तीन तलाक बिल का विरोध करेगी JDU, केसी त्यागी बोले- नाजुक मसले पर NDA में कभी नहीं हुई चर्चा

केसी त्यागी ने कहा कि जेडीयू मौजूदा स्वरूप में तीन तलाक बिल का समर्थन नहीं करेगी. हमारे दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लॉ कमीशन को इस बारे में बताया था कि ये नाज़ुक मसला है लिहाजा इसमें सभी पक्षों से बात कर आम सहमति बनाने की करने कोशिश करनी चाहिए.

News18 Bihar
Updated: June 21, 2019, 1:55 PM IST
तीन तलाक बिल का विरोध करेगी JDU, केसी त्यागी बोले- नाजुक मसले पर NDA में कभी नहीं हुई चर्चा
जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी
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Updated: June 21, 2019, 1:55 PM IST
तीन तलाक पर बैन लगाने को लेकर शुक्रवार को लोकसभा में नया बिल पेश किया गया. हंगामे के बीच कांग्रेस और ओवैसी की पार्टी AIMIM ने इसका खुलकर विरोध किया. थरूर ने कहा कि यह मुस्लिमों के खिलाफ है तो ओवैसी ने कहा कि सिर्फ मुस्लिमों को नहीं बल्कि इसमें सभी समुदाय को शामिल किया जाना चाहिए. बिल पर हो रही चर्चा के बीच सत्ता पक्ष एनडीए की सहयोगी जेडीयू ने एक बार फिर इस बिल का विरोध करने की बात दोहराई है.

'आम सहमति बनाकर लाया जाए बिल'
जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि जेडीयू मौजूदा स्वरूप में तीन तलाक बिल का समर्थन नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि हमारे दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने लॉ कमीशन को इस बारे में बताया था कि ये नाज़ुक मसला है लिहाजा इसमें सभी पक्षों से बात कर आम सहमति बनाने की करने कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लेकिन इस बारे में एनडीए के भीतर कभी कोई चर्चा नहीं हुई है.

इसलिए दोबारा लाना पड़ा विधेयक

गौरतलब है कि संसदीय नियमों के मुताबिक, जो विधेयक सीधे राज्यसभा में पेश किए जाते हैं, वो लोकसभा भंग होने की स्थिति में स्वत: समाप्त नहीं होते. जो विधेयक लोकसभा में पेश किए जाते हैं और राज्यसभा में लंबित रहते हैं, वे निचले सदन यानी लोकसभा भंग होने की स्थिति में अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं.  तीन तलाक बिल के साथ भी यही हुआ और यही वजह है कि मोदी सरकार को नया विधेयक लाना पड़ा.

लोकसभा में पारित हो चुका था बिल
ट्रिपल तलाक पर बैन लगाने वाला विधेयक फरवरी में लोकसभा में पारित हो गया था. राज्यसभा में एनडीए सरकार के पास बहुमत नहीं था, इसलिए बिल वहां अटका रहा. अब सरकार बजट सत्र में इसे पेश करने और दोनों सदनों से पास कराने की उम्मीद कर रही है.  अध्यादेश को भी कानून में तभी बदला जा सकता है जबकि संसद सत्र शुरू होने के 45 दिन के भीतर उसे पास करा लिया जाए.
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नए बिल में ये हुए थे बदलाव
मोदी सरकार के अध्यादेश के आधार पर तैयार नए बिल के तहत आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी. हालांकि मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं.  उनके पास पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा. बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा और आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा. यही नहीं तीन तलाक सिर्फ तभी संज्ञेय अपराध माना जाएगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएंगे.

इनपुट- अमितेश

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First published: June 21, 2019, 1:20 PM IST
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