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...जब पीएम मोदी ने लालू प्रसाद यादव से पूछा था-'कैसे हैं आप, आपका समाचार हमें मिलता रहता है’

जेपी टू बीजेपी किताब के साथ लेखक संतोष सिंह
जेपी टू बीजेपी किताब के साथ लेखक संतोष सिंह

JP To BJP Book: किताब को लिखने वाले संतोष सिंह का कहना है कि इसके लिए उन्होंने नीतीश कुमार, सुशील मोदी, शिवानंद तिवारी, शरद यादव, तेजस्वी समेत करीब 50 लोगों का इंटरव्यू किया है.

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पटना. पीएम नरेंद्र मोदी और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, राजनीति के दो धुरंधर खिलाड़ी और दोनों के दोनों एक दूसरे के आलोचक और विरोधी माने जाते रहे हैं लेकिन, एक क्षण वह भी था जब पीएम मोदी (PM Narendra Modi) खुद लालू प्रसाद यादव और उनके दोनों बेटे तेजप्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) और तेजस्वी (Tejashwi Yadav) से पर्दे के पीछे मिलते हैं और कहते हैं कैसे हैं आप, आपकी कहानी मुझे प्रेमचंद गुप्ता से मिलती रहती है. साथ ही वो तेजप्रताप से कहते हैं कैसे हो कृष्ण कन्हैया ? भले ही यह सारी बातें शायद आपको थोड़ी अजीब लग रही होंगी लेकिन इन बातों का जिक्र आपको बिहार के जाने-माने पत्रकार और लेखक संतोष सिंह की नई किताब ‘जेपी टू बीजेपी’ में मिल जाएगा.

किताब में है नीतीश-लालू की दोस्ती टूटने की पूरी कहानी 

जेपी टू बीजेपी किताब के लेखक संतोष सिंह ने न्यूज18 से खास बातचीत में अपनी नई किताब को लेकर कई रोचक बातें बतायीं. उन्होने कहा कि उनकी इस किताब में 2017 में नीतीश-लालू की दोस्ती टूटने का पूरा जिक्र है. वे कहते हैं- उन्होंने किताब में बताया है कि किस तरीके से मार्च 2016 से ही लालू को नीतीश से अलग करने की पटकथा की शुरुआत हो जाती है. संतोष कहते हैं - साल 2016 में जब लालू यादव प्रेमचंद गुप्ता के द्वारा दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेताओं तक अपनी बात पहुंचाते है और जब संजय झा के द्वारा इसकी भनक नीतीश कुमार को लगती है वहीं से बीजेपी की ओर से नीतीश को साथ आने का इशारा मिल जाता है. उसी दौरान पीएम मोदी जब प्रकाशोत्सव में शामिल होने पटना आते हैं तभी गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी की लालू, तेजस्वी और तेजप्रताप से मुलाक़ात होती है और पीएम तब लालू को कहते हैं कि आपका समाचार हमें प्रेमचंद गुप्ता से मिलता रहता है. संतोष सिंह बताते हैं कि इस किताब में आपको इस मुलाक़ात से जुड़ी कई और रोचक बातें और नीतीश कुमार के अलग होने पूरी पथकथा जानने को मिलेगी.



और कैसे उतराधिकारी बनने से चूक गए प्रशांत किशोर
जब न्यूज18 ने संतोष सिंह से पूछा कि क्या उनके किताब में नीतीश और प्रशांत किशोर की दोस्ती और अलगाव की कहानी है भी तो उन्होंने बताया कि मैंने इसमे बताया है कि किस तरह प्रशांत नीतीश कुमार के करीब आते हैं और उन्हें पार्टी में बड़ा कद मिलता है लेकिन प्रशांत किशोर की अतिमहत्वाकांक्षा और आरसीपी सिंह की जेडीयू में बड़ी पैठ प्रशांत को नीतीश से अलग कर देती है और एक समय में नीतीश के उताराधिकारी कहे जाने वाले प्रशांत को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.



किताब में ग्रीन और सैफ्रन की यात्रा की कहानी है

संतोष सिंह ने बताया कि उनकी किताब जेपी टू बीजेपी में बिहार में समाजवाद (ग्रीन) और बीजेपी (सैफ्रन) के दोस्ती, लड़ाई, संघर्ष और चुनौती की कहानी है. इसमे जय प्रकाश नारायण के तीनों चेलों रामविलास पासवान, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की कई अनसुनी कहानियां है. साथ ही यह भी लिखा गया है कि किस तरह से बिहार में आज भी कर्पूरी ठाकुर के कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है. जेपी-इंदिरा गांधी की मुलाकात और रामानंद तिवारी और कपिल देव सिंह से जुड़ी कई अनसुनी कहानियों का जिक्र भी इस किताब में किया गया है. वहीं बिहार में आज की राजनीति और राजनेता तेजस्वी, चिराग से जुड़ी भी कई बातों का किताब में जिक्र है. साथ ही बिहार में 10 साल आगे की राजनीति कैसी होगी इसको भी लिखा गया है.

बड़ी हस्तियों के साथ बातचीत करके लिखी गयी किताब

संतोष सिंह का कहना है कि इस किताब को लिखने से पहले उन्होंने कई बड़ी हस्तियों जैसे राम विलास पासवान, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, शिवानंद तिवारी, शरद यादव, तेजस्वी समेत करीब 50 लोगों का इंटरव्यू किया है. मेरी किताब अंग्रेजी में जरूर है लेकिन इस किताब की भाषा इतनी सरल है कि नॉन मैट्रिक भी इसे पढ़ सकते हैं. बताते चलें संतोष सिंह की यह किताब अमेज़न समेत दूसरे स्टाल पर भी उपलब्ध है.
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