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...तो इस वजह से बिहार में नागरिकता संशोधन कानून और NRC का विरोध कर रहे हैं विरोधी दल

...तो इस वजह से बिहार में नागरिकता संशोधन कानून और NRC का विरोध कर रहे हैं विरोधी दल

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर बीजेपी छोड़ तमाम पार्टियां बिहार में भी विरोध कर रही हैं. (File Photo)

नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर बीजेपी छोड़ तमाम पार्टियां बिहार में भी विरोध कर रही हैं. (File Photo)

नगरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) और NRC का विरोध बीजेपी की सहयोगी जेडीयू (jdu) के कुछ नेता भी दबी ज़ुबान में कर रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर बिहार (Bihar) में बीजेपी को छोड़ तमाम पार्टियां ऐसा क्यों कर रही हैं तो जवाब है...

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पटना. नागरिकता संशोधन कानून और NRC को लेकर देश भर में राजनीतिक दलों में बहस छिड़ी हुई है, लेकिन बिहार में ये मामला कुछ ज़्यादा ही तूल पकड़ता जा रहा है. बीजेपी से उलट विरोधी पार्टियां जहां नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Act) और NRC का विरोध कर रही हैं, वहीं बीजेपी की सहयोगी जेडीयू (JDU) के कुछ नेता भी दबी ज़ुबान से विरोध के स्वर मुखर कर रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर बिहार में बीजेपी (BJP) को छोड़ तमाम पार्टियां ऐसा क्यों कर रही हैं तो जवाब है मुस्लिम वोटर.

बिहार बंद का आह्वान
देश के कई राज्यों में नागरिकता संशोधन कानून और NRC को लेकर हंगामा मचा हुआ है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. बिहार में बीजेपी छोड़ अधिकांश पार्टियों ने नागरिकता संशोधन कानून और NRC के बहाने बिहार बंद का आह्वान कर रखा है. विरोध तो जेडीयू के भी कई नेता कर रहे हैं. लेकिन पार्टी बिल के पक्ष में खड़ी है. इस वजह से दबी ज़ुबान से ही सही कई नेता अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर ही दे रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर बीजेपी छोड़ तमाम पार्टियां नागरिकता संशोधन बिल से लेकर NRC का विरोध क्यों कर रही हैं. इसकी वजह भी ख़ास है. सवाल लगभग 16 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों का जो है, जिस पर तमाम पार्टियां नजर गड़ाए हुए हैं.

बिहार में मुस्लिम आबादी कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत के आसपास
दरअसल बिहार में लगभग 50 सीट ऐसी हैं, जिसपर क़रीब 40 फ़ीसदी मुस्लिम वोटर निर्णायक हालत में है. इन सीटों पर जीत हार बहुत हद तक मुस्लिम वोटर ही तय करते हैं. ज़ाहिर है, इतनी बड़ी संख्या में सीटों को अपने पाले में करने की जद्दोजहद में हर पार्टी लगी हुई है. बिहार में मुस्लिम आबादी कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत के आसपास है. इसी को देखते हुए बीजेपी को छोड़ तमाम पार्टियां इस समुदाय को लुभाने में लगी रहती हैं.



मुस्लिम वोटरों के बंटने की सम्भावना बढ़ गई
एक नज़र डालते है पिछले विधानसभा चुनाव के परिणाम पर, जिसे देख तस्वीर बहुत कुछ साफ़ हो जाती है. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जब नरेंद्र मोदी की लहर थी, तब बीजेपी ने मोदी लहर के साथ साथ हिंदुत्व कार्ड भी खेला. जिसकी वजह से वोटों का ध्रुविकरण ऐसा हुआ कि बीजेपी को शानदार जीत मिली. इसका परिणाम ये हुआ कि मुस्लिम सांसदों की संख्या बहुत कम रह गई. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव में जब महागठबंधन एक होकर चुनाव लड़ा तो मुस्लिम विधायकों की संख्या पहली बार 2000 के बाद 24 तक पहुंच गई. जब संयुक्त बिहार था, तब 1985 में 325 में से 34 विधायक मुस्लिम थे. 2000 में मुस्लिम विधायक की संख्या 29 थी. लेकिन जेडीयू के महागठबंधन से अलग होने के बाद मुस्लिम वोटरों के बंटने की सम्भावना बढ़ गई है. ऐसे में तमाम राजनीतिक दलों में मुस्लिम वोटरों को लेकर होड़ तेज़ हो गई है.

2015 में बड़ी संख्या में उतारे गए थे मुस्लिम उम्मीदवार
दरअसल बिहार में किसी भी चुनाव में तमाम पार्टियां कोई ना कोई समीकरण बना कर लड़ती हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में हर पार्टी एक ख़ास समीकरण बनाकर चुनाव लड़ रही है. अगर उस समीकरण में मुस्लिम वोटर का झुकाव उस पार्टी को मिल जाता है तो पार्टी को काफ़ी फ़ायदा मिलता है. यही वजह है कि 2015 में तमाम पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवार को अच्छी ख़ासी संख्या में उतारा था. जिसका फ़ायदा भी मिला. खासकर सेक्युलर पार्टियां कहलाने वाली पार्टियों को इसका फ़ायदा ज़्यादा मिला.

