चाहकर भी BJP का साथ नहीं छोड़ सकती JDU और शिवसेना, ये हैं वजहें

BJP के दो सहयोगी दल जेडीयू और शिवसेना कई मुद्दों पर बीजेपी से अलग राग अलापा करते हैं. लेकिन अब इन दोनों दलों के पास ऐसा करने के लिए कुछ ज्यादा विकल्प नहीं रह गए हैं.

News18 Bihar
Updated: July 7, 2019, 12:14 PM IST
चाहकर भी BJP का साथ नहीं छोड़ सकती JDU और शिवसेना, ये हैं वजहें
नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे की पार्टी पिछले विधानसभा चुनावों में बीजेपी से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरीं थीं.
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Updated: July 7, 2019, 12:14 PM IST
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो सहयोगी दल जेडीयू और शिवसेना कई मुद्दों पर बीजेपी से अलग राग अलापा करते हैं. लेकिन अब इन दोनों दलों के पास ऐसा करने के लिए कुछ ज्यादा विकल्प नहीं रह गए हैं. इन दोनों पार्टियों के प्रभाव वाले राज्यों में इस साल और अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. महाराष्ट्र में इसी साल तो बिहार में 2020 में चुनाव होना है. पिछली बार के विधानसभा चुनाव में जेडीयू और शिवसेना, बीजेपी से अलग चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन इस बार दोनों दल शायद ही बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ने की हिम्मत जुटा पाएं.

महाराष्ट्र में शिवसेना 2014 विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद बीजेपी सरकार में शामिल हो गई थी. वहीं बिहार में जेडीयू को बीजेपी के साथ आने में लगभग दो साल लग गए. बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी दलों में शामिल शिवसेना और जेडीयू ने पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी से अलग होकर या तो अकेले मैदान में उतरे या अन्य दलों से गठबंधन कर चुनाव लड़े.

लोकसभा चुनाव के बाद बदल गए हैं समीकरण
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार बीजेपी के घोषणापत्र में शामिल कई मुद्दों पर अपनी अलग राय रखते हैं. इनमें ट्रिपल तलाक, एनआरसी और धारा 370 महत्वपूर्ण है. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, चर्चा यह भी चल रही है कि 2020 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार बीजेपी से अलग राह चुन सकते हैं. लेकिन पिछले चुनावों के डेटा बता रहे हैं कि शिवसेना की तरह ही जेडीयू के पास भी बीजेपी से अलग जाने का कोई विकल्प नहीं है. इसके अलावा, लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद समीकरण काफी बदल गए हैं.

जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


2010 और 2014 के आंकड़े
2010 का बिहार विधानसभा चुनाव जेडीयू और बीजेपी ने साथ में लड़ा था. इस चुनाव में 243 में से जेडीयू को 115 और बीजेपी को 91 सीटों पर जीत मिली थी. इस चुनाव में जेडीयू का वोट शेयर 22.58 प्रतिशत था वहीं बीजेपी को 16.49 प्रतिशत वोट मिले थे. 2013 में बीजेपी से अलग होने के बाद जेडीयू 2014 के लोकसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरी. इस दौरान जेडीयू के वोट शेयर में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा 22.58 से 16.04 प्रतिशत पर आ गया और 40 लोकसभा सीट में से जेडीयू को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिल पाई. वहीं बीजेपी के वोट शेयर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और पार्टी 22 सीट जीतने में कामयाब रही.
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2015 विधानसभा का गणित
2015 विधानसभा चुनाव में जेडीयू महागठबंधन में शामिल हो गई, जिसमें आरजेडी और कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियां भी थीं. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी, राम विलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की छोटी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ी. इस चुनाव में जेडीयू को 71 सीट मिली थी. वहीं बीजेपी को मात्र 53 सीट से संतोष करना पड़ा. वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को 24.5 प्रतिशत और जेडीयू को 16.83 प्रतिशत वोट मिले थे. देखने वाली बात है कि जेडीयू का वोट शेयर बीजेपी के मुकाबले काफी कम था.

लोकसभा चुनाव 2019 का हाल
इस साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू एक साथ मैदान में उतरे. इसका लाभ जेडीयू को न सिर्फ सीट के मामले में हुआ बल्कि पार्टी के वोट शेयर भी बढ़ें. जेडीयू 17 में से 16 सीट जीतने में कामयाब रही. वहीं वोट प्रतिशत 21.82 पर जा पहुंचा. वहीं बीजेपी को इस बार 24 प्रतिशत वोट मिले. इसके साथ ही बीजेपी राज्य में सबसे ज्यादा वोट शेयर वाली पार्टी बन गई.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो)


आंकड़ों में क्या है महाराष्ट्र का हाल
2009 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव बीजेपी और शिवसेना साथ में लड़ी. 288 में से बीजेपी को 46 तो शिवसेना को 44 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं दोनों दलों का वोट प्रतिशत क्रमशः 14 और 16 था. लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 28 प्रतिशत वोट हासिल किए और 48 में से 23 सीटें जीतने में कामयाब रही. जबकि शिवसेना को 21 प्रतिशत वोट मिले और पार्टी 18 सीट जीती.

तमाम विरोधों के बाद भी 2019 लोकसभा चुनाव दोनों दल साथ में लड़े
लोकसभा चुनाव के बाद शिवसेना और बीजेपी ने अलग रास्ते अपना लिए. 2014 के विधानसभा चुनाव में 288 में से बीजेपी को 122 सीटों पर जीत मिली और पार्टी का वोट शेयर 23 प्रतिशत रहा. वहीं शिवसेना को 63 सीटों पर जीत मिली और पार्टी को 19 प्रतिशत वोट मिले. बाद में शिवसेना राज्य सरकार में बीजेपी के साथ शामिल हो गई और कई मौकों पर विरोध करने के बाद भी 2019 का लोकसभा चुनाव दोनों दल साथ में लड़े. नतीजे दोनों दलों के लिए 2014 चुनाव जैसे ही थे लेकिन बीजेपी के साथ आई शिवसेना के वोट शेयर में वृद्धि दर्ज की गई.

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First published: July 7, 2019, 10:59 AM IST
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