बिहार: जीविका दीदियों का कमाल, कोरोना काल में बना डाले 5 करोड़ 60 लाख मास्क

बिहार के 38 जिलों के 999 मास्क उत्पादन केन्द्रों पर जीविका दीदियों द्वारा मास्क का निर्माण किया जा रहा है.

बिहार के 38 जिलों के 999 मास्क उत्पादन केन्द्रों पर जीविका दीदियों द्वारा मास्क का निर्माण किया जा रहा है.

जीविका दीदियों को अब तक करीब 7 करोड़ 50 लाख मास्क निर्माण का आर्डर प्राप्त हुआ है. बिहार में अब तक 10 लाख 27 हजार 88 जीविका स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है. लगभग 1 करोड़ 27 लाख परिवार जुड़े हुए हैं.

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पटना. बिहार में जीविका दीदियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. कोरोना के इस संकट में जीविका दीदी मास्क बनाकर कमाई कर रही हैं. सूबे में 999 केंद्रों पर मास्क बनाये जा रहे हैं. अब तक जीविका दीदियों की तरफ से 5 करोड़ 60 लाख मास्क बनाये गए हैं. लगभग 110 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का मास्क का व्यवसाय किया जा चुका है. ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण का द्वितीय लहर जारी है. इससे बचाव में मास्क की उपयोगिता काफी अधिक है. इसी को ध्यान में रखकर सरकार पंचायती राज विभाग के माध्यम से मास्क का वितरण करवा रही है. मास्क की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को दी गई है. उन्होंने बताया कि बिहार के 38 जिलों के 999 मास्क उत्पादन केन्द्रों पर 30 हजार 379 जीविका दीदियों द्वारा अब तक 5 करोड़ 60 लाख मास्क का निर्माण किया जा चुका है. 4 करोड़ 53 लाख 72 हजार से अधिक मास्क की आपूर्ति पंचायती राज संस्थाओं को की जा चुकी है. जीविका दीदियों को अब तक करीब 7 करोड़ 50 लाख मास्क निर्माण का आर्डर प्राप्त हुआ है.

जिलावार मास्क उत्पादन की बात की जाय तो सारण में 51 लाख, गया में 49 लाख, नालन्दा में 39 लाख, मधुबनी जिला में 32 लाख, पूर्वी चम्पारण में 34 लाख, किशनगंज एवं दरभंगा में 25 लाख, मधेपुरा, बाँका एवं पटना जिला में 30 लाख, कटिहार एवं अररिया जिला में 24 लाख, सीतामढ़ी जिला में 22 लाख, समस्तीपुर एवं मुजफ्फरपुर जिला में 19 लाख, सहरसा एवं जमुई जिला में 20 लाख, गोपालगंज जिला में 31 लाख मास्क का निर्माण किया जा चुका है. श्रवण कुमार ने बताया कि मास्क निर्माण से हर जीविका दीदी को प्रत्येक दिन औसतन 200 रुपये की आय होती है. यदि राज्य के बाहर अन्य राज्यों से मास्क की आपूर्त्ति हेतु आर्डर प्राप्त होता है तो बिहार की जीविका दीदियां उसे भी मास्क की आपूर्ति करने में सक्षम हैं. प्रत्येक दिन 10 लाख मास्क निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. अब तक लगभग 110 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का मास्क का व्यवसाय किया जा चुका है. मास्क निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में लॉकडाउन के समय जीविका दीदियों को रोजगार प्राप्त होने के साथ ही लोगों को मास्क की आपूर्ति भी हो जाती है.

बिहार में अब तक 10 लाख 27 हजार 88 जीविका स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है. लगभग 1 करोड़ 27 लाख परिवार जुड़े हुए हैं. इन समूहों को बैंकों से अब तक 15 हजार 500 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जा चुकी है. अभी 1 हजार 931 बैंक सखियों द्वारा ग्रामीणों को घर बैठे बैंकिंग सुविधा प्रदान की जा रही है. लगभग 7 लाख 48 हजार किसान श्रीविधि से खेती एवं 6 लाख 26 हजार किसान सब्जी की खेती से जुड़े हैं. 12 जिलों में एकीकृत बकरी और भेड़ विकास योजना, 15 जिलों में पषु सखी मॉडल, 36 जिलों में एकीकृत मुर्गी विकास योजना, 5 जिलों में मत्स्य पालन आदि की योजनाएं जीविका द्वारा संचालित की जा रही है. इसके अतिरिक्त 12 जिलों के सदर अस्पताल में 'दीदी की रसोई' का संचालन करके कोविड वार्ड में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है तथा 19 जिलों में कुल 55 ग्रामीण बाजारों का संचालन किया जा रहा है. दीदियों द्वारा संचालित 2000 किराना दुकान इनसे सीधे जुड़े हुए हैं. जल-जीवन-हरियाली अभियान के 'मिशन 2.51 करोड़' के तहत समूह सदस्यों द्वारा 90 लाख से अधिक पौधारोपण किया गया. जीविका दीदियों को कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु अभियान में भी अहम जिम्मेदारी दी गयी है. जीविका द्वारा अब तक 2 लाख 86 हजार युवाओं को रोजगार हेतु प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा रोजगार मेला लगाकर उन युवाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है

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