शादी के लिए चार्टड प्लेन से बिहार पहुंची थी पप्पू यादव के वाइफ की फैमिली, फिल्मों जैसी है पप्पू-रंजीत की लवस्टोरी

साल 1991 में रासुका के तहत पटना के बांकीपुर जेल में बंद पप्पू यादव के लिए वो समय मानो उनके जीवन का सबसे सुखद पहलू लेकर आया। (Photo- Facebook)
साल 1991 में रासुका के तहत पटना के बांकीपुर जेल में बंद पप्पू यादव के लिए वो समय मानो उनके जीवन का सबसे सुखद पहलू लेकर आया। (Photo- Facebook)

बांकीपुर जेल (BankiPur Jail) में रहते हुए पप्पू यादव की लव स्टोरी (Pappu Yadav Love Story) शुरू हुई थी. उनकी पत्नी रंजीत रंजन (Ranjeet Ranjan) के पिता इस शादी के खिलाफ थे. लेकिन कैसे इन दोनों की लव स्टोरी मुकाम तक पहुंची? इस बारे में पप्पू यादव ने अपनी किताब 'द्रोहकाल का पथिक (Drohkal Ka Pathik)' में भी चर्चा की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 11:58 AM IST
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पटना. बिहार विधानसभा (Bihar Election) में इस बार कई दिग्गज अपना भाग्य आजमा रहे हैं. कुछ लोग बड़ी पार्टियों से चुनावी दंगल में हैं तो कुछ अपनी खुद की पार्टी से बिहार के सिंहासन तक पहुंचना चाह रहे हैं. ऐसे ही एक शख्स बिहार के पूर्व बाहुबली सांसद रहे पप्पू यादव (Pappu Yadav) हैं, जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन (Covid 19 Lockdown) के दौरान आम जनों की काफी मदद की. इस बार वे अपनी जन अधिकार पार्टी (Jan Adhikar Party) के साथ चुनावी दंगल में उतरे हैं और बिहार के सीएम कैंडिडेट (CM Candidates) भी हैं. ऐसे में आज हम आपको पप्पू यादव के निजी जिंदगी (Pappu Yadav Personal Life) से जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं, जो राजनीति की तरह ही कम उतार-चढ़ाव वाली नहीं रही है.

धनी जमींदार परिवार में जन्में पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन (Rajesh Ranjan) ने कैसे राजनीति में अपनी पहचान बनाई, यह ज्यादातर लोग जानते हैं. ऐसे में आज हम आपको उनके प्रेम प्रसंग (Pappu Yadav-Ranjeet Ranjan Love Story) और शादी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है. साल 1991 में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (National Security Act) के तहत पटना की बांकीपुर जेल (Bankipur Jail) में बंद पप्पू यादव के लिए वो समय मानो उनके जीवन का सबसे सुखद पहलू लेकर आया. आज भी उन दिनों की बातें याद करके पप्पू यादव का चेहरा खिल उठता है.

एक अखबार से बातचीत करते हुए पप्पू यादव ने कहा था, "रंजीत जी को मैं जितना शुक्रिया अदा करूं वो कम है. 3 साल तक हमारी दोस्ती चली, उन्होंने मेरे प्यार को समझा. तमाम संघर्षों में भी वो मेरे साथ थीं. हमारा प्रेम प्रसंग फरवरी 1992 से शुरू हुआ और इसके बाद 1994 में मेरी शादी हुई. वो दौर बेहद संघर्ष से भरा था, उस समय एक-दूसरे से मिलना जुलना भी मुश्किल था, पटना आना-जाना तो बहुत बड़ी बात थी. मैं खुशनसीब हूं कि मुझे बहुत अच्छी पत्नी मिली हैं."



आसान नहीं थी प्यार की जंग
पहली बार पढ़ने पर ऐसा अहसास होता है कि पप्पू के लिए रंजीत का प्यार पाना बेहद आसान रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं था. उन्हें अपने प्रेम को पाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे. आपको जानकर ताज्जुब होगा, लेकिन रंजीत ने पहली बार में पप्पू यादव के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. हालांकि, पप्पू यादव ने हार नहीं मानी. उन्होंने रंजीत से इतना तक कह दिया था कि उनके जिंदगी की पहली और आखिरी लड़की वही हैं.

