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अमित शाह के इस बयान से बिहार में बढ़ गया सुशील मोदी का कद !

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: October 21, 2019, 9:43 AM IST
अमित शाह के इस बयान से बिहार में बढ़ गया सुशील मोदी का कद !
नीतीश कुमार फिलहाल एनडीए में हैं और बिहार में सुशील मोदी के साथ सरकार चला रहे हैं

JDU 2013 में भाजपा से अलग हुई थी. इस अलगाव के बाद जदयू ने 2015 में अपने घोर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर ना सिर्फ महागठबंधन बनाया बल्कि NDA के खिलाफ 2015 का विधानसभा चुनाव भी जीता

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पटना. भारतीय जनता पार्टी(BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह स्पष्ट कर दिया बिहार में नीतीश कुमार के चेहरे पर ही विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा. अमित शाह के इस बयान ने बिहार में चेहरे की लड़ाई को लेकर चल रहे,JDU और BJP के बीच की खींचतान को बिल्कुल शांत कर दिया है इसके साथ ही ये माना जा रहा है कि सुशील मोदी का कद भी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बढ़ गया है.

गिरिराज समेत कई नेता को नहीं भा रहे थे नीतीश

हाल के ही दिनों में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, BJP विधान पार्षद संजय पासवान और सच्चिदानंद राय सरीखे कई नेताओं ने, नीतीश के खिलाफ जो मोर्चा खोल रखा था लेकिन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री ने यह बयान देकर उन नेताओं के मुंह पर ताला जड़ दिया है ऐसे में यह सवाल उठता है कि कि क्या अमित शाह का यह बयान, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का ग्राफ और बढ़ाता है ?

सुशील मोदी ने पिछले महीने ही की थी नीतीश की कप्तानी की घोषणा

सुशील कुमार मोदी की बात करें तो उन्होंने सितंबर महीने की 11 तारीख को ट्वीट कर कहा था कि बिहार में कप्तान बदलने की जरूरत नहीं है. बिहार का कप्तान लगातार चौके-छक्के जड़ के विरोधियों के हालत को पस्त किए हुए है. उनके इस बयान पर कई प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थी. यहां तक कि सुशील कुमार मोदी को नीतीश कुमार का पिछलग्गू तक कहा गया, लेकिन अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद इस बात की पुष्टि कर दी है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सुशील कुमार मोदी का कद बिहार में और भी बढ़ गया है.

नीतीश के डिफेंडर रहे हैं सुशील

यह बात इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि सुशील कुमार मोदी ने हमेशा गठबंधन धर्म का पालन करते हुए नीतीश कुमार को डिफेंड ही किया है. हालांकि गांधी मैदान में रावण वध के दौरान सुशील कुमार मोदी और भाजपा का कोई नेता नहीं पहुंचा था और इसे भी जदयू और भाजपा के बीच की बढ़ती दूरियों के रूप में देखा जाने लगा था. हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जिस प्रकार से नीतीश कुमार पर हमला बोला, भाजपा के विधान पार्षद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने नीतीश कुमार को दिल्ली की राह दिखाई थी ऐसे बयानों पर अब लगाम लग जाएगा यह माना जा रहा है.
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सुशील मोदी, नीतीश कुमार,एनडीए
सुशील मोदी को बिहार में नीतीश कुमार का सबसे बड़ा डिफेंडर भी माना जाता है
(फाइल फोटो)


दोनों तरफ से हुई थी बयानबाजी

बयानबाजी के वक्त भी बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इन बयानों को व्यक्तिगत बयान बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की थी. इसके साथ ही बयान देने वाले नेताओं को आवास बुलाकर नसीहत देने का काम भी किया था, बावजूद इसके भाजपा के कई नेता नीतीश के खिलाफ बयानबाजी करते रहे. रिएक्शन में जदयू की तरफ से भी जवाब आता रहा लेकिन दोनों दलों के बड़े नेताओं की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया जिससे जदयू-भाजपा गठबंधन में कोई दरार या गठबंधन टूट की स्थिति में है, ऐसी स्थिति दिखे.

जुदाई से हुआ था घाटा साथ आए तो मिली जीत

गौरतलब है कि JDU 2013 में भाजपा से अलग हुई थी. जदयू ने 2015 में अपने घोर विरोधी लालू यादव के साथ मिलकर ना सिर्फ महागठबंधन बनाया बल्कि NDA के खिलाफ 2015 का विधानसभा चुनाव भी लड़ने का काम किया. इस चुनाव में महागठबंधन को अप्रत्याशित जीत हासिल हुई थी. भाजपा ने रालोसपा लोजपा और हम जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन कर विधानसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन भाजपा और NDA को करारी हार का सामना करना पड़ा था. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू की शानदार केमेस्ट्री देखने को मिली थी ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में सुशील कुमार मोदी का रोल क्या होता है. क्या उनके कहने पर बिहार में किस तरह के बदलाव किए जाते हैं.

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First published: October 21, 2019, 9:40 AM IST
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