है और इस बीच कुत्ते की फिक्र अब नहीं सताएगी. जाहिर है हॉस्टल खुल जाने से जहां कुत्ते की बेहतर ढंग से रखवाली हो रही है वहीं मालिकों को भी सुकून मिला है कि कुत्ते की वजह से उनके घूमने फिरने पर अब ब्रेक नहीं लग सकेगा.

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First published: February 13, 2020, 1:11 PM IST
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