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नागमणि नहीं संभाल सके पिता की विरासत, आखिर बिहार में 'जगदेव प्रसाद' का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन?
Patna News in Hindi

Govinda Mishra | News18Hindi
Updated: February 2, 2020, 5:14 PM IST
नागमणि नहीं संभाल सके पिता की विरासत, आखिर बिहार में 'जगदेव प्रसाद' का राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन?
जगदेव प्रसाद के बेटे नागमणी अब तक कई दलों का सफर तय कर चुके हैं.

70 के दशक में बिहार में पिछड़ा वर्ग (Backward Community) के एक नेता हुए, नाम था जगदेव (Jagdev). उन्हें बिहार का लेनिन भी कहा जाता था. बिहार में जगदेव प्रसाद (Jagdev Prasad) ने सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देना शुरू किया.

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  • Last Updated: February 2, 2020, 5:14 PM IST
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नई दिल्ली. 70 के दशक में बिहार में पिछड़ा वर्ग (Backward Community) के एक नेता हुए, नाम था जगदेव (Jagdev). उन्हें बिहार का लेनिन भी कहा जाता था. बिहार में जगदेव प्रसाद (Jagdev Prasad) ने सवर्ण वर्चस्व को चुनौती देना शुरू किया. 'ऐह साल के भादो में, हरी हरी चुड़ियां कादो में' जैसी पंक्तियां भाषण के दौरान बोलकर जगदेव सवर्णों के वर्चस्व को चुनौती दे रहे थे. नागमणि (Nagmani) उन्हीं जगदेव के बेटे हैं. जिनके नाम पर बिहार के हर छोटे बड़े शहर में स्मारक, मूर्तियां और चौक-चौराहे बने हुए हैं. राजनीतिक दलों के नेता उन्हें शहीद जगदेव भी कहते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में लगभग 7-8 प्रतिशत आबादी वाली कुशवाहा जाति के आदर्श रहे शहीद जगदेव के बेटे नागमणि उनकी राजनीतिक विरासत को नहीं संभाल सके. नागमणि अब तक के अपने राजनीतिक करियर में दर्जन भर पार्टियां बदल चुके हैं. 2 फरवरी को जगदेव प्रसाद की जयंती हैं.

ओवैसी की पार्टी AIMIM में हो रहे हैं शामिल
मीडिया से बातचीत में नागमणि ने जानकारी दी कि बैकवर्ड जाति, दलित, गरीब सवर्ण और मुसलमानों को एक करने की रणनीति पर वो चलने जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि वो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में शामिल होंगे. नागमणि ने ओवैसी को देश के मुसलमानों का सबसे बड़े नेता भी बताया. इस दौरान उन्होंने कुशवाहा जाति से सीएम बनाने की बात भी की.

नीतीश कुमार, जगदेव प्रसाद
जगदेव प्रसाद की प्रतिमा का अनावरण करते बिहार सीएम नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)


पिछड़ावाद पर आधारित थी जगदेव प्रसाद की सोच
बिहार के जहानाबाद जिले में जन्मे जगदेव प्रसाद की सोच पिछड़ावाद पर आधारित थी. इसी सोच के साथ वो लगातार आंदोलन कर रहे थे. इसके अलावा अर्जक संघ जिसका बिहार में खासकर कुशवाहा जाति में काफी प्रभाव देखा जा सकता है. वो उससे भी जुड़े हुए थे. उस दौर में उनके नेतृत्व में ब्राह्मणवाद का विरोध करना भी शुरू किया गया. जिसके बाद कुशवाहा जाति के लोगों ने ब्राह्मणों से पूजा पाठ करवाना बंद कर दिया.

7 से 8 प्रतिशत तक है आबादीबिहार में कुशवाहा (कोईरी) जाति की आबादी 7 से 8 प्रतिशत मानी जाती है. मुख्य तौर इस जाति के लोग खेती-किसानी पर निर्भर है. इन्हें राजनीतिक तौर पर काफी जागरुक माना जाता है. 1990 के मंडलवाद के दौर के बाद लालू यादव की सरकार में अनदेखी के सवाल पर कुशवाहा जाति की अधिकांश आबादी ने खुलकर नीतीश कुमार का साथ दिया था. उस दौर में नागमणि सीएम नीतीश के साथ खड़े रहे. एलजेपी से जेडीयू में आए नागमणि की नीतीश सरकार में काफी चली. नीतीश की सरकार में इनकी पत्नी सुचित्रा सिन्हा मंत्री भी थी. लेकिन बाद में नीतीश से नागमणि का मनमुटाव हो गया.

