मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले से नाराज है JDU, पार्टी महासचिव बोले-हम आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ

जेडीयू विरोध तो जता रही है, लेकिन उसकी मजबूरी ऐसी है कि वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है. उसके विरोध से न ही सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला है और न ही सरकार को इसकी कोई परवाह ही दिख रही है.

Amitesh | News18 Bihar
Updated: August 5, 2019, 7:52 PM IST
मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले से नाराज है JDU, पार्टी महासचिव बोले-हम आर्टिकल 370 हटाने के खिलाफ
जेडीयू ने ट्रिपल तलाक बिल का भी विरोध किया था, लेकिन...(फोटो-पीटीआई)
Amitesh | News18 Bihar
Updated: August 5, 2019, 7:52 PM IST
मोदी सरकार ने एक झटके में वो कर दिया जिसका इंतजार 72 सालों से था. बीजेपी के एजेंडे में धारा 370 खत्म करने का मसला तो जनसंघ के जमाने से ही था, लेकिन अब दोबारा सत्ता में आते ही इस फैसले पर आगे बढ़कर मोदी सरकार ने अपने वादे के मुताबिक काम कर दिया. हालांकि इस फैसले से सबसे ज्यादा परेशानी जेडीयू को हो रही है.

जेडीयू एनडीए का हिस्सा है और बिहार में जेडीयू-बीजेपी की गठबंधन की सरकार चल रही है, लेकिन उसका धारा 370 पर रूख पहले से साफ रहा है. ऐसे में धारा 370 खत्म करने के सरकार के फैसले पर जेडीयू को ऐतराज है. जेडीयू ने खुलकर इस मुद्दे पर पर अपनी असहमति भी जता दी है.

जेडीयू के केसी त्‍यागी ने कही ये बात
जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने जयप्रकाश नारायण से लेकर ज़ॉर्ज फर्नांडिस तक सभी समाजवादी नेताओं के धारा 370 पर रुख की याद दिलाते हुए कहते हैं कि उसी सिद्धांत के आधार पर नीतीश कुमार का भी इस मसले पर रुख रहा है. केसी त्यागी न्यूज़ 18 से बातचीत करते हुए कहा, 'जब ज़ॉर्ज फर्नांडिस एनडीए के संयोजक थे, तो उस वक्त सभी विवादित मुद्दों को बाहर कर एनडीए का एजेंडा तय हुआ था, जिस पर सरकार चल रही थी. उस वक्त समान नागरिक संहिता, धारा 370 और राम मंदिर के मुद्दे को एनडीए के एजेंडे से बाहर रखा गया था. अब सरकार के 370 के फैसले पर हम यही कहेंगे कि हम इस फैसले के खिलाफ हैं और उसके साथ नहीं हैं.'

दरअसल, उस वक्त एनडीए -1 के वक्त बीजेपी के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था,लिहाजा मिली-जुली सरकार चल रही थी. एनडीए के कॉमन मिनिमन प्रोग्राम से इन सभी मुद्दों को बाहर रखा गया था, जो कि जनसंघ और बीजेपी का एजेंडा था, न कि एनडीए के सहयोगी दलों का. अब जबकि बीजेपी अपने दम पर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई है, लिहाजा पार्टी अपने वादे के मुताबिक, अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रही है. पहले तीन तलाक बिल को दोनों सदनों में पास कराया. उसके बाद अब धारा 370 पर आगे बढ़ गई है.

क्‍यों मजबूर है जेडीयू
जेडीयू विरोध तो जता रही है, लेकिन उसकी मजबूरी ऐसी है कि वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है. उसके विरोध से न ही सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला है और न ही सरकार को इसकी कोई परवाह ही दिख रही है. बिहार सरकार में मंत्री और जेडीयू महासचिव श्याम रजक के तल्ख तेवर पार्टी के भीतर की उस मजबूरी और उस परेशानी को दिखा रहा है. मंत्री श्याम रजक का बयान उस झुंझलाहट को दिखा रहा है, जिसमें उनकी पार्टी चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही है और हर हाल में 370 का विरोध करते हुए बीजेपी के साथ बने रहना चाहती है.
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तीन तलाक बिल का भी किया विरोध, लेकिन...
दरअसल, जेडीयू तीन तलाक बिल पर भी बिल के मौजूदा स्वरुप के हिसाब से उसे समर्थन देने को तैयार नहीं हो रही थी. वो बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजकर आम सहमति बनाने की कोशिश की वकालत कर रही थी, लेकिन उसके विरोध के बावजूद बिल दोनों सदनों से पारित हो गया. लिहाजा जेडीयू इस पूरे मामले को लेकर असहज महसूस कर रही है.

बहरहाल, वक्त की नजाकत को देखते हुए जेडीयू फिलहाल बीजेपी के साथ रहना ही मुनासिब समझ रही है. न्यूज़ 18 से बात करते हुए केसी त्यागी ने साफ शब्दों में कहा कि हम तमाशे के लिए मंदिर नहीं तोड़ते. यकीनन त्‍यागी का ये बयान साफ कर रहा है कि आने वाले दिनों में जेडीयू खुलकर बीजेपी के साथ आमने-सामने आने की कोशिश नहीं करेगी, लेकिन एक के बाद एक तमाम उन मुद्दों पर अगर बीजेपी आगे बढ़ती रही तो जेडीयू के लिए अपने रुख का बचाव करना मुश्किल हो सकता है.

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First published: August 5, 2019, 7:47 PM IST
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