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नीतीश कुमार के 'संकटमोचक' ललन सिंह, चतुर रणनीति से बनाया राजनीति का 'सिकंदर'

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह कई मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ट्रबल शूटर के तौर पर होकर उभरे हैं

जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह कई मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ट्रबल शूटर के तौर पर होकर उभरे हैं

Bihar News: जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का सपना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र की सियासत में भी अपना जलवा दिखाएं. जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं तो उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह सकता कि वो पीएम के उम्मीदवार हैं, लेकिन हां, उनमें वो तमाम गुण हैं जो एक प्रधानमंत्री के उम्मीदवार में हो सकता है

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पटना. बिहार की सियासत ने करवट बदली है. कल तक जो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) बीजेपी के साथ हुआ करते थे, अब वो अपने पुराने सहयोगी लालू यादव (Lalu Yadav) के साथ हो लिए हैं. नीतीश को फिर से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ लाने में अगर किसी का सबसे बड़ा रोल माना जा रहा है तो वो जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह (Lalan Singh) हैं, जिनको नीतीश कुमार का सबसे बड़ा संकट मोचक माना जा रहा है. हालांकि, कुछ समय पहले तक आरसीपी सिंह को भी नीतीश कुमार का हनुमान माना जाता था. लेकिन अब दोनों राजनीतिक तौर पर एक-दूसरे के दुश्मन बन गए हैं.

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जब जेडीयू मात्र 43 सीटों पर सिमट गई थी, तब नीतीश कुमार के लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था. इसके कुछ दिनों बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की कमान ललन सिंह के हाथ में आ गई. इसके बाद उन्होंने पार्टी को पुराने दौर में ले जाने की कवायद तेज कर दी, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं था क्योंकि उसकी पुराने सहयोगी बीजेपी लगातार आक्रामक हो रही थी. कई ऐसे मुद्दे आए जिसके बाद जेडीयू के लिए हालात असहज हो गए, लेकिन ललन सिंह हर मोर्चे पर निपटने की कोशिशों में लगे रहे.

BJP को भनक तक नहीं लगी, JDU ने जोर का झटका दिया
ताजा मामला इस बात का गवाह है जब बीजेपी को भनक तक नहीं लगी और जेडीयू ने उसे झटका देते हुए आरजेडी के साथ आकर नीतीश कुमार के अगुवाई में महागठबंधन की सरकार बना ली. बीजेपी के लिए यह जबरदस्त सेटबैक है. इस पूरी कवायद की जानकारी नीतीश कुमार के साथ-साथ ललन सिंह को थी जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को ऐसा अंजाम दिया जिसकी जानकारी तभी सामने आई जब नीतीश कुमार ने तय कर लिया कि अब बीजेपी के साथ नहीं रहना है.

सूत्र बताते हैं कि आरजेडी के साथ जाने की पृष्ठभूमि काफी पहले से तैयार होने लगी थी. इसकी पूरी कमान नीतीश कुमार के निर्देश पर ललन सिंह ने संभाल रखा था, लेकिन यह काम आसान नहीं था. ललन सिंह ने पर्दे के पीछे से एक-एक कदम संभल कर रखा ताकि अंतिम समय में कोई समस्या न आ जाए क्योंकि जेडीयू का एक भी गलत कदम उसके लिए खतरनाक हो सकता था. आर.सी.पी सिंह को शो-कॉज भेजना हो या आरजेडी के साथ सरकार बनाना यह तमाम घटनाएं इतनी सावधानी से हुई कि किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी. बिहार की सियासत में यह सब ललन सिंह की अगुवाई में हुआ.

नीतीश कुमार पर जब-जब संकट आया, ललन सिंह संकटमोचक होकर उभरे
इसके पहले भी जब-जब नीतीश कुमार पर संकट आया, ललन सिंह संकटमोचक के तौर पर उभर कर आए. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब जेडीयू मात्र दो सीटों पर सिमट गई थी तब नैतिकता के नाम पर नीतीश कुमार ने पद छोड़ दिया था और अपनी जगह मुख्यमंत्री की कुर्सी जीतन राम मांझी को सौंप दी थी. लेकिन बाद में मांझी ने नीतीश कुमार के साथ ही राजनीति शुरू कर दी तब फिर से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के लिए ललन सिंह ने ही कमान संभाली थी. उन्होंने बेहद सावधानी से जीतन राम मांझी के गुट को झटका देते हुए नीतीश कुमार को पुन: मुख्यमंत्री बनाने में मदद की थी.

ललन सिंह का सपना है कि नीतीश कुमार केंद्र की सियासत में भी अपना जलवा दिखाएं. जब उनसे पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं तो उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कह सकता कि वो पीएम के उम्मीदवार हैं, लेकिन हां, उनमें वो तमाम गुण हैं जो एक प्रधानमंत्री के उम्मीदवार में हो सकता है. फिलहाल ललन सिंह जेडीयू को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि अगले साल होने वाले नागालैंड विधानसभा चुनाव में जेडीयू को इतने वोट मिल जाएंगे कि जेडीयू राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त कर लेगी.

Tags: Bihar News in hindi, Bihar politics, CM Nitish Kumar, Lalan Singh

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