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मांझी के विवादित बयान पर दलित का तर्क से जवाब-इतिहास देखिये...ब्राह्मण जाति नहीं, इंस्टीट्यूशन!

मांझी के विवादित बयान पर दलित का तर्क से जवाब-इतिहास देखिये...ब्राह्मण जाति नहीं, इंस्टीट्यूशन!

दलित नेता कामेश्वर चौपाल ने जीतन राम मांझी के विवादित बयान का तर्कपूर्ण जवाब दिया.

दलित नेता कामेश्वर चौपाल ने जीतन राम मांझी के विवादित बयान का तर्कपूर्ण जवाब दिया.

Kameshwar Chaupal replied to Jitan Ram Manjhi Controversial statement: हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का एक वीडियो रविवार को वायरल हुआ. इस वीडियो में वो ब्राह्मणों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे थे. साथ ही मांझी ने देवी-देवताओं के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग किया. जिसको लेकर दलित नेता कामेश्वर चौपाल ने कहा कि, भगवान राम और ब्राह्मण समाज पर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. मांझी जी को इतिहास पढ़ना चाहिए तब पता चलेगा कि ब्राह्मण समाज पुरातण पंथी नहीं बल्कि इंस्टिच्यूशन है. वहीं, भगवान राम की मर्यादा को बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने समझा तभी संविधान के पहले पन्ने पर भगवान श्री राम हैं.

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    पटना. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी एक के बाद एक विवादित बयान दे रहे हैं. इसी क्रम में उनका एक वीडियो रविवार को वायरल हुआ. इस वीडियो में वे जहां पूरे ब्राह्मण समाज को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं, वहीं मांझी देवी-देवताओं के लिए भी अभद्र भाषा का प्रयोग करते दिख रहे हैं.खुद को दलितों का बड़ा नेता मानने वाले जीतन राम मांझी के इस जातिगत व धार्मिक आधार पर आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर बिहार में सियासत भी गरमा गई है. कई लोग जीतन राम मांझी की ही भाषा में उनको जवाब दे रहे हैं तो कई उन्हें माफी मांगने को कह रहे हैं. लेकिन, मांझी के इस आपत्तिजनक बयान का सटीक जवाब एक दलित नेता ने ही दिया है वह भी तथ्यों के साथ तर्क करते हुए.

    दलित नेता  कामेश्वर चौपाल ने कहा है कि, जीतन राम भगवान राम और ब्राह्मणों पर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. कामेश्वर चौपाल ने इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग किया और उसपर एक लंबा पोस्ट लिखा जिसमें जीतनराम मांझी की बातों को तर्कपूर्ण तरीके से खारिज कर दिया. उन्होंने लिखा,

    सियासत का घालमेल कल सोशल मीडिया पर देखा कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय जीतन राम मांझी जी, ब्राह्मण समाज और  भगवान राम पर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. उनकी समस्या है कि वह ब्राह्मण को जाति के रूप में और श्रीराम को एक सामान्य मनुष्य के रूप में देखते हैं. ब्राह्मण एक जाति नहीं, इंस्टीट्यूशन है. ज्यादातर आंदोलन और बदलाव ब्राह्मणों के नेतृत्व में हुए. इतिहास देखिए, भगवान बुद्ध के शुरुआती शिष्य ब्राह्मण रहे. भगवान महावीर के आचार्य और गणधर भी ब्राह्मण ही थे. हिंदुस्तान में सुधारवादी आंदोलन का नेतृत्व रामानन्दाचार्य , बसवेश्वर ने किया तो सामाजिक सुधार के लिए राजाराम मोहन राय, स्वामी दयानन्द सरस्वती, गोविन्द महादेव रानाडे ने ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मणों के खिलाफ आंदोलन चलाए. देश मे सेकुलर मूवमेंट चलनेवाले गोपालकृष्ण गोखले, गोविन्द वल्लभ पंत, राष्ट्रवादी आंदोलन में वासुदेव बलवन्त फड़के, वीर सावरकर, डॉ हेडगेवार, गोलवलकर और कम्युनिस्ट आंदोलन की अगुवाई करने वाले बी एल जोशी, नम्बूदरीपाद बहुत से नाम शामिल हैं. इसीलिए ब्राह्मण को केवल पुराणपंथी या समाज मे उत्पन्न सभी समस्याओं की जड़ समझना अज्ञानता है. इस प्रकार की ओछि और निम्नस्तरीय चर्चा केवल बौद्धिक दिवालियापन को ही प्रकट करता है. हर समाज में वन्दनीय, पूजनीय और प्रेरणा देने वाले श्रेष्ठ और जेष्ठ महापुरुष हुवे हैं. उनमें से अच्छाई ग्रहणकर ही हम गौरवशाली समाज की रचना कर सकते हैं.

    कामेश्वर चौपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से सवाल भी किए और पूछा, 

    मैं माननीय Jitan Ram Manjhi जी से पूछना चाहूंगा कि आप जिस महामानव बाबा साहब अंबेडकर की कृपा भारतीय संविधान की वजह से आप और हमारे जैसे लोग भारत में सम्मान पा रहे हैं, उन्होंने कैसे भारतीय संविधान के प्रथम पृष्ठ पर राम दरबार का चित्रण किए हैं ? भारत के राष्टपिता परम् पूज्य बापू ने कैसे भारत के लिए “रामराज्य” की कल्पना किये ? जबकि उनके कथनानुसार राम काल्पनिक हैं!

    बहहाल, जीतन राम मांझी के बयान पर लगातार बिहार में सियासत जारी है और इसे कहीं न कहीं उनके बड़बोलेपन से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि मांझी के बयान के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं और बिहार की राजनीति में इसके असर भी जांचे-परखे जाने लगे हैं. हालांकि यह सियासत किस मोड़ घूमती है यह देखना दिलचस्प होगा.

    Tags: Comment on Lord Ram, Jitan ram Manjhi

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