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न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त, राज्यपाल ने दिलाई शपथ

बूचड़खानों को बंद करने के मामले में जस्टिस एपी शाही का फैसला खासा चर्चित रहा था. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि सरकार बूचड़खाने बंद करके किसी को खाने के मूल अधिकार से वंचित नहीं कर सकती.

बूचड़खानों को बंद करने के मामले में जस्टिस एपी शाही का फैसला खासा चर्चित रहा था. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि सरकार बूचड़खाने बंद करके किसी को खाने के मूल अधिकार से वंचित नहीं कर सकती.

बूचड़खानों को बंद करने के मामले में जस्टिस एपी शाही का फैसला खासा चर्चित रहा था. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि सरकार बूचड़खाने बंद करके किसी को खाने के मूल अधिकार से वंचित नहीं कर सकती.

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    पटना हाईकोर्ट के नवनियुक्त मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप शाही ने आज पद और गोपनीयता की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह राज भवन में आयोजित किया गया था जहां राज्यपाल लालजी टंडन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कई कैबिनेट मंत्री के साथ आला अधिकारी भी मौजूद थे.

    जस्टिस शाही क का जन्म पहली जनवरी 1959 को हुआ है. न्यायमूर्ति शाही ने वकालत की डिग्री लेकर 1985 में इलाहाबाद हाई कोर्ट से अपनी वकालत शुरू की. बाद में वह 24 सितंबर 2004 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ही जज नियुक्त हुए. न्यायमूर्ति शाही 31 दिसंबर 2020 को सेवानिवृत्त होंगे.

    वरिष्ठ न्यायमूर्ति एपी शाही ने 1985 में विधि स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में सिविल व संवैधानिक मामलों की वकालत शुरू की थी.

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    जस्टिस शाही एएआई, डीम्ड यूनिवर्सिटी और ‘एमआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ  मैथ’ सहित कई शैक्षिक संस्थानों के वकील भी रहे. वह 24 सितंबर 2004 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के अपर न्यायाधीश और 18 अगस्त 2005 को स्थायी जज बने.

    बूचड़खानों को बंद करने के मामले में उनका फैसला खासा चर्चित रहा था. उन्होंने अपने फैसले में कहा था कि सरकार बूचड़खाने बंद करके किसी को खाने के मूल अधिकार से वंचित नहीं कर सकती.

    इसके अलावा सरकारी वकीलों की नियुक्ति में महाधिवक्ता के अधिकार बताते हुए उन्होंने सरकार को वकीलों की नियुक्ति की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया था.

    रिपोर्ट- अमित कुमार

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