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प्रशांत किशोर की काट के लिए JDU ने अपनाई ये 'खास' रणनीति !
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News18 Bihar
Updated: February 22, 2020, 9:44 AM IST
प्रशांत किशोर की काट के लिए JDU ने अपनाई ये 'खास' रणनीति !
नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)

प्रशांत किशोर के तेवर तल्ख हैं और वे लगातार इस कोशिश में हैं कि पूरा विपक्ष एक साथ आए. इस बीच जेडीयू ने भी पीके से निबटने के लिए एक खास रणनीति तैयार की है, और वह है...

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पटना. दो साल पहले जब प्रशांत किशोर उर्फ पीके (Prashant Kishor) को जेडीयू में शामिल किया गया था, तो सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने उन्हें भविष्य का लीडर कहा था. अब जब दोनों के बीच राजनीतिक अदावत हो गई और पीके ने भी मोर्चाबंदी की तैयारी कर ली है. हालांकि उनके सीधे निशाने पर सीएम नीतीश न होकर उनके विकास के दावे हैं. पीके ने जब 18 फरवरी को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया तो उन्होंने साफ कर दिया कि वे इसे ही टारगेट करेंगे और नया बिहार बनाने के लिए नए विकल्प की तलाश की बात जनता से करेंगे.

पीके के तेवर तल्ख हैं और वे लगातार इस कोशिश में हैं कि पूरा विपक्ष एक साथ आए. इस बीच जेडीयू ने भी पीके से निबटने के लिए एक खास रणनीति तैयार कर ली है, और वह है प्रशांत किशोर के किसी भी हमले पर रिएक्ट नहीं करने की रणनीति. जेडीयू के सूत्रों से खबर है कि अब पीके की हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, लेकिन प्रतिक्रिया से परहेज किया जाएगा. यही वजह है कि इक्के-दुक्के नेताओं को छोड़ दें तो पीके पर हमलावर रुख रखने वाले पार्टी के नेता और प्रवक्ता लगातार खामोश हैं.

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि आरसीपी सिंह और ललन सिंह जैसे पार्टी के सीनियर नेता तो पहले से पीके का नाम नहीं लेते हैं. यही नहीं, पीके बयानों पर प्रतिक्रिया देने से भी बचते हैं. यहां तक कि प्रवक्ता भी पीके की बातों को अधिक तवज्जो देते हुए नहीं दिखना चाहते हैं. बकौल रवि उपाध्याय इसके पीछे कुछ खास वजहें भी हैं. दरअसल, प्रशांत किशोर पिछले महीने तक जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे और वे सीएम नीतीश की तारीफ करते नहीं थकते थे. विधानसभा चुनाव 2015 में उन्होंने ही यह नारा गढ़ा था-बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है. पर अब राजनीति उलट गई है और पीके के निशाने पर सीएम नीतीश कुमार ही हैं.

इस मामले में वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि पीके, सीएम नीतीश को उन्हीं की रणनीतियों से मात देने की खास स्ट्रेटेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं. 18 फरवरी को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके ने साफ कर दिया कि वे सीएम नीतीश की सबसे बड़ी यूएसपी - 'विकास की राजनीति' को ही टारगेट करेंगे.



बकौल अशोक कुमार शर्मा, दरअसल पीके आरजेडी और जेडीयू से इतर एक नई लकीर खींचने की कवायद में हैं. इसी के तहत वे 'बात बिहार की' कार्यक्रम लेकर सामने आए हैं. देखने वाली बात ये होगी कि जातिगत राजनीति के जंजाल में फंसे बिहार में पीके (प्रशांत किशोर सवर्ण जाति से हैं) अपनी राजनीति कैसे आगे बढ़ाते हैं.

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First published: February 22, 2020, 9:07 AM IST
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