नहीं बन सके स्वाभाविक उत्तराधिकारी
आज भी बिहार के हर छोटे बड़े शहर में शहीद जगदेव की प्रतिमा और उनके नाम पर बने चौक चौराहे और स्मारक देखे जा सकते हैं. कुशवाहा जाति का एक भी नेता शहीद जगदेव को सम्मान देना नहीं भूलता. लेकिन समाज के एक वर्ग के बड़े नेता रहे जगदेव प्रसाद के स्वाभाविक उत्तराधिकारी नागमणि नहीं बन सके.

कई बार बदल चुके हैं पार्टी 
नागमणी अब तक दर्जन बार पार्टियां बदल चुके हैं. कभी बीजेपी सरकार में मंत्री रहे नागमणी जेडीयू, आरजेडी के अलावा कुछ दिनों तक आरएलएलपी के साथ भी रहे. लेकिन कहीं भी लंबे समय तक वो टिक नहीं सके. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जगदेव प्रसाद का नाम अगर उनके साथ नहीं जुड़े तो उनकी बहुत बड़ी राजनीतिक भूमिका बिहार की राजनीति में नहीं होगी. वैसे राजनीतिक चर्चा के दौरान लोग ये भी कहते हैं कि शायद नागमणी को भी नहीं याद हो कि उन्होंने अब तक कितने दल बदले हो.

नागमणी क्यों नहीं बन सके जगदेव के राजनीतिक वारिस
वरिष्ठ पत्रकार नवेंन्दु का कहना है कि जगदेव प्रसाद एक आंदोलन से उभरे हुए नेता थे. जिनका उद्देश्य पिछड़ो को संगठित करना था. इसके अलावा वे एक सोच के साथ अपने समाज और पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ जुड़ाव रखते थे. उनका एक विजन था, लेकिन नागमणी में इसका साफ अभाव देखा जा सकता है. नवेंदू का मानना है कि इन्हीं कारणों से नागमणी जगदेव प्रसाद के स्वाभाविक उत्तराधिकारी नहीं बन सके.

कैसे राजनीतिक तौर पर खुद को मजबूत कर सकते हैं नागमणी
नवेन्दु कहते हैं कि नागमणी अगर खुद को अपने समाज के नेता के तौर पर फिर से स्थापित करना चाहते हैं तो उन्हें जगदेव प्रसाद के नक्शेकदम पर चलना होगा. साथ ही अपने समाज के हर वर्ग के साथ सामन्जस्य बैठाने के अलावा एक आंदोलन की रुपरेखा तैयार करनी होगी. तभी जाकर एक राजनीतिक चेतना जिसका प्रतिनिधित्व उनके पिता करते थे, उसके प्रतिनिधि के तौर पर खुद को दोबारा स्थापित करने में कामयाब होंगे.

जगदेव प्रसाद के नाम पर खड़े हुए कई क्षत्रप
नवेन्दु कहते हैं कि जगदेव प्रसाद की राजनीतिक विरासत और परंपरा के कई क्षत्रप उठ खड़े हुए और अपनी राजनीतिक औकात भी बनाई. ऐसे में नागमणि को अपनी ज़मीन हासिल करने के लिए इस दल से उस दल की रणनीति के बजाय ज़मीनी तौर पर खुद को खड़ा करना और लड़ना होगा, जहां उनके पिता स्व जगदेव प्रसाद खड़े थे.

पिछड़ों के मुद्दों पर की थी राजनीति
पत्रकार नवेन्दु का यह भी कहना है कि जगदेव प्रसाद मंडल कमीशन के पहले के बिहार में पिछड़ों के सबसे बड़े नेता माने जाते थे. 1990 के बाद राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर लालू यादव ने उन्हीं मुद्दों पर राजनीति की. नवेन्दु का मानना है कि अब बिहार की राजनीति सामाजिक, राजनीति पिछड़ावाद से अत्यंत पिछड़ा की जमात और श्रेणी तक जा पहुंची है.

Upendra Kushwaha, RLSP CHIEF
रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा के समर्थक उन्हें जगदेव प्रसाद का मानस पुत्र बताते हैं.


