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Bihar Politics: अंदरखाने की खबर! नीतीश कुमार के 'संकट मोचक' बनेंगे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष?

Bihar Politics: अंदरखाने की खबर! नीतीश कुमार के 'संकट मोचक' बनेंगे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष?

सीएम नीतीश कुमार का कोई खास होगा जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष

सीएम नीतीश कुमार का कोई खास होगा जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष

Nitish Kumar News: जेडीयू अध्यक्ष पद को लेकर जैसी अटकलें लगाई जा रही हैं और उनमें जो नाम सबसे आगे चल रहा है, वो उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) और ललन सिंह (Lalan Singh) का है.

पटना. जनता दल यूनाइटेड (JDU) का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा इस सवाल का जवाब आज मिल जाएगा. लेकिन इतना स्पष्ट है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष वही होगा जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) का बेहद खास होगा. इसके साथ ही उनमें वह काबिलियत भी देखी जाएगी, जो JDU को उसका पुराना गौरव वापस दिलवा सके. अब जब नए अध्यक्ष का चुनाव को लेकर JDU के तमाम बड़े नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं तो सबकी निगाहें सीएम नीतीश कुमार पर टिक गई हैं. सब यही जानना चाहते हैं कि आखिर नीतीश कुमार क्या चाहते हैं?

बिहार की राजनीति के जानकार बताते हैं कि JDU में जो भी बड़ा फैसला होता है वो नीतीश कुमार ही करते हैं. साथ ही यह भी कि नीतीश कुमार अक्सर हैरान कर देने वाला फैसला लेते हैं. इसकी बानगी बिहार जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में दिख चुकी है जब उन्होंने उमेश कुशवाहा का नाम आगे किया था. बावजूद इसके JDU के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए कुछ नामों पर कयासबाजी जारी है.

जेडीयू अध्यक्ष पद को लेकर जैसी अटकलें लगाई जा रही हैं और उनमें जो नाम सबसे आगे चल रहा है वो  उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) के साथ ललन सिंह (Lalan Singh) का है. ललन सिंह लोकसभा में JDU के नेता हैं और नीतीश के सबसे भरोसेमंद व संकट मोचक भी माने जाते हैं. मुंगेर के लोकसभा सांसद ललन सिंह के बारे में बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने उनके नाम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए लगभग हरी झंडी दिखा दी है.

जानिये कौन हैं ललन सिंह?
राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने वर्ष 1974 में कर्पुरी ठाकुर के शिष्य के रूप में राजनीति की शुरुआत की और उसी दौरान नीतीश कुमार के सम्पर्क में आए. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि ललन सिंह और नीतीश कुमार ने जब राजनीति की शुरुआत की तब लालू यादव भी साथ थे. लेकिन, दिल्ली में 1992 में बिहार भवन में एक घटना घटी जहां लालू यादव से ललन सिंह की किसी मुद्दे पर बहस हो गई. तब ललन सिंह ने नीतीश कुमार से मिलकर तय किया कि एक अलग पार्टी बनायी जाए.

लालू को ललन ने दी थी शिकस्त!
इस प्रस्ताव को मानने से शरद यादव ने मना कर दिया था, लेकिन अंदर ही अंदर ललन सिंह और नीतीश कुमार ने तय कर लिया था कि अलग पार्टी बनानी है. वर्ष 1994 में जब जॉर्ज फर्नाडिस ने इसका समर्थन कर दिया तो 1994 में समता पार्टी का गठन किया गया. यही समता पार्टी आगे जाकर जनता दल यूनाइटेड में बदल गयी. इसके साथ ही लालू यादव के खिलाफ गोलबंदी शुरू हुई और वर्ष 2005 में आखिरकार लालू यादव को राजनीतिक तौर पर शिकस्त दी जा सकी. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लालू को मिली इस शिकस्त में बड़ी भूमिका ललन सिंह की भी मानी जाती थी.

नीतीश – ललन की गहरी दोस्ती
ललन सिंह सबसे पहले 2000 में राज्य सभा के लिए चुने गए और उसके बाद लोकसभा चुनाव में जीत कर सांसद बने. इस दौरान नीतीश कुमार के साथ पूरी मज़बूती से जुड़े रहे. लेकिन, 2010 के आसपास नीतीश कुमार से किसी मुद्दे पर मतभेद हो गया जिसके बाद नीतीश कुमार से अलग हो गए. पर ये दूरी ज़्यादा दिनों की नहीं रही. महज दो साल बाद ही दोनों की एक दूसरे के प्रति नाराजगी दूर हुई और एक बार फिर से ललन सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती मजबूत हो गई. ये दोस्ती आज और गहरी हो गई मानी जाती है.

ललन सिंह को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
ललन सिंह ही थे जो चारा  घोटाले को लेकर सबसे मुखर रहे और पूरी कानूनी लड़ाई भी लड़े जिसकी वजह से लालू यादव की राजनीति पर गहरा असर पड़ा. ललन सिंह नीतीश कुमार के लिए हमेशा से ढाल बन कर खड़े रहे. जब भी JDU किसी संकट में पड़ा ललन सिंह ने उस परिस्थिति से JDU को बाहर निकाला. इस वक्त जब JDU अपने खराब दौर से गुजर रहा है और एक बार फिर से पुराने गौरव को प्राप्त करना चाहता है, ललन सिंह सबसे फिट उम्मीदवार के तौर पर उभरकर सामने आ रहे हैं.

ललन के नाम पर अंतिम मुहर बाकी
सियासत के जानकारों की मानें तो ललन सिंह JDU के अंदर ऐसे नेता के तौर पर जाने जाते हैं जिनका कोई विरोधी नहीं है, और कोई है भी तो वो मुखर नहीं होता है. साथ ही भाजपा और सहयोगी पार्टियों से उनके बेहतर संबंधन भी हैं जिसका फायदा उन्हें मिल सकता है. सियासी जानकारों की राय में  इस वक्त JDU को ऐसा ही राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहिए जिसका JDU के अंदर से कोई विरोध ना हो. साथ ही सहयोगियों में भी अच्छा मैसेज जाए और JDU को फायदा मिल सके. हालांकि उपेंद्र कुशवाहा के नाम की भी चर्चा है, लेकिन अंदर की खबर तो यही है कि अगर कुछ अंतिम समय में बड़ा खेल नहीं हुआ तो ललन सिंह को जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी मिल सकती है.

Tags: Bihar NDA, Bihar politics, CM Nitish Kumar, Jdu, Lalan Singh, RCP Singh, Upendra kushwaha

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