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लालू-राबड़ी की पसंद के अलावा ये चेहरे भी हैं RJD अध्यक्ष की रेस में

News18 Bihar
Updated: November 24, 2019, 1:37 PM IST
लालू-राबड़ी की पसंद के अलावा ये चेहरे भी हैं RJD अध्यक्ष की रेस में
पिछले 9 सालों में 4 बार अध्यक्ष चुने जा चुके रामचन्द्र पूर्वे का पलड़ा वाकई भारी है (लालू के साथ तेजस्वी की फाइल फोटो)

रामचन्द्र पूर्वे (Ramchandra Purvey) की पहचान एक सीधे साधे और एक सुलझे हुए नेता के तौर पर होती है. पार्टी (RJD) में सबके साथ एक जैसा व्यवहार रखने के कारण उन्हें सभी पसन्द करते हैं. खासकर लालू-राबड़ी (Lalu-Rabri) के वो सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं

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रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह

पटना. बिहार में आरजेडी (RJD) का अगला अध्यक्ष कौन होगा. क्या लालू-राबड़ी (Lalu-Rabri) की पसंद पर लगेगी दुबारा मुहर या फिर तेजस्वी (Tejasvi Yadav) राज में युवा चेहरे पर लगेगा दांव. ये सवाल इन दिनों बिहार की राजनीति में तेजी से खड़ा हो रहा है. ये भी कहा जा रहा है कि अगले 4 दिनों में पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे के भरोसे का लिटमस टेस्ट भी होगा.

रामचन्द्र पूर्वे के भरोसे का लिटमस टेस्ट

लालू-राबड़ी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक रामचन्द्र पूर्वे का अगले 4 दिनों में उनकी ईमानदारी का लिटमस टेस्ट होनेवाला है. पिछले 9 सालों में 4 बार अध्यक्ष चुने जा चुके रामचन्द्र पूर्वे का पलड़ा वाकई भारी है लेकिन इसबार चुनौतियां लालू परिवार के भीतर से ही है. इसलिए खतरा बड़ा है फिर भी लालू के सबसे भरोसेमंद होने के नाते उनका दबदबा ज्यादा मजबूत है. तेजप्रताप के साथ उनके रिश्ते चूंकि बहुत खराब है तो जाहिर है इसबार उनकी दावेदारी तलवार की धार पर टिकी है.

तेजप्रताप बिगाड़ सकते हैं रामचन्द्र पूर्वे का खेल 

यूं तो रामचन्द्र पूर्वे की दावेदारी पक्की है और अब तक कोई भी दूसरा उम्मीदवार खुलेआम चुनाव लड़ने की बात भी नहीं कर रहा है लेकिन सबको तेजप्रताप से इसबात का डर है कि कहीं लोकसभा चुनाव की तरह इसबार भी वो प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में अपना कोई उम्मीदवार ना उतार दें. वैसे भी तेजप्रताप और रामचन्द्र पूर्वे के बीच रिश्ते अच्छे नहीं रहे. छात्र संघ चुनाव का मसला हो या फिर पार्टी दफ्तर में ताला जड़ने की बात दोनों के बीच कई बार आपस में ठनी है हालांकि इस बार तेजप्रताप कोई उथल-पुथल करेंगे इसकी गुंजाइश बहुत कम है क्योंकि अगर तेजप्रताप ऐसा कुछ भी करते हैं तो इसका मतलब साफ है कि वो अपने पिता के फैसले के खिलाफ जाएंगे.

तेजस्वी जता चुके हैं भरोसा
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ऐसे में तेजस्वी भी इसबार बर्दाश्त करने के मूड में नहीं क्योंकि तेजस्वी भी इशारों में रामचंद्र पूर्वे पर अपना भरोसा जता चुके हैं. वैसे भी रामचन्द्र पूर्वे पार्टी के भीतर पहले नेता हैं जिन्होंने सबसे पहले ना सिर्फ बेहद मजबूती से तेजस्वी के नेतृत्व में 2020 का चुनाव लड़ने की बात कही थी बल्कि पार्टी के हर मंच से तेजस्वी को मुख्यमंत्री का चेहरा बताया था यही कारण है कि कई मौकों पर तेजस्वी रामचंद्र पूर्वे के कारण अपने बड़े भाई तेजप्रताप से भी भीड़ गए.

4 बार से लगातार लेकिन इस बार हो सकते हैं कई दावेदार

रामचन्द्र पूर्वे की पहचान एक सीधे साधे और एक सुलझे हुए नेता के तौर पर होती है पार्टी में सबके साथ एक जैसा व्यवहार रखने के कारण उन्हें सभी पसन्द करते हैं. खासकर लालू-राबड़ी के वो सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं यही कारण है कि अब्दुल बारी सिद्दकी के 2010 में विरोधी दल के नेता चुने जाने के बाद लालू ने रामचंद्र पूर्वे को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया तब से अभी तक वो प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे हैं अब पांचवी बार भी उनका पलड़ा भारी है. अंदरखाने में खबर ये भी है कि पार्टी के दो युवा चेहरे इसबार अपना भाग्य आजमाना चाहते हैं एक आलोक मेहता हैं जो तेजस्वी के बेहद करीबियों में से एक हैं तो दूसरे शिवचंद्र राम जो दलित युवा चेहरा हैं वो और बात है कि ये दोनों नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं लेकिन 25 नवंबर को जब अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल होगा तब पता चलेगा कि रामचन्द्र पूर्वे के सामने कौन उम्मीदवार खड़ा होता है.

निगाहें विधायकों पर भी

ये बात सही है कि अध्यक्ष पद पर रामचंद्र पूर्वे का दबदबा ज्यादा है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि लालू परिवार के अंदर भी गुटबाजी है. ऐसे में अगर वाकई तेजप्रताप का मन बदलता है तो इसमें कोई संदेह नहीं कि रामचंद्र पूर्वे के लिए रास्ता मुश्किल हो सकता है.

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First published: November 24, 2019, 1:23 PM IST
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