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Jharkhand Election Result 2019: बिहार की राजनीति पर होंगे ये 5 बड़े असर

झारखंड चुनाव परिणाम का बिहार की राजनीति पर भी प्रभाव पड़ेगा.

झारखंड चुनाव परिणाम का बिहार की राजनीति पर भी प्रभाव पड़ेगा.

झारखंड में महागठबंधन (Grand Alliance) का प्रदर्शन बिहार के सियासी दलों के लिए भी एक सबक है और इसके साइड इफेक्ट बिहार में भी देखने को मिलेंगे.

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    पटना. बिहार (Bihar) के तमाम राजनीतिक दलों को इस बात का बखूबी अहसास है कि 19 साल पहले बिहार का हिस्सा रहे झारखंड विधान सभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election) परिणाम का असर बिहार पर भी जरूर पड़ेगा. दरअसल यहां एनडीए (NDA) का हिस्सा रहे जेडीयू और एलजेपी (JDU and LJP) ने बीजेपी से अलग चुनाव लड़ा और इसका खामियाजा बीजेपी (BJP) को भुगतना पड़ा है. वहीं, जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी (JMM, Congress and RJD) ने एकजुट होकर चुनावी लड़ाई लड़ी तो इसके परिणाम सकारात्मक रहे.

    यही बात वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार (Bihar) में देखने को मिली थी जब एनडीए (बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी) साथ मिलकर लड़ी तो 40 लोकसभा सीटों में से 39 सीटों विराट विजय हुई. जाहिर झारखंड में महागठबंधन (Grand Alliance) का प्रदर्शन बिहार के सियासी दलों के लिए भी एक सबक है और इसके साइड इफेक्ट बिहार में भी देखने को मिलेंगे.

    बैकफुट पर होगी बीजेपी!
    राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखंड में बीजेपी ने खुद को अकेले खड़ा कर अपनी ताकत जानने की कोशिश की जो सफल नहीं हुई. जाहिर है बिहार में बीजेपी अब शायद ही अलग लड़ने का जोखिम ले? ऐसे में ये बात साफ होती लग रही है कि बीजेपी सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार चुनाव लड़ने को मजबूर होगी.

    CM नीतीश बढ़ाएंगे दबाव
    कुछ दिनों पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जब ये कहा था कि बिहार में एनडीए सीएम नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी तो इसके पीछे उनकी दूरदृष्टि ही कही जाएगी. दरअसल उन्हें अहसास था कि बिहार की स्थिति झारखंड की स्थिति थोड़ी अलग है. यही वजह है कि लोकसभा चुनाव में 50-50 के फॉर्मूले पर लड़ी बीजेपी-जेडीयू अब बिहार में बड़े भाई की भूमिका फिर से चाहेगी.

    LJP मांगेगी अधिक सीट
    एलजेपी ने झारखंड चुनाव में अकेले लड़ाई लड़ी पर उसे उतनी सफलता नहीं मिली, लेकिन इसका बिहार चुनाव पर जरूर असर पड़ेगा. दरअसल मजबूत होते महागठबंधन और कमजोर होता एनडीए एलजेपी के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आया है कि वह ज्यादा से ज्यादा सीटों की बारगेनिंग कर सके. ऐसे में एलजेपी भी अपने हिस्से में अधिक सीटें चाहेगी. एलजेपी ने ऐसा संदेश झारखंड में अकेले लड़कर दे भी दिया है.

    महागठबंधन के दलों को संदेश
    बिहार में महागठबंधन में शामिल छोटे दलों के लिए भी झारखंड चुनाव एक बड़ा संदेश है क्योंकि झारखंड में राजद ने मजबूत एमएम और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया और वांछित परिणाम भी प्राप्त किया. जाहिर है बिहार में मांझी का 36 सीटों और कुशवाहा का 21 सीटों पर दावे में थोड़ी नरमी जरूर देखने को मिलेगी. ऐसा इसलिए भी कि जिस तरह से एलजेपी ने महज झारखंड में अकेले लड़कर 0.27 प्रतिशत मत पाकर अपनी भद पिटवा ली, ठीक ऐसी ही स्थिति महागठबंधन के छोटे दलों की भी हो सकती है अगर अकेले चुनाव लड़ें.

    आरजेडी-कांग्रेस गठजोड़ होगा मजबूत
    बिहार में एक बात स्पष्ट रूप से दिख रही है कि राजद और कांग्रेस में खुद को अकेले मजबूत दिखाने की होड़ तो जरूर मची है, लेकिन साथ ही दोनों ही पार्टियां ये भी चाहती हैं कि सम्मानजनक समझौते के साथ एकजुट रहा जाए. दरअसल दोनों दलों के अपने-अपने वोटबैंक हैं जो एक साथ आने के बाद ही वांछित परिणाम ला पाएंगे. ऐसे में झारखंड में जेएमएम, कांग्रेस और राजद के संयुक्त प्रदर्शन के बाद बिहार में कांग्रेस और आरजेडी का गठजोर मजबूत होगा.

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