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PM मोदी और योगी से मीटिंग, क्या UP चुनाव में फायदा लेने की कोशिश कर रहे जीतन राम मांझी !

लोजपा में मची फूट के बाद से जीतन राम मांझी की कोशिश खुद को दलितों का बड़ा नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने की है (फाइल फोटो)

लोजपा में मची फूट के बाद से जीतन राम मांझी की कोशिश खुद को दलितों का बड़ा नेता के रूप में प्रोजेक्ट करने की है (फाइल फोटो)

Jitan Ram Manjhi: हम पार्टी के नेता और बिहार सरकार में मंत्री संतोष मांझी जो कि जीतन राम मांझी के पुत्र हैं ने यूपी में जारी चुनावी तैयारी के बीच पहले सीएम योगी आदित्यनाथ और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है.

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पटना. लोजपा की आपसी फूट के बाद क्या बिहार में सत्तारूढ़ जीतन राम मांझी खुद को दलितों का सबसे बड़ा नेता दिखाने की कोशिश में हैं. हम पार्टी के नेता और बिहार सरकार में मंत्री संतोष मांझी की यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद से ये सवार बिहार के सियासी गलियारे में उठने लगे हैं और इसके कई मायने निकाले जाने लगे है. दरअसल यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ गया है. रामविलास पासवान के निधन के बाद एनडीए के पास हिंदी पट्टी में कोई एक सर्वमान्य दलित चेहरा नजर नहीं आ रहा है और लोजपा में भी फूट मची है.

इन परिस्थितियों में कुछ दिनों के अंतराल में भाजपा के दो बड़े नेताओं के साथ संतोष मांझी की मुलाकात का मतलब राजनीतिक विश्लेषक समझने लगे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा को ऐसे चेहरे की जरूरत है जो दोनों राज्यों बिहार और यूपी में समान रूप से असर डाल सके. मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में जीतन राम मांझी की पार्टी हम के लिए यह अच्छा संकेत माना जा रहा है. राजनीति के पंडित सभी कड़ियों को एक साथ जोड़ कर देख रहे हैं. यह सच भी है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में दलित और पिछड़ा वोट बैंक एक बड़ा फैक्टर रहा है. जीतन राम मांझी ने भी इस नब्ज को टटोल लिया है. बिहार में अब तक जदयू के ज्यादा करीब रहे जीतन राम मांझी यूपी में भाजपा नेतृत्व की ओर अपना झुकाव पहले ही जाहिर कर चुके हैं.

दलित चेहरा होने के कारण मांझी को साथ रखने में भाजपा को भी फायदा लग रहा है. बसपा से खाली पड़ी राजनीतिक जमीन को हासिल करने के लिए कई बड़े दलों में होड़ मची है. भाजपा को लगता है कि अगर कोई मजबूत विकल्प नहीं उभरा तो इस समुदाय के युवा वोटर मायावती को छोड़ चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी जैसे राजनीतिक दलों को समर्थन दे सकते हैं. मांझी ने भी इस हालात को भांप लिया है. प्रधानमंत्री से मुलाकात में संतोष मांझी ने निजी क्षेत्र और प्रोन्नति में आरक्षण की मांग रखी है, इस तरह की मांगों के माध्यम से भी मांझी अपने जनाधार मजबूत करने की कोशिशों में लगे हैं.

pm modi jitan ram manjhi

दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मिलते जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन

मांझी ने प्रधानमंत्री को जो अनुरोध पत्र सौंपा है उसमें अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण मांगे हैं. जाहिर सी बात है मांझी की हम पार्टी राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से फायदा उठाने में लग गई है, हालांकि यह बहुत कुछ भविष्य की राजनीति पर निर्भर करता है कि जीतन राम मांझी भाजपा के साथ कितनी दूर तक कदम से कदम मिलाकर चल पाते हैं.

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