किसी पार्टी से नहीं मिला काम, क्या बिहार से बोरिया-बिस्तर बांधेंगे प्रशांत किशोर!
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किसी पार्टी से नहीं मिला काम, क्या बिहार से बोरिया-बिस्तर बांधेंगे प्रशांत किशोर!
बिहार में काम कर रही अपनी संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) को प्रशांत किशोर ने समेटने का प्लान बना लिया है.

'बात बिहार की' लॉन्चिंग के बाद ऑनलाइन मेंबरशिप भी जारी रही, इस दौरान प्रशांत किशोर बिहार के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बीच अपनी जगह भी तलाशते रहे. लेकिन पीके को बिहार के राजनीतिक गलियारे में कहीं भी खड़े होने की जगह नहीं मिली.

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पटना. बिहार विधानसभा का चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) सामने है जिसकी सुगबुगाहट कोरोना के इस संकट में भी शुरू हो गई है. लेकिन चुनावी चौसर में अपनी लोहा मनवाने वाले जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) उर्फ पीके की चमक इस विधानसभा में धीमी पड़ने लगी है.

'फिर से एक बार हो नीतीशे कुमार हो' की बात करने वाले प्रशांत किशोर जब नीतीश कुमार से अलग हुए तो उन्होंने बजाप्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह ऐलान किया था कि वो बिहार के लोगों के बीच रहेंगे. प्रशांत किशोर ने पूरे बिहार में 'बात बिहार की' अभियान की शुरुआत की थी, जिसमें ऑनलाइन युवाओं को जोड़ना था और पीके ने युवाओं को राजनीति में लाने का फैसला किया था. 'बात बिहार की' लॉन्चिंग के बाद ऑनलाइन मेंबरशिप भी जारी रही, इस दौरान प्रशांत किशोर बिहार के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के बीच अपनी जगह भी तलाशते रहे. लेकिन पीके को बिहार के राजनीतिक गलियारे में कहीं भी खड़े होने की जगह नहीं मिली.

आई-पैक के पटना ब्रांच को समटने का प्लान
सूत्रों से मिली जानकारी के जानकारी के मुताबिक बिहार में काम कर रही अपनी संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) को प्रशांत किशोर ने समेटने का प्लान बना लिया है. आई-पैक के पटना ब्रांच से तकरीबन 250 लोग जुड़े हुए हैं. इसमें लगभग 75 लोग सेंट्रल टीम में मेबर हैं. जबकि 150 से ज्यादा रिसर्च और मॉनिटरिंग के साथ कुछ फेलो भी हैं. इन सभी लोगों को आई-पैक मैनजमेंट ने मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल भेजने का फैसला किया है.



जानकारी के मुताबिक बिहार में आई-पैक से जुड़े सिर्फ नाम मात्र के कुछ लोग रहेंगे. यहां काम करने वाले लोगों को यह भी बता दिया गया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद सबको बिहार से बाहर जाना है, क्योंकि बिहार में अब तक किसी पॉलिटिकल पार्टी का काम नहीं मिला है और जिसका काम पिछले दो चुनाव से करते रहे उनका दरवाजा पीके के लिए बंद हो चुका है.



'बात बिहार की' अभियान पर भी संकट
हालांकि आई-पैक बोर्ड मेंबर की हुई बैठक में कई लोगों का यह मत था कि नीतीश कुमार का साथ नहीं छोड़ना चाहिए था. हैरानी की बात यह है कि जिस 'बात बिहार की' को प्रशांत किशोर जन-जन तक पहुंचाने का फैसला किया था वो अब उस अभियान पर भी संकट में नजर आ रहा है. हालांकि आई-पैक के टीम के लोगों की कोशिश है कि अभी इसे जिंदा रखा जाए.

वैसे लॉकडाउन खत्म होने के बाद यह पता चलेगा कि आई-पैक बिहार में काम करने वाले टीम मेंबर को कहां-कहां भेजा जाता है. राजनीति विशेषज्ञों की माने तो प्रशांत किशोर ने अगर नीतीश कुमार से दुश्मनी नहीं मोल ली होती तो आज के वक्त में जेडीयू में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर रहने वाले प्रशांत किशोर पार्टी में सबसे मजबूत होते और बिहार के बाहर जाने का मौका भी नहीं मिलता,

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First published: May 25, 2020, 11:41 PM IST
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