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OPINION: क्यों नीतीश-PK के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है पटना विश्वविद्यालय चुनाव?

Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: December 4, 2018, 2:25 PM IST
OPINION: क्यों नीतीश-PK के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका है पटना विश्वविद्यालय चुनाव?
नीतीश कुमार के साथ प्रशांत किशोर

बिहार की राजनीति में साथ होने के बाद भी पीके की ये कोशिश है कि वो पीयू से एबीवीपी के वर्चस्व को न केवल तोड़ें बल्कि इसे समाप्त भी करें.

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बिहार में राजनीति यूं तो हमेशा से उबाल पर होती है लेकिन इन दिनों जिस मुद्दे को लेकर माहौल गर्म है वो है छात्र संघ चुनाव. सूबे में होने वाले छात्र संघ चुनाव को लेकर बिहार में सत्तारूढ़ दलों के बीच वार लगातार जारी है. पर्दे के पीछे से ही सही, लेकिन दोनों दलों यानी जेडीयू और बीजेपी के नेता इस चुनाव को अपने लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुके हैं.

हाल ही में सियासी रणनीतिकार से जेडीयू के सिपहसलार बने प्रशांत किशोर के लिए तो ये चुनाव पूरी तरह से प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है. कहा जा रहा है कि पीके के इस मिशन को नीतीश की भी हामी मिली हुई है. हाल ही में पार्टी की कमान संभालने वाले पीके भी जानते हैं कि पटना बिहार की राजधानी और सूबे की राजनीति का केंद्र बिंदु है. ऐसे में उनकी पहली मंशा पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में जेडीयू को फतह दिलाने की है.

कैंपस में होने वाले चुनाव से ठीक पहले पीके ने एक रणनीति के तहत काम किया और यही कारण है कि उन्होंने सबसे पहले पीयू के पूर्व अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज को अपनी पार्टी में एंट्री दिलाई. इसके अलावा पीके ने हाल के दिनों में कई दफे युवाओं से न केवल बात की, बल्कि राजनीति को लेकर उनके विचार भी सुने. जेडीयू ने अध्यक्ष पद के लिए मोहित प्रकाश को अपना प्रत्याशी बनाया है. जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार के आवास 7, सर्कुलर रोड में ही मोहित को पहले जेडीयू में शामिल कराया गया और फिर हाथों-हाथ ही उनको अध्यक्ष पद का दावेदार भी बना दिया गया.

फाइल फोटो


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चूंकि पीके को पहले से ही राजनीति का रणनीतिकार माना जाता है, ऐसे में उन्होंने छोटी से छोटी बातों का भी ख्याल रखा, लेकिन जिस तरह से कई युवाओं को जेडीयू से जोड़ने की कोशिश की गई उसने दोनों दलों के बीच विवाद को जन्म दिया. पटना की सड़क पर दिव्यांशु पर हुए हमले के बाद पुलिस की कार्रवाई, एबीवीपी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद वोटिंग से दो दिन पहले प्रशांत किशोर का रात के अंधेरे में विश्वविद्यालय के कैंपस में वहां के वीसी से मिलना, इन मौकों ने जो संकेत दिए हैं उससे यही लग रहा है कि पीके के लिए ये चुनाव अब पूरी तरह से प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है और वो किसी भी कीमत पर इस चुनाव को जीतना चाहते हैं.

पीयू कैंपस से निकलते प्रशांत किशोर

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पिछले चुनाव के दौरान पीयू में भगवा दल का कब्जा रहा था और लगभग सभी सीटों पर एबीवीपी ने जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार बिहार की राजनीति में साथ होने के बाद भी पीके की ये कोशिश है कि वो पीयू से एबीवीपी के वर्चस्व को न केवल तोड़ें बल्कि इसे समाप्त भी करें. चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव के लिए वोटिंग होती है. पीयू में पांच दिसंबर को होने वाली वोटिंग से पहले प्रशांत किशोर और वीसी के बीच गुपचुप तरीके से हो रही मुलाकात ने अब वहां के प्रबंंधन पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

बीजेपी ने तो इसे अब पूरी तरह से जंग की शक्ल दे दी है. शायद यही कारण है कि रात के अंधेरे में पीके को पकड़ने के बाद न केवल पार्टी के युवा और छात्र विंग ने रातोरात राज्यपाल से मुलाकात की, बल्कि कई आरोप भी लगाए. छात्र संघ चुनाव की तारीख नजदीक है और इसके होने/स्थगित होने का फैसला राजभवन को लेना है, लेकिन पीके की रणनीति ने ये साफ कर दिया कि ये चुनाव न केवल उनके बल्कि पूरी पार्टी के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बन गया है.

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First published: December 4, 2018, 12:10 PM IST
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