लालू परिवार में उलझी रिश्तों की डोर, भाई-बहन के प्यार पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा हावी!
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लालू परिवार में उलझी रिश्तों की डोर, भाई-बहन के प्यार पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा हावी!
तेजस्वी यादव, मीसा भारती और तेजप्रताप यादव

पिता की विरासत में बच्चों का अधिकार सामान्य सी बात है, लेकिन जब उस विरासत पर दावेदारी एक से अधिक हो तो सामान्य सी चीज भी असामान्य हो जाती है. कुछ ऐसा ही है लालू-राबड़ी परिवार में, जहां पिता की राजनीतिक विरासत लेकर उनके बच्चों के बीच के रिश्ते उलझ गए हैं.

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पिता की विरासत में बच्चों का अधिकार तो सामान्य सी बात है, लेकिन जब उस विरासत पर दावेदारी एक से अधिक होती है तो सामान्य सी चीज भी बेहद असामान्य हो जाती है. कुछ ऐसा ही है लालू-राबड़ी  परिवार में, जहां पिता की राजनीतिक विरासत हासिल करने को लेकर उनके बच्चों के बीच के रिश्ते उलझ गए हैं.

यूं तो लालू प्रसाद यादव ने काफी पहले ही अपनी सबसे छोटी संतान और अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. लेकिन यह न तो लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को हजम हुआ और न ही उनकी सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती को ही. यही कारण है कि उत्तराधिकार को लेकर हालात यह हैं कि घर में ही खेमेबाजी जैसे हालात हैं. लेकिन परिवार का कोई सदस्य खुलकर यह नहीं मानता. न तेजस्वी, न तेजप्रताप और न ही मीसा भारती.

2015 में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को जब अपना उत्तराधिकारी घोषित किया, तो मानो परिवार में भाई-बहन के बीच के अघोषित कोल्ड वॉर छिड़ गया. तेजस्वी के राजनीति में आने से पहले से ही मीसा भारती राजनीति में सक्रिय हो गई थीं. तो ऐसा लगा कि लालू की राजनीतिक वारिस वे ही बनेंगी. ये शायद मीसा भारती को उम्मीद भी थी और इच्छा भी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.



पार्टी के बाद परिवार में भी कोई नहीं सुन रहा तेजप्रताप को
वहीं दूसरी ओर शुरुआती दिनों में लालू-राबड़ी के बड़े बेटे तेजप्रताप ने तो कुछ नहीं कहा लेकिन ऐश्वर्या से तलाक प्रकरण के बाद तेजप्रताप ने खुलकर लालू विरासत पर यह कहते हुए अपनी दावेदारी ठोक दी कि वे बड़े बेटे हैं. साथ ही उनमें ऐसा क्या नहीं है जो तेजस्वी में है. लालू स्टाइल को कई जगहों पर कॉपी कर उन्होंने यह संदेश देने की भी कोशिश की कि जिस अंदाज से लालू इतना आगे बढ़े, वे गुण सिर्फ उनमें ही हैं. लेकिन इसके बाद भी पार्टी और परिवार में उनकी कोई सुन नहीं रहा. तेजप्रताप की स्थिति यह है कि वे तेजस्वी के साथ चुनाव प्रचार में जाने को बेताब हैं, लेकिन हेलीकॉप्टर के लिए दो बार बोर्डिंग पास नहीं बना और तैयार रहकर भी तेजस्वी के साथ नहीं जा सके.

तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव और तेजप्रताप यादव (फाइल फोटो)


इधर, तेजस्वी ने अपना राजनीतिक कद काफी बढा लिया है. जनता के बीच उनकी लोकप्रियता भी बढ रही है. पूरी आरजेडी पर उनका प्रभाव है. जाहिर है कि राजनीति के इस मुकाम पर वे अपने आसपास किसी को नहीं देखना चाहेंगे. चाहे वह बड़ा भाई हो या बड़ी बहन. यही कारण है कि तेजप्रताप के बार-बार कहने के बाद भी तेजस्वी उन्हें चुनाव प्रचार में साथ नहीं ले जा रहे.

पार्टी से अलग तेजप्रताप ने जहानाबाद और सीतामढ़ी में उतारे उम्मीदवार
लालू फैमिली में भले ही कोई न माने, लेकिन सभी लोग जानते हैं कि परिवार में खेमेबाजी है. तेजप्रताप और तेजस्वी तो आमने-सामने हैं. क्योंकि अगर अलगाव नहीं होता तो कृष्ण रूपी तेजप्रताप के रथ पर अर्जुन रूपी तेजस्वी चढ़ने को तैयार क्यों नहीं हैं? अगर ऐसा नहीं होता, तो क्यों नहीं औपचारिक रूप से आरजेडी की चुनावी सभाओं में तेजप्रताप नहीं हैं? क्यों तेजप्रताप ने सीतामढ़ी और जहानाबाद की सीट से अपने कैंडिडेट दे दिए? भाई से रिश्ते की खटास पर तेजप्रताप ने कभी खुलकर नहीं कहा लेकिन वे यह बार-बार कहते रहे हैं कि तेजस्वी के आसपास के लोग भाईयों को अलग करना चाहते हैं. ये सवाल अलग सा है कि आखिर वे लोग हैं कौन?

मीसा भारती फिलहाल दोनों नाव पर सवार हैं
इन सबके बीच बहन मीसा भारती दोनों ही नाव पर सवार हैं. वह न तो तेजस्वी का खुलकर समर्थन कर रहीं और न ही तेजप्रताप का. लालू यादव की इस राजनीतिक विरासत की त्रिकोणीय कोल्डवॉर में मीसा भारती भी एक कोण हैं. जहां से उनकी नजर इस विरासत पर बनी हुई है और उसे हासिल करने की इच्छा अभी भी है, भले कुछ दबी हुई सी ही. फिलहाल मीसा भारती की नजर अपने चुनाव पर है. वे दोनों भाई और मां राबड़ी देवी को लेकर परिवार की एकजुटता दिखाते हुए पाटलिपुत्र की जनता से वोट करने की अपील कर रही हैं.

बहरहाल मौजूदा हालात में सुलह के कोई आसार दिख नहीं रहे. लेकिन मां राबड़ी देवी अपने बच्चों के बीच सुलह कराने को लेकर भरसक कोशिश कर रही हैं. मीडिया में भी बार-बार कह रही हैं कि उनके परिवार में भी वही सबकुछ हो रहा है जो सामान्य परिवारों में होता है. लेकिन तेजस्वी, तेजप्रताप और मीसा भारती के बीच जो दरार है और वह दिख भी रहा है. लेकिन फिलहाल कोई मानने को तैयार नहीं दिख रहा.

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