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इस अस्‍पताल में अपने ही बेटे का पैर काटने की गुहार लगा रहे हैं परिजन

इस अस्‍पताल में अपने ही बेटे का पैर काटने की गुहार लगा रहे हैं परिजन

भले ही बिहार सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती हो, लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा तो दूर इलाज तक मयस्सर नहीं है। सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती मरीजों और इनकी स्थिति को देखकर लोग सरकारी दावे और इंसानियत पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं।

भले ही बिहार सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती हो, लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा तो दूर इलाज तक मयस्सर नहीं है। सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती मरीजों और इनकी स्थिति को देखकर लोग सरकारी दावे और इंसानियत पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं।

भले ही बिहार सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती हो, लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा तो दूर इलाज तक मयस्सर नहीं है। सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती मरीजों और इनकी स्थिति को देखकर लोग सरकारी दावे और इंसानियत पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं।

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भले ही बिहार सरकार गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती हो, लेकिन मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा तो दूर इलाज तक मयस्सर नहीं है। सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में भर्ती मरीजों और इनकी स्थिति को देखकर लोग सरकारी दावे और इंसानियत पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं।

सीतामढ़ी निवासी छोटू ट्रक की चपेट में आने से अपना पैर गंवा बैठा। परिजनों ने उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां स्थिति गंभीर होने के कारण पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। परिजन पिछले 22 मार्च को उसे पीएमसीएच लाए जहां इसे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। लेकिन यहां उसका इलाज नहीं किया गया। परिजनों का आरोप है कि सही इलाज नहीं होने की वजह से बच्चे के पैर का जख्म गहरा हो गया है और अब स्थिति यह है कि इमरजेंसी वार्ड से मरीज को हटाकर राजेंद्र सर्जिकल वार्ड में भेज दिया गया है जहां बेड के अभाव में मरीज जमीन पर कराह रहा है।



वहीं, मरीज के पूरे शरीर में इंफेक्शन होने के डर से परिजन पैर काटने के लिए डॉक्टर से फरियाद कर रहे हैं। हालत ये है कि चिकित्सा के अभाव में गहरे जख्म के कारण पैर में इंफेक्शन हो गया है और घाव बदबू देने लगा है।

राजेंद्र सर्जिकल वार्ड में ही दूसरा मरीज आनंदी राय जो पैर में फ्रैक्चर होने के बाद यहां इलाज के लिए पहुंचा, इस बुजुर्ग को भी भर्ती तो कर लिया गया लेकिन इसका न तो इलाज हुआ और ना ही बेड दिया गया। मरीज के लिए डॉक्टर ने दवा और इंजेक्‍शन जरूर लिख दिए, लेकिन दवा और इंजेक्‍शन खरीदने के बाद कोई भी इंजेक्‍शन लगाने तक नहीं आया। जब इस मामले पर पीएमसीएच के प्रिंसिपल से पूछा गया तो इन्होंने साफ कहा कि मरीज की संख्या इतनी अधिक है कि सभी को बेड मिलना संभव नहीं है।

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