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बीजेपी की अतिपिछड़ी राजनीति पर जेडीयू का नया दांव, कर्पूरी ठाकुर जयंती पर करने जा रहा यह काम

बीजेपी की अतिपिछड़ी राजनीति पर जेडीयू का नया दांव, कर्पूरी ठाकुर जयंती पर करने जा रहा यह काम

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्य में जदयू अतिपिछड़ा वोट बैंक को एकजुट रखने की कवायद कर रहा है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्य में जदयू अतिपिछड़ा वोट बैंक को एकजुट रखने की कवायद कर रहा है.

Bihar Politics: एक ओर बीजेपी ने जहां बिहार में अतिपिछड़े समुदाय को साधकर अपनी सियासत का आधार मजबूत किया है, वहीं जेडीयू ने अतिपिछड़ा वोटबैंक को और शक्तिशाली बनाने के लिए नई रणनीति बनाई है. आगामी 24 जनवरी को भूतपूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर नवनिर्वाचित अतिपिछड़े समुदाय से आने वाले मुखिया और सरपंच को सम्मानित कर इस वर्ग पर जेडीयू अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहता है. जेडीयू ऐसे तमाम प्रतिनिधियों को सम्मानित कर यह संदेश देना चाहती है कि अतिपिछड़ों का सम्मान जेडीयू के साथ ही है. राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस सम्मान समारोह के जरिये जदयू अतिपिछड़ों के बीच अपनी मजबूती को और सशक्त बनाना चाहता है.

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पटना. बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ी जातियों के लिए कई कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं. अतिपिछड़ों को विभिन्न क्षेत्रों में आरक्षण के सहारे इस बड़े वोटबैंक पर जेडीयू की मजबूत पकड़ भी रही है. पर बीजेपी ने भी पिछले कुछ वर्षों में बिहार में अतिपिछड़े समुदाय की सियासत मजबूती से शुरू की है और काफी हद तक साधने में भी सफल रही है. जाहिर है इस वोटबैंक को लेकर एनडीए खेमे के दो बड़े दलों के बीच रस्साकशी का खेल जारी है. बीजेपी की इसी अतिपिछड़ी जाति की राजनीति के जवाब में अब जेडीयू ने नया दांव खेला है. अब जेडीयू मुखिया, सरपंच के बहाने अतिपिछड़े समुदाय के वोट बैंक को अपने खेमे में करने की नई चाल चलते हुए  जेडीयू ने वैसे तमाम नवनिर्वाचित मुखिया, सरपंच और स्थानीय प्रतिनिधियों को सम्मानित करने का ऐलान गिया है जो हाल ही में चुनाव जीतकर आए हैं.

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि सभी अतिपिछड़ा वर्ग से आने वाले मुखिया, सरपंच को प्रखंड स्तर पर ही सम्मानित किया जाएगा. प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने बताया कि नीतीश कुमार ने अतिपिछड़ों को आरक्षण दिया जिसके कारण अतिपिछड़े समुदाय से बड़ी संख्या में उम्मीदवार जीतकर आए हैं. सभी को प्रखंड स्तर पर ही कार्यक्रम करके पार्टी सम्मानित करेगी.

बता दें कि जेडीयू ने 24 जनवरी को कर्पूरी जयंती बड़े पैमाने पर मनाने का फैसला लिया है. इसी दिन अतिपिछड़ों वर्ग से आने वाले सभी मुखिया सरपंच को सम्मानित करने का फैसला लिया है. 24 जनवरी को जेडीयू बिहार के तमाम प्रखंडों में कर्पूरी जयंती मनाकर मुखिया और सरपंच को सम्मानित करेगा.

बता दें कि इस बार के स्थानीय चुनाव में बड़े संख्या में नए चेहरे और अतिपिछड़ा वर्ग से मुखिया चुनकर आए हैं. जेडीयू ने ऐसे तमाम प्रतिनिधियों को सम्मानित कर यह संदेश देना चाहता है कि अतिपिछड़ों का सम्मान जेडीयू के साथ ही है. राजनीति के जानकार बतातेो हैं कि इस सम्मान समारोह के जरिये जेडीयू अतिपिछड़ा के बीच अपनी मजबूती को और सशक्त बनाना चाहता है.

दरअसल, एक तरफ जहां जेडीयू बिहार में अतिपिछड़ों को हक और सम्मान दिलाने का सबसे बड़ा दावा करती है, वहीं बीजेपी ने भी बिहार में अतिपिछड़ा की सियासत शुरू की है. 2015 के विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव या फिर संगठन विस्तार की बात हो बीजेपी ने बैकवर्ड कार्ड खूब खेला है. 2015 के विधानसभा चुनाव में 152 में 65 सीटें पिछड़ी और अतिपिछड़ी जाति को ही दी थीं.

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 17 में 8 पिछड़े और अतिपिछडे को टिकट दिया. संगठन और बीजेपी में बड़े चेहरों की बात करे तो सांसद सुशील मोदी, नित्यानंद राय, प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, डिप्टी सीएम रेणु देवी सभी इसी वर्ग से आते हैं. बीजेपी की अतिपिछड़ी राजनीति के जवाब में जदयू ने अब नए मुखिया और सरपंचों को सम्मानित कर अपनी पकड़ मजबूत रखना चाहता है.

Tags: Bihar politics, CM Nitish Kumar, JDU news

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