Bihar Election Result 2020: जीत के बाद नीतीश बोले, जनता मालिक है, सहयोग के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद

जेडीयू को बिहार में इस बार सिर्फ 43 सीट मिली हैं.
जेडीयू को बिहार में इस बार सिर्फ 43 सीट मिली हैं.

Bihar Election Result 2020: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने राज्‍य की जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का शुक्रिया अदा किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 8:21 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम (Bihar Election Result 2020) एनडीए के लिहाज से अच्‍छे रहे हैं, लेकिन इस बार जेडीयू को काफी नुकसान हुआ है. इसके बाद भी एनडीए ने 125 सीटों पर जीत दर्ज कर फिर से सरकार बनाने का बहुमत पार कर लिया है. इस बीच बिहार में नई सरकार बनने की कवायद भी तेज हो गई है. वहीं, महागठबंधन से जोरदार टक्‍कर के बाद मिली जीत के बाद बिहार के मुख्‍यमंत्री और जेडीयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने राज्‍य की जनता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) को धन्‍यवाद दिया है.

नीतीश ने कही ये बात
बिहार के मुख्‍यमंत्री और जेडीयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नीतीश कुमा ने लिखा,' जनता मालिक है. उन्होंने एनडीए को जो बहुमत प्रदान किया, उसके लिए जनता-जनार्दन को नमन है. मैं पीएम नरेंद्र मोदी को मिल रहे उनके सहयोग के लिए धन्यवाद करता हूं.





गौरतलब है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन को 125 सीटें हासिल हुईं हैं. जबकि विपक्षी महागठबंधन को 110 सीटें मिली हैं. सभी दलों में सफलता का प्रतिशत सबसे अच्छा भाजपा का रहा जिसने 110 सीटों पर चुनाव लड़कर 73 सीटों पर जीत दर्ज की. सहयोगी वीआईपी और हम (एस) ने चार-चार सीटों पर जीत दर्ज की हैं.

बिहार चुनाव में अपने प्रदर्शन के बल पर भाजपा करीब दो दशक के बाद राजग में जदयू को पीछे छोड़ वरिष्ठ सहयोगी बनी है. ऐसा लगता है कि भाजपा राज्य में अंतत: अपने सहयोगियों की परछाई से बाहर निकल पाई है लेकिन गठबंधन के नए गणित को देखें तो 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले राजग का मत प्रतिशत घटा है. लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (लोजपा समेत) को 40 में से 39 सीटें और 53 फीसदी से अधिक मत मिले थे. बिहार चुनावों में लोजपा अकेले उतरी तथा उसे छह फीसदी से भी कम मत मिले. हालांकि अब हम और वीआईपी राजग का हिस्सा बन गए. निर्वाचन आयोग के ताजे आंकड़ों के मुताबिक राजग (भाजपा, जदयू, हम और वीआईपी) का सम्मिलित मत प्रतिशत 40 फीसद से कम है.वहीं राजद नीत महागठबंधन को करीब 37 फीसदी मत मिले. लोकसभा चुनाव में जदयू का मत प्रतिशत 21.81 था. जबकि विधानसभा चुनाव में महज 15 फीसदी रहा. भाजपा का मत प्रतिशत आम चुनाव में 23.58 फीसदी था और विधानसभा चुनाव में करीब 20 फीसदी रहा है.

चुनाव आयोग की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सात लाख छह हजार 252 लोगों ने या 1.7 फीसदी मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना, जिसके तहत उन्होंने किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं किया. तीन चरणों में हुए विधानसभा चुनावों में चार करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है. सात करोड़ 30 लाख से अधिक मतदाताओं में से 57.07 फीसदी ने मतदान किया था. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में ‘नोटा’ का विकल्प 2013 में शुरू किया गया था, जिसका चुनाव चिह्न बैलेट पेपर है जिस पर काले रंग का क्रॉस लगा होता है.

उच्चतम न्यायालय के सितम्बर 2013 के एक आदेश के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम में नोटा का बटन जोड़ा, जिसे वोटिंग पैनल पर सबसे अंतिम विकल्प रखा जाता है. उच्चतम न्यायालय के आदेश से पहले जो लोग किसी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते थे, उनके पास एक फॉर्म भरने का विकल्प होता था जिसे ‘फॉर्म 49-O’ कहा जाता था. हालांकि इस फॉर्म को भरने से मतदान की गोपनीयता के कानून का उल्लंघन होता था. बहरहाल, उच्चतम न्यायालय ने चुनाव आयोग को यह आदेश देने से मना कर दिया कि अगर अधिकतर मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना तो फिर से चुनाव कराए जाएंगे. बिहार में कई सीटों पर उम्मीदवारों के जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को पड़े हैं.
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