झारखंड चुनाव ने बिगाड़ा कई पार्टियों का गणित, जदयू की इस 'मुहिम' पर उठे सवाल

झारखंड चुनाव के परिणामों से जदयू की राष्ट्रीय पार्टी बनने की मुहिम को झटका लगा है.
झारखंड चुनाव के परिणामों से जदयू की राष्ट्रीय पार्टी बनने की मुहिम को झटका लगा है.

बिहार (Bihar) में अगले साल होने वाले चुनाव की तैयारियों में लगे जेडीयू (JDU) के लिए झारखंड का चुनाव परिणाम (Jharkhand Election Results) चौंकाने वाला रहा. इस परिणाम ने जदयू के राष्ट्रीय पार्टी बनने की मुहिम को भी तगड़ा झटका दिया है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: December 24, 2019, 11:06 PM IST
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साकेत कुमार

पटना. झारखंड चुनाव के नतीजों (Jharkhand Election Results) ने कई पार्टियों का राजनीतिक गणित बिगाड़ दिया है. झारखंड की सत्ता से बेदखल तो भाजपा (BJP) हुई है, लेकिन चुनावी नतीजों ने बिहार के कई दलों को सबक दे दिया है. इन दलों में राज्य का सत्ताधारी दल जेडीयू (JDU) भी शामिल है. दरअसल जदयू ने झारखंड में किसी भी पार्टी से गठबंधन किए बिना चुनाव लड़ा था. पार्टी ने दावा किया था कि उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे. जदयू झारखंड में अपना खाता तक नहीं खोल पाई. इस पर अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार से बाहर जदयू बिना गठबंधन के नहीं चल सकती? दूसरा सवाल ये भी कि आखिर ऐसे में जदयू के राष्ट्रीय पार्टी बनने के मुहिम का क्या होगा.

अकेले लड़ने का नुकसान
झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कई दलों का भ्रम तोड़ दिया है. झारखंड में एनडीए खंड-खंड था. बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आजसू अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे. गठबंधन में फूट का नतीजा वोटों पर भी दिखा. बीजेपी झारखंड में तो हारी ही, एनडीए के दूसरे सहयोगी दलों का भी हाल बेहाल रहा. बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे जेडीयू को झारखंड में करारा झटका लगा. जदयू वहां जीरो पर आउट हो गई. बिहार से सटे राज्य में पार्टी के इस बुरे हाल के बाद ये सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार से बाहर जदयू की कोई ताकत नहीं है और बिना सहयोगियों के जदयू नहीं चल सकती. सवाल जदयू के राष्ट्रीय पार्टी बनने की कोशिशों को लेकर भी किए जा रहे हैं.
झारखंड में गिर रहा जनाधार


झारखंड में जदयू का जनाधार लगातार गिरता जा रहा है. झारखंड के बिहार से अलग होने के बाद 2005 में हुए चुनाव में जदयू ने 6 सीटों पर कब्जा किया था, लेकिन उसके बाद अगले चुनाव में उसे 2 सीटें ही मिल पाई थीं. 2014 और 2019 के चुनाव में जदयू का खाता तक नहीं खुल पाया है. इस बार के चुनाव में नीतीश कुमार को छोड़कर जदयू के कई बड़े नेताओं ने झारखंड में अपनी ताकत लगाई थी, फिर भी नतीजे सिफर रहे. इसको लेकर जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन का कहना है कि झारखंड में एनडीए की सभी पार्टियां अलग-अलग लड़ीं, इस वजह से महागठबंधन को फायदा मिला. वहीं, कांग्रेस नेता तारीक अनवर का कहना है कि जब भाजपा का हाल बुरा हो गया तो जदयू को वहां कौन देखने वाला था.

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