RJD- कुल विधायक- 80 विधायक जिसमें मुस्लिम विधायक थे 12.

कांग्रेस- कुल विधायक- 27 विधायक, जिसमें मुस्लिम विधायक 6.

जेडीयू- कुल विधायक 71 विधायक, जिसमें मुस्लिम विधायक 5.

बीजेपी- कुल विधायक- 53 विधायक, जिसमें मुस्लिम विधायक कोई नहीं.

अन्य पार्टी- कुल विधायक की संख्या 12, जिसमें से मुस्लिम विधायक 1 भाकपा माले के महबूब आलम.

आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मुस्लिम वोटर पर नजर
ज़ाहिर है पिछले विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी के खिलाफ तमाम सेक्युलर पार्टियां एक जुट हो गईं तो मुस्लिम विधायकों की संख्या भी बढ़ गई. लेकिन इस बार जब महागठबंधन से जेडीयू बाहर चली गई है तो मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए बीजेपी को छोड़ तमाम पार्टियां लग गई हैं. बीजेपी जहां एक तरफ धारा 370, तीन तलाक, राम मंदिर और नागरिकता संशोधन एक्ट सहित NRC जैसे मुद्दे उठा हिंदू वोटरों पर नज़र गड़ाए हुए हैं. वहीं बिहार की दूसरी तमाम पार्टियां अपने-अपने समीकरण में मुस्लिम वोटरों को फ़िट करने की कोशिश में लगे हुए हैं.

राजद- मुस्लिम, यादव और दलित समीकरण.

जेडीयू- कुरमी, कोईरी, अति पिछड़ा, सवर्ण के साथ-साथ मुस्लिम वोटर.

बीजेपी- OBC, अति पिछड़ा, सवर्ण, दलित वोटर के साथ साथ हिंदुत्व वोटरों के साथ साथ मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक़ के बाद नज़र.

कांग्रेस- दलित, मुस्लिम और सवर्ण.

लोजपा- दलित, सवर्ण और मुस्लिम.

वामदल- दलित, मुस्लिम.

अन्य छोटी पार्टियां- दलित, मुस्लिम और कुशवाहा.

साफ़ है, बिहार में बीजेपी छोड़ तमाम पार्टियां अपने अपने ख़ास जातिगत समीकरण में मुस्लिम वोटर को फ़िट करने की कोशिश में लगे हुए हैं और NRC के साथ साथ नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर मुस्लिम वोटरों को रिझाने की कोशिश में लगे हुए हैं. इस वजह से बीजेपी इशारों में जेडीयू सहित ऐसे तमाम पार्टियों पर तुष्टिकरण का आरोप लगा हमला बोल रही है.

बीजेपी प्रवक्ता अजित चौधरी कहते हैं कि मुस्लिम वोटरों को तमाम राजनीतिक दलों ने सिर्फ़ ठगने का काम किया है. मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से मुस्लिम हिमायती दिखने की होड़ पार्टियों में मची हुई है.


वहीं जेडीयू सहित दूसरी पार्टियां मुस्लिम समुदाय के सबसे बड़े हिमायती दिखाने की होड़ में लगी हुई हैं और दावा कर रही हैं कि मुस्लिम समुदाय के लिए उनकी पार्टी से ज़्यादा किसी ने भी कुछ नहीं किया.

बिहार के अल्प संख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद अहमद कहते है, "आज़ादी के बाद से नीतीश कुमार ने जितना काम मुस्लिमों के लिए किया उतना किसी भी नेता ने बिहार में नहीं किया है. दूसरी पार्टियों ने सिर्फ़ मुस्लिमों को ठगा है."

वहीं राजद विधायक विजय प्रकाश कहते हैं कि लालू यादव ने मुस्लिमों के हक़ और सुरक्षा की ज़िम्मेवारी के साथ साथ मुस्लिमों के विकास के कई काम किए हैं, उतना किसी ने नहीं किया.


साफ़ है 2020 के चुनाव में अभी कुछ वक़्त है ऐसे में नागरिकता संशोधन कानून और NRC जैसे मुद्दे को बीजेपी को छोड़ तमाम राजनीतिक पार्टियां ज़ोर शोर से उठाए तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि मामला 16 प्रतिशत मुस्लिम वोटर का जो है. बिहार में 'बिहार बंद' की क़वायद उसी कड़ी का हिस्सा है.

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Tags: Bihar News, BJP, Citizenship Act, Congress, Jdu, NRC, RJD

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