पुलवामा आतंकी हमला: बेटी की शादी तय करने के लिए घर आने वाले थे शहीद संजय

शहीद संजय कुमार सिन्हा

शहीद संजय कुमार सिन्हा

8 फरवरी को घर से जाते वक्त संजय ने पत्नी बबीता देवी से कहा था कि 15 दिन बाद छुट्टी लेकर वे आ जाएंगे. इस बार छुट्टी में वे बड़ी बेटी रूबी की शादी की बात पक्की करके ही ड्यूटी पर लौटेंगे.

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पुलवामा आतंकवादी हमले में बिहार के भी दो सपूत शहीद हो गए हैं. इनमें भागलपुर के रतन कुमार ठाकुर और पटना जिले के तारेगना डीह के संजय कुमार सिन्हा भी शामिल हैं. संजय बतौर हेड कांस्टेबल के देश की सेवा कर रहे थे. संजय की शहादत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में मातम पसर गया. संजय के पिता महेंद्र प्रसाद सीआरपीएफ की 176वीं बटालियन में तैनात थे.



संजय एक महीने की छुट्टी के बाद आठ फरवरी को ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे. अभी वे कैंप भी नहीं पुहंचे थे कि रास्ते में ही आतंकवादी हमले में शहीद हो गए.



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घर से जाते वक्त उन्होंने पत्नी बबीता देवी से कहा था कि 15 दिन बाद छुट्टी लेकर वे घर आएंगे. घरवालों से संजय ने कहा था कि इस बार छुट्टी में वे बड़ी बेटी रूबी की शादी की बात पक्की कर ही ड्यूटी पर लौटेंगे.
छोटी बेटी टुन्नी ने भी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली है.  बेटा सोनू राजस्थान के कोटा में रहकर मेडिकल परीक्षा की तैयारी करता है.



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संजय के छोटे भाई शंकर सिंह भी सीआरपीएफ में हैं. वह नालंदा में पदस्थापित हैं. लेकिन उनका परिवार मसौढ़ी कोर्ट के पास नए मकान में रहता है.



संजय के परिवार के साथ ही उनके माता-पिता रहते हैं. संजय मिलनसार स्वभाव के थे. सबकी मदद के लिए खड़े रहते थे. सबसे पहले नालंदा के परवलपुर में रहने वाले उनके बहनोई को संजय के शहीद होने की खबर मिली. इसके बाद गांव में मातम पसर गया.



रिपोर्ट- संजय कुमार



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