बिहार चुनाव : जीतन राम मांझी के Exit से सुलझा महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे का गणित!
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बिहार चुनाव : जीतन राम मांझी के Exit से सुलझा महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे का गणित!
पिछली बार जेडीयू-आरजेडी 101-101 सीटों पर तो कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी.

जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के महागठबंधन से बाहर जाने के बाद आरजेडी, कांग्रेस, वीआईपी पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के बीच विधानसभा सीटों का बंटवारा आसान हो सकता है.

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  • Last Updated: August 25, 2020, 7:10 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल जल्द ही बजने वाला है. हालांकि अभी तक विपक्षी खेमे में तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. आरजेडी (RJD) की अगुआई वाले महागठबंधन में कांग्रेस, आरएलएसपी और वीआईपी पार्टी पहले से ही हैं, लेकिन नाराज जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने विपक्षी कुनबे को बाय-बाय कर दिया है. मांझी की नाराजगी और महागठबंधन को अलविदा कहने के बावजूद विपक्षी खेमे के भीतर कोई जल्दबाजी नहीं दिख रही है. यहां तक कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के नाम पर महागठबंधन के दूसरे घटक दलों की तरफ से अब तक मुहर भी नहीं लगाई गई है.

महागठबंधन में ऐसा होगा सीटों का गणित
महागठबंधन के भीतर के समीकरण पर गौर करें तो पिछली बार की तुलना में इस बार का समीकरण कुछ अलग है. 2015 में आरजेडी और कांग्रेस के साथ-साथ जेडीयू महागठबंधन का हिस्सा थी. उस वक्त जेडीयू-आरजेडी 101-101 सीटों पर तो कांग्रेस 41 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. लेकिन अब समीकरण बदल चुका है. जेडीयू अब एनडीए का हिस्सा है तो दूसरी तरफ महागठबंधन में उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी और मुकेश सहनी की वीआईपी की एंट्री हो चुकी है. हालाकि एंट्री तो मांझी की भी हुई थी, लेकिन उन्होंने खुद ही एक्जिट ले लिया है.

कांगेस मांग रही है अधिक सीट
नीतीश कुमार के महागठबंधन से बाहर जाने के बाद कांग्रेस की तरफ से ज्यादा सीटों की मांग की जा रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने इस बार 80 सीटों की मांग की है. दूसरी तरफ आरजेडी भी 160 से कम सीटों पर लड़ने के मूड में नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी दूसरे दलों का क्या होगा?



महागठबंधन के सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी अपने कोटे से मुकेश सहनी को जबकि कांग्रेस अपने कोटे से उपेंद्र कुशवाहा को सीटें देगी. यानी मुख्य रूप से सीटों का बंटवारा आरजेडी और कांग्रेस के बीच हो जाएगा, जिसके बाद दोनों ही दल वीआईपी और आरएलएसपी को अपने-अपने कोटे में एडजस्ट करेंगे. अगर ऐसा होता है तो फिर आरजेडी और कांग्रेस दोनों को अपनी सीटों की संख्या कम करनी पड़ेगी.

सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन के घटक दलों को लग रहा है कि जीतनराम मांझी के बाहर जाने से सीटों के बंटवारे में उनकी अड़चनें कम हो जाएगी. दूसरी तरफ, अगर महागठबंधन में सीपीआई और सीपीआईएमल की एंट्री होती है, तो उस हालात में भी आरजेडी सीपीआईएमएल को और कांग्रेस सीपीआई को अपने कोटे से सीटें दे सकती हैं. लेकिन यह सब कुछ अभी चर्चा के केंद्र में है. सबसे पहले सीटों का बंटवारा और बाकी मुद्दों पर सहमति आरजेडी और कांग्रेस के बीच होना है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव दिल्ली में है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि उनकी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात हो सकती है. कांग्रेस की तरफ से अब तक तेजस्वी के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई है. उम्मीद यही की जा रही है कि सीटों के बंटवारे पर सहमति के साथ ही कांग्रेस तेजस्वी के नाम पर अपनी सहमति दे देगी, लेकिन उसके पहले वो सीटों के मामले में सौदेबाजी कर लेना चाहती है.
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