आखिर इनका राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन
वैसे तो उनके बेटे नागमणी उनके स्वाभाविक राजनीतिक उत्तराधिकारी नहीं बन सके. लेकिन बिहार में कुशवाहा जाति के और भी दिग्गज नेता हैं. जिनमें रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और कई स्थानीय क्षत्रप शामिल हैं. रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के समर्थक उन्हें जगदेव प्रसाद का मानस पुत्र बताते हैं. इस तरह वो कुशवाहा जाति के एक मात्र नेता होने का दावा करते हैं. लेकिन आज भी कुशवाहा जाति का एक तबका लालू की आरजेडी के साथ खड़ा है. वहीं नीतीश कुमार की जेडीयू को भी बड़ी संख्या में कुशवाहा जाति के मतदाता वोट करते हैं.

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लालू की आरजेडी और नीतीश के साथ भी कुशवाहा जाति का मतदाता खड़ा है. (फाइल फोटो)


नीतीश कुमार को भी बताया जा रहा है राजनीतिक उत्तराधिकारी
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री श्री भगवान सिंह कुशवाहा का मानना है कि जगदेव प्रसाद की राजनीतिक सोच को जमीन पर उतारने का काम उनके बाद केवल बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने किया है. कुशवाहा कहते हैं कि राजनीतिक तौर पर आज अगर समाज का वो वर्ग जो हाशिए पर रहा, सशक्त हुआ है तो वो जगदेव प्रसाद का सपना था, जिसे उनके बाद नीतीश पूरा कर रहे हैं. कुशवाहा का दावा है कि शहीद जगदेव के सच्चे मायनों में कोई राजनीतिक उत्तराधिकारी कोई है तो वो नीतीश कुमार हैं.

जानिए जगदेव प्रसाद का परिचय
जगदेव प्रसाद का जन्म 2 फरवरी 1922 को जहानाबाद के कुर्था प्रखंड के कुरहारी गांव में हुआ था. इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे. निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में पैदा होने के बाद भी इन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त किया. बिहार में उस समय समाजवादी आन्दोलन की चल रहा था, उस दौरान जे.पी. तथा लोहिया के बीच सैद्धान्तिक मतभेद था. जब जे. पी. ने लोहिया का साथ छोड़ दिया बिहार में जगदेव प्रसाद ने लोहिया का साथ दिया. जगदेव प्रसाद ने 1967 के विधानसभा चुनाव में संसोपा उम्मीदवार बनकर कुर्था से  विधायक बने. जगदेव तथा कर्पूरी ठाकुर की सूझ-बूझ से पहली गैर-कांग्रेस सरकार का बिहार में गठन हुआ, लेकिन पार्टी की नीतियों तथा विचारधारा के मसले पर लोहिया से अनबन हुयी और 'कमाए धोती वाला और खाए टोपी वाला' की स्थिति देखकर उन्होंने संसोपा छोड़ की. जिसके बाद 25 अगस्त 1967 को उन्होंने 'शोषित दल' नाम से नयी पार्टी बनाई. उस समय अपने भाषण में उन्होंने कहा कि-

"जिस लड़ाई की बुनियाद आज मै डाल रहा हूं, वह लम्बी और कठिन होगी. चूंकि मैं एक क्रांतिकारी पार्टी का निर्माण कर रहा हूं इसलिए इसमें आने-जाने वालों की कमी नहीं रहेगी परन्तु इसकी धारा रुकेगी नहीं. इसमें पहली पीढ़ी के लोग मारे जायेगे, दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जायेगे तथा तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे. जीत अंततोगत्वा हमारी ही होगी."


7 अगस्त 1972 को शोषित दल तथा रामस्वरूप वर्मा की पार्टी 'समाज दल' का एकीकरण हुआ और 'शोषित समाज दल' नमक नई पार्टी का गठन किया गया. जगदेव प्रसाद के भाषण बहुत ही प्रभावशाली होते थे, जहानाबाद की सभा में उन्होंने कहा था-

दस का शासन नब्बे पर, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा.
सौ में नब्बे शोषित है, नब्बे भाग हमारा है।
धन-धरती और राजपाट में, नब्बे भाग हमारा है॥


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First published: February 2, 2020, 4:27 PM IST
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