JDU ने लिया आर्टिकल 370 पर यू-टर्न, रुख में आए बदलाव की ये है वजह...

JDU-BJP, Article 370: आर्टिकल 370 के मामले में भी जेडीयू की तरफ से जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे समाजवादी नेताओं की दुहाई देकर बार-बार इसे खत्म करने के प्रावधान वाले बिल का विरोध किया गया.

Amitesh | News18 Bihar
Updated: August 8, 2019, 7:56 PM IST
JDU ने लिया आर्टिकल 370 पर यू-टर्न, रुख में आए बदलाव की ये है वजह...
आर्टिकल 370 को लेकर जेडीयू ने अपना रुख बदल लिया है. (फाइल फोटो)
Amitesh | News18 Bihar
Updated: August 8, 2019, 7:56 PM IST
केंद्र सरकार ने जम्‍मू कश्‍मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 और 35A को खत्‍म कर दिया है. हालांकि उसे संसद के दोनों सदनो में बिहार गठबंधन के साथी जेडीयू (JDU) का सर्मथन नहीं मिला था. जेडीयू के महासचिव आरसीपी सिंह की तरफ से कहा गया कि आर्टिकल 370 को खत्म करने वाले बिल के पास होने के बाद अब ये बात खत्‍म हो चुकी है. अब इसे सबको स्वीकार करना ही होगा. इस बयान के सामने आने के बाद इसे जेडीयू के रुख में नरमी के तौर पर देखा जा रहा है. आखिरकार ऐसा क्या हुआ कि जेडीयू को अपने रुख में इस तरह बदलाव करना पड़ा?

दरअसल, जेडीयू शुरू से ही अपने समाजवादी नेताओं की विचारधारा की याद दिलाते हुए कहती रही है कि हम आर्टिकल 370 के खत्म करने, समान नागरिक संहिता लागू करने और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाकर हल निकालने के खिलाफ रहे हैं. जेडीयू राम मंदिर मामले में अदालत के फैसले का इंतजार करने या फिर आपसी सहमति से हल निकालने की कवायद पर आगे बढ़ने पर जोर देती रही है.

जेडीयू देती रही समाजवादी नेताओं की दुहाई, लेकिन...
आर्टिकल 370 के मामले में भी जेडीयू की तरफ से जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे समाजवादी नेताओं की दुहाई देकर बार-बार इस धारा को खत्म करने के प्रावधान वाले बिल का विरोध किया गया. हालांकि एनडीए में शामिल जेडीयू के लिए इस बिल का सदन के भीतर विरोध करना मुश्किल हो रहा था. अगर बीजेपी की साथी इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ वोट करती तो फिर उसका बीजेपी के साथ एक पल भी चलना मुश्किल था. लिहाजा जेडीयू ने बीच का रास्ता चुना. जेडीयू की तरफ से सदन के भीतर और बाहर चर्चा के दौरान इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया गया, लेकिन जब बारी वोटिंग की आई तो जेडीयू ने सदन से वॉक आउट कर दिया.

तीन तलाक बिल पर जेडीयू ने अपनाया था ये रुख
कुछ ऐसा ही तीन तलाक बिल के वक्त भी किया गया. उस वक्त भी जेडीयू की तरफ से इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी. जेडीयू ने सदन के भीतर औऱ बाहर इस बिल पर सरकार की तरफ से किए जा रहे बदलाव के प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्ति जताई, लेकिन जब बारी वोटिंग की आई तो उस वक्त सदन से वॉक आउट कर दिया.

लेकिन अब जबकि धारा 370 के मसले पर बीएसपी से लेकर आम आदमी पार्टी तक ने समर्थन देने का फैसला कर लिया. यहां तक कि कांग्रेस के भीतर भी इस मसले पर दो-फाड़ दिख गया तो उस परिस्थिति में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के लिए लगातार विरोध करते रहना मुश्किल लग रहा था.जेडीयू के रुख में आए इस परिवर्तन को इसी तौर पर देखा जा रहा है.
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जेडीयू इस बात को समझ रही है कि उसके विरोध करने या नहीं करने का कोई असर नहीं होने वाला. उल्टे इस मुद्दे पर विरोध करने पर जेडीयू को राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है.


जेडीयू महासचिव आरसीपी सिंह की स्वीकारोक्ति भी इसी बात को दर्शाती है. आरसीपी सिंह का इशारा पार्टी के गुलाम रसूल वलियावी समेत उन नेताओं की तरफ भी है, जो अब भी धारा 370 पर अपना विरोध जताने की कोशिश कर रहे हैं.

भाजपा ने यूं किया स्‍वागत
जेडीयू की तरफ से आई इस नरमी का बीजेपी ने भी स्वागत किया है. पार्टी के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्‍हा ने इसे देर आए दुरुस्त आए वाला कदम बताया है, तो दूसरी तरफ, बिहार सरकार में मंत्री विजय सिन्‍हा ने कहा, 'जब घोर विरोधी कांग्रेस के लोग समर्थन कर रहे हैं तो जेडीयू हमारे गठबंधन का पार्टनर है.'

न्‍यूज़ 18 से बातचीत में सांसद राकेश सिन्‍हा ने कहा, 'जेडीयू-बीजेपी विकास के मुद्दे पर साथ हैं, इसलिए मन में कोई दुराव नहीं हो सकता.'


जबकि जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने भी इस मुद्दे पर थोड़ा नरम रुख अपनाते हुए कहा कि हम सरकार के फैसले पर असहमति जता चुके हैं, लेकिन सरकार हीलिंग टच के लिए अगर प्रयास करती है तो हम उसकी सराहना करेंगे.

इस वजह से गठबंधन पर उठे सवाल
तीन तलाक बिल के बाद आर्टिकल 370 पर भी जेडीयू की परवाह किए बगैर जिस तरह से सरकार ने अपना कदम बढ़ाया है, उसके बाद से ही इस बात के कयास लगने शुरू हो गए थे कि जेडीयू और बीजेपी का साथ आखिरकार कब तक रहेगा. क्या जेडीयू इस तरह हर मुद्दे पर बीजेपी के आगे बढ़ने के बाद भी उसके साथ मिलकर बिहार में सरकार चलाती रहेगी. लोकसभा चुनाव में बड़ी सफलता के बाद भी जेडीयू के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद से ही कयासों का बाजार गरम है. अब आर्टिकल 370 पर जेडीयू के नरम तेवर बीजेपी के साथ गठबंधन बरकरार रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

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First published: August 8, 2019, 7:14 PM IST
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