बिहार: शहाबुद्दीन की तरह कोरोना से मौत का डर, Twitter पर टॉप ट्रेंड कर रहा आनंद मोहन की रिहाई का कैम्पेन

जेल में बंद आनंद मोहन की रिहाई की मांग को लेकर ट्विटर पर अभियान.

जेल में बंद आनंद मोहन की रिहाई की मांग को लेकर ट्विटर पर अभियान.

Bihar News: आनंद मोहन 2007 से हत्या के एक मामले में जेल में बंद हैं और अब उनके परिजन इसी के आधार पर कोरोना को देखते हुए जेल से रिहाई की मांग राज्य सरकार से कर रहे हैं.

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पटना/सहरसा. पूर्व सांसद आनंद मोहन डीएम जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं और वे फिलहाल सहरसा जेल में हैं. इस बीच जेलों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देख उनकी पत्नी व पूर्व सांसद लवली आनंद और बेटा विधायक चेतन आनंद ने उनकी रिहाई की मांग उठाई है. इसी क्रम में आनंद मोहन की रिहाई के लिए उनके  परिवारवालों के साथ-साथ समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मुहिम छेड़ रखी है. शनिवार को कई घंटों तक  ट्विटर पर रिलीज़ आनंद मोहन नंबर एक पर ट्रेंड करता रहा.

ट्विटर पर चलाई जा रही इस मांग के बाद आनंद मोहन के बेटे और राजद विधायक चेतन आनंद ने लोगों को धन्यवाद किया है और उम्मीद ज़ाहिर की है की बहुत जल्द जेल से उनके पिता आनंद मोहन बाहर आएंगे. आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद ने भी लोगों को धन्यवाद दिया है और उम्मीद जाहिर की है की बहुत जल्द आनंद मोहन जेल से बाहर होंगे. बता दें कि आनंद मोहन के परिवार ने बिहार सरकार से आग्रह किया है कि आनंद मोहन को कोरोना को देखते हुए जल्द से जल्द रिहा किया जाए.

आनंद मोहन की पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद का कहना है कि आनंद मोहन लगभग 14 साल से जेल में बंद हैं. इस दौरान उन्हें कभी भी पेरोल पर भी नहीं छोड़ा गया. आनंद मोहन की मां जो 98 साल की हैं, उन्हें भी कोरोना है. वो लगातार अपने बेटे को याद कर रही हैं. इस वक़्त जब आनंद मोहन 65 साल के हो गए हैं और कोरोना महामारी से कई लोगों की मौत हो रही है, और कब किसको कोरोना हो जाए, कोई नहीं जानता है, इस हालात को देखते हुए आनंद मोहन को रिहा किया जाए.

आनंद मोहन के बड़े बेटे और राजद विधायक चेतन आनंद भी अपने पिता को जेल से जल्द से जल्द बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं. चेतन आनंद कहते हैं कि कोरोना को देखते हुए हर वक़्त डर बना रहता है. मेरे पिता ने तो सजा भी पूरी कर ली है, बावजूद इसके उनके बाहर निकालने में क्या दिक़्क़त हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी कोरोना के दौरान क़ैदियों को लेकर है.
चेतन का कहना है कि नीतीश कुमार ने भी 2020 में भरोसा दिलाया था कि आनंद मोहन उनके मित्र हैं, उनकी चिंता वो भी करते हैं. बावजूद इसके कुछ नहीं हुआ. क़ोरोना को देखते हुए अब तो कम से कम मेरे पिता आनंद मोहन को रिहा किया जाए.

पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील वाईवी गिरी ने आनंद मोहन के प्रकरण में सवाल पूछने पर बताया कि 2020 में जब देश में कोरोना संक्रमण का ख़तरा बढ़ा था तब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकारों ने मार्च 2020 में एक हाई पावर कमेटी बनाई थी. यही कमेटी तय करती है किस क़ैदी को लेकर क्या फ़ैसला करना है.

इधर, सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को एक आदेश निकाला, जिसमें निर्देश दिया है कि कोरोना संक्रमण का ख़तरा तेज़ी से बढ़ रहा है जिसे देखते हुए क़ैदियों की सजा पर विचार करते हुए टेम्पररी जमानत या पैरोल पर उन्हें रिहा कर जेल के भीड़ को कम करें. दरअसल दिल्ली में तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन की कोरोना से हुई मौत के बाद आनंद मोहन का परिवार भी चिंतित है.

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