यूं शुरू हुई थी लव स्टोरी
पटना के बांकीपुर जेल में बंद पप्पू यादव बंद थे, उस दौरान वे अक्सर जेल अधीक्षक के आवास से लगे मैदान में लड़कों को खेलते देखा करते थे. इन्हीं लड़कों में रंजीत के छोटे भाई विक्की भी थे. धीरे-धीरे खेलने वाले लड़कों के साथ-साथ पप्पू यादव की नजदीकी विक्की से बढ़ गई. इसी क्रम में एक बार पप्पू यादव ने विक्की के फैमिली एलबम में टेनिस खेलते हुए रंजीत की फोटो देखी. पहली नजर में ही रंजीत की फोटो देखकर पप्पू उनसे प्यार कर बैठे. जेल से छूटने के बाद रंजीत से मिलने के लिए पप्पू यादव अक्सर उस टेनिस क्लब में पहुंच जाते, जहां वो टेनिस खेलती थीं. पप्पू की ये सब आदतें रंजीत को अच्छी नहीं लगती थीं, उन्होंने कई बार मना किया, मिलने से रोका और कठोर शब्द भी कहे. लेकिन पप्पू यादव डटे रहे. एक बार तो रंजीत ने यहां तक कह दिया कि वे सिख हैं और पप्पू हिंदू और उनके परिवार वाले ऐसा होने नहीं देंगे.

हताश होकर खा ली थी नींद की गोलियां
रंजीत के रूखे व्यवहार से हताश होकर एक बार पप्पू यादव ने ढेर सारी नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद उन्हें PMCH (पटना मेडिकल कॉलेज) में भर्ती कराया गया. इस बारे उन्होंने अपनी किताब 'द्रोहकाल का पथिक' में भी विस्तार से चर्चा किया है. इस घटना के बाद से ही रंजीत का व्यवहार बदलने लगा. लेकिन इन दोनों की राहें अभी भी आसान नहीं थीं. पप्पू के परिवार से इस शादी के लिए कोई समस्या नहीं थी, लेकिन रंजीत रंजन के पिता ग्रंथी थे और शुरू से ही इस विवाह के खिलाफ थे. ऐसे में पप्पू यादव के बहन-बहनोई रंजीत की फैमिली को मनाने के लिए चंडीगढ़ गए, फिर भी बात नहीं बनी. तमाम कोशिशों के बावजूद हर बार हताशा मिली, जिससे पप्पू निराश हो गए.

...तो यूं ट्रैक पर आई लव स्टोरी
अपनी किताब 'द्रोहकाल का पथिक' में पप्पू यादव ने लिखा है कि किसी ने उन्हें कांग्रेस नेता एसएस अहलूवालिया से मिलने की सलाह दी. उस शख्स ने कहा कि अहलूवालिया जी आपकी मदद कर सकते हैं, ऐसे में पप्पू यादव तुरंत उनसे मिलने के लिए दिल्ली जा पहुंचे. पप्पू यादव ने अपनी इस किताब में डिटेल में ज़िक्र किया है कैसे एसएस अहलूवालिया साहब की पहल से रंजीत के सिख परिजनों को मनाने में मदद मिली. आख़िरकार शादी की तैयारी हुई और फरवरी 1994 में पप्पू यादव और रंजीत की शादी हो गई.

चार्टड विमान से पहुंचे थे परिजन
पप्पू यादव की शादी पूर्णिया के एक गुरुद्वारे में होनी थी, लेकिन बाद में आनंद मार्ग पद्धति से हुई. इस दौरान रंजीत के परिजन चार्टड विमान से पहुंचे थे. हालांकि, शादी की गहमागहमी के बीच टेंशन उस वक्त बढ़ गई, जब विमान का पायलट रास्ता भटक गया. खैर विमान सही सलामत पहुंचा तो लोगों ने राहत की सांस ली. इस दौरान शादी में तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव, डीपी यादव, राज बब्बर सहित कई दिग्गज शरीक हुए थे. अपनी शादी के बारे में पप्पू यादव कहते हैं, "हमारी शादी में काफी मुश्किलें आईं, क्योंकि यह दूसरे धर्म में शादी की बात थी. हमारी तरफ़ से तो सहयोग था. हमारे परिवार के स्तर पर कोई परेशानी नहीं थी." वहीं, रंजीत के बारे में बात करते हुए पप्पू कहते हैं कि रंजीत जी खुद आध्यात्मिक हैं. बहुत अच्छा बोलती हैं. व्यक्तित्व बहुत अच्छा है. ईमानदारी से जीतीं हैं. लाग-लपेट में नहीं रहती हैं. बच्चों के लिए बेस्ट मां हैं.

पर्सनल लाइफ तमाम मुश्किलों को झेलते हुए सफलता पाने वाले पप्पू यादव बिहार की राजनीति में एक बड़ा चेहरा हैं. कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में उन्होंने काफी लोगों की मदद की. कभी राजद के टिकट पर सांसद पहुंचे पप्पू यादव इस बार अपनी खुद की पार्टी JAP (जन अधिकार पार्टी) से चुनाव मैदान में हैं. इस बार वे 150 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
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