तो महागठबंधन में सीटों की हिस्सेदारी को लेकर है पूरी पॉलिटिक्स ! मांझी की ये है मांग...
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तो महागठबंधन में सीटों की हिस्सेदारी को लेकर है पूरी पॉलिटिक्स ! मांझी की ये है मांग...
पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर बैठक करते हुए महागठबंधन के नेता (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस को छोड़कर महागठबंधन के किसी दल का खाता भी नहीं खुल पाया था. लेकिन, शून्य सीटें पाने वाली पार्टियां अभी से विधानसभा चुनाव के लिए अपनी वास्तविक हैसियत से अधक सीटों पर दावेदारी कर रही हैं.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 14, 2019, 3:38 PM IST
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बिहार में महागठबंधन (Grand Alliance) दलों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है यो तो अलग-अलग दलों के नेताओं द्वारा बीते तीन दिनों में दिए गए बयानों से जाहिर हो गया है. पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने सोमवार को तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को अनुभवहीन बताया तो मंगलवार को कांग्रेस ने नेतृत्व चुनने की जिम्मेदारी सोनिया गांधी  और राहुल गांधी स्वत: सौंप दी. दूसरी ओर आरजेडी ने मांझी और कांग्रेस को निशाने पर लिया है. जबकि आरएलएसपी (RLSP) ने जीतन राम मांझी को नसीहत दी है. अब लगभग साफ होता जा रहा है कि महागठबंधन एक बार फिर लोकसभा चुनाव से पहले वाली स्थिति में खड़ा हो गया है जब सभी दलों के अलग-अलग सुर थे.

जानकारों की मानें तो महागठबंधन दलों के भीतर यह विरोधाभास इसलिए दिख रहा है कि विधानसभा के लिए चुनाव होने में अभी एक साल से अधिक का वक्त है, लेकिन अधिक से अधिक सीटें अपने पाले में करने के लिए अभी से ही प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू हो गया है.

हैसियत कम, फिर भी चाहिए अधिक सीटें!
यहां यह बात गौर करने लायक है कि लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस को छोड़कर महागठबंधन के किसी दल का खाता भी नहीं खुल पाया था. लेकिन, शून्य सीटें पाने वाली पार्टियां अभी से विधानसभा चुनाव के लिए अपनी वास्तविक हैसियत से अधक सीटों पर दावेदारी कर रही हैं.
तेजस्वी यादव फिर लौटकर आए हैं और महागठबंधन को फिर से समेटकर खड़ा करने की कवायद शुरु हुई है. (File Photo)




मांझी की पार्टी ने मांगी थी 36 सीटें
इसमें सबसे अधिक मुखर नाम है बिहार के पूर्व सीएम और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी का. बीते जून महीने में पार्टी प्रवक्ता विजय यादव ने कहा था हम लोग बिहार में 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. हम लोग चुनाव महागठबंधन के स्तर से ही लड़ेंगे.

कुशवाहा को भी 27 सीटें चाहिए
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा भी 27 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर चुकी है. वहीं कांग्रेस पहले से कह रही है कि लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने एक सीट जीती थी इससे साबित होता है कि उनका जनाधार अधिक है, ऐसे में हिस्सेदारी भी ज्यादा होनी चाहिए.

एनडीए के लिए राह आसान
बहरहाल  ऐसे में 2020 के विधानसभा चुनाव से एक साल पहले ही सीटों को लेकर कसरत शुरू होना महागठबंधन के भविष्य पर सवाल उठा रहा है. ऐसे भी बीते तीन दिनों के भीतर महागठबंधन के भीतर जो कुछ घटा है वह एनडीए के लिए रास्ता आसान करती दिख रही है.

महागठबंधन
बिहार में महागठबंधन के नेता (फाइल फोटो)


सबको चाहिए एक दूसरे का साथ
इसके साथ एक हकीकत ये भी है कि जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी जैसे नेताओं के लिए एनडीए में एंट्री मुश्किल है. वहीं कांग्रेस का जनाधार भी बगैर आरजेडी के बिहार में अभी उतना नहीं है जो अकेले दम पर फाइट कर सके. जबकि आरजेडी की स्थिति ये है कि बिना साथियों के वह भी कुछ नहीं कर पाएगी.

कहीं सीटों के लाले न पड़ जाएं...
जाहिर है महागठबंधन के सभी दलों का जुड़ाव रहता है तो आने वाले समय में कुछ उम्मीद की जा सकती है. लेकिन, सवाल ये है कि अगर आपसी तालमेल का यही हाल रहा और दूसरी ओर एनडीए एकजुट रहा तो फिर विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन दलों को सीटों के लाले पड़ सकते हैं.

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