Bihar News: 4 साल बाद JDU ने आखिर क्यों फिर से छेड़ा विशेष राज्य का दर्जा वाला राग? जानें वजह

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से विशेष राज्य का दर्जा देने का मामला जोर पकड़ने लगा है (फाइल फोटो)

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से विशेष राज्य का दर्जा देने का मामला जोर पकड़ने लगा है (फाइल फोटो)

जुलाई 2017 के बाद पहली बार जेडीयू ने बिहार को विशेष राज्य के दर्जे पर फिर से आवाज उठायी है. आरजेडी से गठबंधन तोड़ने के बाद जब से बीजेपी जेडीयू की सरकार चल रही है, दोनों दल इस मसले पर चुप ही थे, लेकिन नीति आयोग की रिपोर्ट ने एक बार फिर इस मुद्दे को गर्म कर दिया है.

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रजनीश चंद्र

पटना. विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर बिहार की सियासत में फिर उबाल देखने को मिल रहा है. नीति आयोग की SDG (Sustainable Development Goals) रिपोर्ट में बिहार विकास के मामले में फिर पिछड़ता दिख रहा है. इसके बाद ही बिहार की राजनीति में विशेष राज्य की गूंज सुनाई देने लगी है. सत्ता पक्ष खास कर जेडीयू (JDU) जहां पिछड़ने का काऱण विशेष राज्य (Special State) का दर्जा नहीं मिलने को बता रहा है तो वहीं विपक्ष विशेष राज्य के दर्जे की मांग को सरकार की विफलता से ध्यान हटाने का हथकंडा मान रहा है.

नीति आयोग ने सतत विकास के लक्ष्यों को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी कर दी है. इसमें बिहार सबसे निचले पायदान पर है. यह रिपोर्ट सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के क्षेत्र में राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन को बताती है. 17 मानकों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गयी है. गरीबी की पूर्णतः समाप्ति, भुखमरी की समाप्ति, अच्छा स्वास्थ्य और जीवन स्तर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, साफ पानी और स्वच्छता, सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा जैसे मानकों के आधार पर रिपोर्ट बनी है. इसमें पिछले साल की तरह इस बार भी बिहार 52 अंक के साथ सबसे नीचे है. केरल पहले पायदान पर है.

जेडीयू की नजर में पिछड़ने का कारण
जैसे ही नीति आयोग की रिपोर्ट सामने आयी जेडीयू नेता पिछड़ने के कारण बताने लगे. जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि बिहार के बंटवारे के बाद पहले से पिछड़ा राज्य और पिछड़ता चला गया. बंटवारे के बाद उद्योग, खनिज संपदा, पावर प्रोजेक्ट झारखंड को मिल गया] जिसका खामियाजा बिहार को भुगतना पड़ा. इसलिए विशेष राज्य के दर्जे से ही बिहार का विकास संभव है. उपेन्द्र कुशवाहा ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की है. उपेन्द्र कुशवाहा ने अपने ट्वीट में लिखा, 'बिहार-झारखंड विभाजन उपरांत प्राकृतिक संपदाओं का अभाव और बिहारवासियों पर प्राकृतिक आपदाओं का लगातार दंश के बावजूद नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA सरकार अपने कुशल प्रबंधन से बिहार में विकास की गति देने में लगी है, लेकिन वर्तमान दर पर अन्य राज्यों की बराबरी संभव नहीं है. नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट इसका प्रमाण है. अतः विनम्र निवेदन है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की जदयू की वर्षों पुरानी लंबित मांग पर विचार करें और बिहार वासियों को न्याय दें.'

जेडीयू को मांझी का भी मिला साथ

हम नेता जीतन राम मांझी ने भी विशेष राज्य के दर्जे की मांग का समर्थन किया. उन्होंने भी ट्वीट कर कहा, 'कम संसाधनों के बावजूद नीतीश कुमार ने बिहार के बदतर क़ानून व्यवस्था और बेहाल शिक्षा महकमे को दुरुस्त करने में अपनी पुरी ताक़त लगा दी है. अब आधारभूत संरचना को ठीक करने के लिए विशेष राज्य के दर्जे की ज़रूरत है. डबल इंजन की सरकार में विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा.'



तेजस्‍वी का सीएम नीतीश पर वार

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा, 'नीतीश कुमार की सत्तालोलुप अदूरदर्शी नीतियों, गलत निर्णयों और अक्षम नेतृत्व के कारण बिहार लगातार तीसरे वर्ष भी नीति आयोग की रिपोर्ट में सबसे फिसड्डी प्रदर्शन के साथ सबसे निचले पायदान पर है.' आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने भी ट्वीट के जरिये कहा कि नीतीश-भाजपा के 16 वर्षों के अथक प्रयास और नकारात्मक राजनीति का ही प्रतिफल है कि बिहार नीचे से शीर्ष पर है. कांग्रेस ने भी नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया. कांग्रेस नेता प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि अपनी विफलता से ध्यान हटाने के लिए जेडीयू विशेष राज्य के दर्जे का राग अलाप रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी जेडीयू सोलह साल से सत्ता में है लेकिन बिहार का विकास कोसो दूर है.

विशेष राज्य की मांग पर क्या कहती है बीजेपी ?

विशेष राज्य के दर्जे की मांग पर बीजेपी प्रवक्ता अखिलेश सिंह ने कहा कि जो लोग इसकी मांग करते हैं, उन्हें विशेष राज्य के मामले में जो नियम है उसकी जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्यों को आवश्यकतानुसार विशेष पैकेज दिया जाता है. बिहार को जब-जब आवश्यकता हुई है, केन्द्र ने मदद की है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद बिहार के विकास के लिए तत्पर रहते हैं. हालांकि, बीजेपी नेता ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू नीति आयोग की रिपोर्ट पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं. उनका कहना है कि नीति आयोग को बिहार का विकास नहीं दिखता है, जिसने बिहार का रिपोर्ट तैयार किया है उसने बड़ी गलती की है. विकास रिपोर्ट किस भावना से जारी हुआ है. यह जांच का विषय है.

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