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क्या JDU में रहकर विपक्ष के लिए रणनीति बना रहे हैं प्रशांत किशोर?

News18 Bihar
Updated: December 14, 2019, 11:53 AM IST
क्या JDU में रहकर विपक्ष के लिए रणनीति बना रहे हैं प्रशांत किशोर?
प्रशांत किशोर को महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर मिला. (फाइल फोटो)

पीके के बागी तेवरों से जनता दल युनाइटेड असहज महसूस कर रही है और वो पीके के खिलाफ थोड़ी तल्ख भी हो गई है. जेडीयू के महासचिव आरसीपी सिंह ने दो टूक कहा कि अगर प्रशांत किशोर पार्टी छोड़कर जाना चाहें तो वो इसके लिए स्वतंत्र हैं

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  • Last Updated: December 14, 2019, 11:53 AM IST
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पटना. नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पर प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) के जेडीयू (JDU) की नीति का विरोध करने के साथ एक बात स्पष्ट हो गई कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में भी को-ऑर्डिनेशन का अभाव है. दूसरा ये कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होते हुए भी प्रशांत किशोर की टिप्पणियों से यह बात थोड़े हद तक इस्टेब्लिस होती जा रही है कि जेडीयू (JDU) को मुस्लिम हितों से कोई लेना-देना नहीं है. जाहिर है इसी परसेप्शन के साथ मुस्लिम मतों का अगर ध्रुवीकरण होगा तो इसका सीधा लाभ आने वाले चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को होने जा रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जेडीयू में रहते हुए भी क्या प्रशांत किशोर विपक्ष की राजनीति को फायदा पहुंचा रहे हैं? सवाल ये भी क्या विपक्ष की रणनीति का वो हिस्सा बन गए हैं?

पीके के बयानों से JDU असहज
जाहिर है पीके के बागी तेवरों से पार्टी असहज महसूस कर रही है और वो उनके खिलाफ थोड़ी तल्ख भी हो गई है. शुक्रवार को जब तीसरे दिन भी प्रशांत किशोर ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर सवाल उठाए तो जेडीयू महासचिव आरसीपी सिंह ने दो टूक कहा कि अगर प्रशांत किशोर पार्टी छोड़कर जाना चाहें तो वो इसके लिए स्वतंत्र हैं. सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि वैसे भी उन्हें अनुकंपा के आधार पर पार्टी में शामिल किया गया था.

नीतीश-PK मुलाकात पर नजर

उधर, सूत्रों से खबर है कि शनिवार को प्रशांत किशोर राजधानी पटना में मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार से मुलाकात करने वाले हैं. दरअसल जेडीयू की पीके के खिलाफ ये तल्खी ऐसे ही नहीं है. बीते दिनों हुए उपचुनाव में पीके सक्रिय नहीं रहे तो चार में से तीन सीटों पर जेडीयू की करारी हार हुई. इसी तरह पटना यूनिवर्सिटी (PU) में छात्र संघ चुनाव में जेडीयू का सूपड़ा साफ हो गया. जबकि पीके ने पिछले वर्ष हुए पीयू छात्र संघ चुनाव में जेडीयू को अध्यक्ष पद पर जीत दिलाई थी.

प्रशांत किशोर ने कहीं इस वजह से तो जेडीयू के खिलाफ अलग रुख अख्तियार नहीं किया? | How long will Prashant Kishore stand to raise questions on the JDU high command nitish kumar
नागरिकता संशोधन बिल पर लगातार ट्वीट कर प्रशांत किशोर जेडीयू के नेताओं के निशाने पर आ गए हैं (फाइल फोटो)


JDU के लिए काम नहीं करते PKजाहिर है ऐसे ही कुछ कुछ घटनाक्रम इस बात की तस्दीक करते हैं कि पीके जेडीयू के साथ उतने सक्रिय नहीं हैं जिसका सीधा फायदा आरजेडी को हो रहा है. बीते हफ्ते तेजस्वी यादव ने आरजेडी के खुले अधिवेशन में यह बात कही थी कि उनकी पार्टी का नंबर वन दुश्मन जेडीयू है. जाहिर है उनका ये बयान उन मुस्लिम वोटरों को आरजेडी के पक्ष में ध्रुवीकरण कराने के लिए दिया गया था जो जेडीयू के वर्तमान स्टैंड से नाखुश दिख रहे हैं.

बीजेपी विरोध की राजनीति करते हैं PK
वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि वर्ष 2014 के बाद से पीके के राजनीतिक करियर को देखें तो ये बीजेपी विरोध के इर्द-गिर्द घूमती रही है. जब वर्ष 2017 में जेडीयू और बीजेपी फिर से एक हुए तो पीके ने इस फैसले का विरोध भी किया था. इसके बाद जेडीयू में रहते हुए पीके की कंपनी I-PAC ने तमिलनाडु में स्टालिन के लिए काम किया. शिवसेना को बीजेपी से अलग करवाने में उनकी भूमिका मानी जाती है वहीं, अब वो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए काम कर रहे हैं. साथ ही आने वाले समय में प्रशांत किशोर दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए काम करेंगे.

प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल में बीजेपी के विरोध में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए रणनीति बना रहे हैं


बीजेपी-JDU की दोस्ती से खफा हैं पीके
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि दरअसल पीके को जेडीयू-बीजेपी की दोस्ती रास नहीं आ रही है. इतना ही नहीं इसी आधार पर वह पूरे विपक्ष की रणनीति की धुरी बनने का भी शायद ख्वाब पाले बैठे हैं. रह-रहकर उनका कांग्रेस प्रेम भी झलकता रहता है. ऐसे में हो सकता है कि वे आने वाले चुनाव की रणनीति के लिहाज से भी अपने लिए काम कर रहे हैं.

JDU के लिए बन गया ये परसेप्शन
बकौल अशोक शर्मा भले ही पीके जिस भी रणनीति पर चल रहे हों, लेकिन अपनी पार्टी के स्टैंड का विरोध कर उन्होंने एक परसेप्शन तो बना ही दिया है कि जेडीयू मुस्लिम विरोधी और उसने अपने राजनीतिक हितों के लिए भगवा चोला पहन लिया है. ऐसे में अब सवाल है कि पीके कब तक जेडीयू का हिस्सा रह पाएंगे. जाहिर है अब सबकी निगाहें नीतीश-पीके मुलाकात पर टिकी हुई हैं.

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First published: December 14, 2019, 10:57 AM IST
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