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..तो इस वजह से प्रशांत किशोर ने JDU के खिलाफ अख्तियार किया अलग रुख!

Amitesh | News18 Bihar
Updated: December 12, 2019, 4:39 PM IST
..तो इस वजह से प्रशांत किशोर ने JDU के खिलाफ अख्तियार किया अलग रुख!
नागरिकता संशोधन बिल पर ट्वीट कर प्रशांत किशोर जेडीयू के नेताओं के निशाने पर आ गए है. (File Photo)

नागरिकता संसोधन विधेयक (citizenship bill) पर पार्टी लाइन से अलग राय रखने वाले प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जेडीयू आलाकमान पर सवाल खड़ा कर कबतक साथ रह पाएंगे पीके.

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पटना. जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) इन दिनों अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े करने में लगे हैं. चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके की जेडीयू (JDU) में एंट्री तो 2018 में हुई थी. उन्हें 16 अक्टूबर 2018 को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी. पार्टी उपाध्यक्ष के तौर पर उनकी ताजपोशी को जेडीयू में उन्हें नंबर दो की हैसियत के तौर पर देखा जाने लगा था. लेकिन, एक साल बाद अब लगता है पीके अब अपनी भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं.

सूत्रों के मुताबिक, जिस भूमिका को लेकर प्रशांत किशोर की जेडीयू में एंट्री हुई थी, उस तरह की भूमिका उनको नहीं दी गई. वो पार्टी में भले ही उपाध्यक्ष बन गए लेकिन, पार्टी के भीतर फैसलों में उनकी भूमिका उस तरह से नहीं हो पाई, जितनी की उन्होंने अपेक्षा की थी. यहां तक कि झारखंड विधानसभा चुनाव में भी उनको फ्री हैंड नहीं दिया गया, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी.

अब, प्रशांत किशोर की तरफ से अलग रुख अपनाया गया है. नागरिकता संशोधन बिल पर उनके ट्वीट ने ऐसा भूचाल लाया है, जिसने पूरी पार्टी को ही सकते में डाल दिया है. प्रशांत किशोर की तरफ से किए गए ट्वीट में पार्टी की तरफ से इस बिल के पक्ष में लोकसभा में मतदान करने को लेकर निराशा व्यक्त की गई. प्रशांत किशोर के बाद जेडीयू के महासचिव और पूर्व सांसद पवन वर्मा की तरफ से भी इस बिल पार्टी के रुख को लेकर सवाल खड़ा किया गया. इसके बाद पार्टी के नेता गुलाम रसूल वलियावी और एक-दो नेताओं की तरफ से भी बिल पर पार्टी के रुख पर सवाल खड़ा किया गया.

प्रशांत किशोर के पास नहीं है पार्टी उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी

पार्टी लाइन से अलग हटकर दिए गए इस बयान को पार्टी ने गंभीरता से भी लिया. पार्टी की तरफ से बिहार अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने इस तरह की बयानबाजी से बचने की नसीहत भी दी. पार्टी महासचिव संजय झा ने भी प्रशांत किशोर के पास उपाध्यक्ष या किसी और तरह की जिम्मेदारी होने की बात ही सिरे से खारिज कर दी.
संजय झा ने साफ शब्दों में कहा कि नीतीश कुमार के दोबारा पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद नई टीम अभी बनी ही नहीं है, लिहाजा पार्टी के सभी पुराने पदाधिकारी निवर्तमान पदाधिकारी हैं. ऐसे में न वो खुद पार्टी महासचिव हैं और न ही प्रशांत किशोर पार्टी उपाध्यक्ष.


पीके और पवन वर्मा के खिलाफ पार्टी उठा सकती है कदम
लेकिन, पार्टी के भीतर से ही प्रशांत किशोर को दी गई नसीहत का उनपर असर होता नहीं दिख रहा है. प्रशांत किशोर का लगातार ट्वीट करना जारी है. प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर जेडीयू को उन लोगों के भरोसे और विश्वास की याद दिलाई है, जिन्होंने 2015 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए समर्थन दिया है. सूत्रों के मुताबिक, नसीहत के बावजूद प्रशांत किशोर की तरफ से आ रहे लगातार ट्वीट ने पार्टी आलाकमान की त्योरियां चढ़ा दी हैं. पार्टी प्रशांत किशोर से खुश नहीं है.
जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही प्रशांत किशोर और पवन वर्मा को नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब तलब कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों नेताओं को पार्टी से निलंबित भी किया जा सकता है.
अब बीजेपी भी हुई पीके पर हमलावर
प्रशांत किशोर के ट्वीट पर जेडीयू की नसीहत के बाद अब बीजेपी भी हमलावर हो गई है. पार्टी की तरफ से बिहार अध्यक्ष संजय जायसवाल ने पहले हमला बोला था, अब राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता सी पी ठाकुर भी पीके को राजनीति और बिजनेस का फर्क समझा रहे हैं.
न्यूज 18 से बातचीत करते हुए सी पी ठाकुर ने कहा, नीतीश कुमार राजनीतिज्ञ हैं, वो प्रशांत किशोर की बात पर नहीं चलेंगे और चलना ठीक भी नहीं होगा.


एलजेपी ने बताया जेडीयू का अंदरूनी मामला
उधर, जेडीयू की दूसरी सहयोगी एलजेपी भी इसे जेडीयू के भीतर का मामला बता रही है. न्यूज 18 से बात करते हुए एलजेपी के राष्ट्रीय़ अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा, "यह जेडीयू का अंदरूनी मामला है. लेकिन, खुशी है कि दोनों सदनों में जेडीयू ने इस बिल का समर्थन किया. इसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू के सभी सांसदों को धन्यवाद."

जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस कदम से एनडीए के भीतर समीकरण बेहतर दिख रहे हैं. लेकिन, जेडीयू के समीकरण को लेकर अब विरोधी सवाल खड़े कर रहे हैं. विरोधियों की तरफ से प्रशांत किशोर को महागठबंधन में अभी से ही ऑफर दिया जाने लगा है.
महागठबंधन में शामिल आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा, "प्रशांत किशोर जेडीयू में पद त्याग कर आएं, महागठबंधन में उनका स्वागत है. हम सबलोग उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं."


2020 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर रणनीति बनाने के सवाल पर माधव आनंद ने कहा कि यह स्वाभाविक है, अगर प्रशांत किशोर रणनीति बनाने में महागठबंधन की मदद करें.

फिलहाल, प्रशांत किशोर जेडीयू के नेताओं के निशाने पर आ गए है और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाना उन्हें महंगा साबित हो सकता है.

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First published: December 12, 2019, 4:35 PM IST
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