कोरोना संकट में 'गायब' कन्हैया की सक्रियता से RJD को सता रहा परंपरागत वोट में सेंधमारी का डर
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कोरोना संकट में 'गायब' कन्हैया की सक्रियता से RJD को सता रहा परंपरागत वोट में सेंधमारी का डर
सक्रिय हुए कन्हैया तो आरजेडी को हुई चिंता. (फाइल फोटो)

कन्हैया 10 जुलाई के आसपास पटना आएंगे और बिहार विधानसभा चुनाव तक बिहार में ही कैंप करेंगे. कन्हैया के बिहार आने की सूचना से एनडीए में नहीं, लेकिन राजद को अपनी परंपरागत वोट बैंक में सेंघमारी का डर सताने लगा है.

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पटना. कोरोना संकट (Corona Crisis) में गायब रहने वाले कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) एक बार फिर विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) को लेकर अपनी यात्रा और सभा करने की तैयारी में जुट गए हैं. गुरुवार को दिल्ली (Delhi) में उन्होंने अपने सीनियर नेताओं के साथ मिलकर अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया. सीपीआई (CPI) नेता सत्यनरायण सिंह (Satyanarayan Singh) ने बताया कि कन्हैया 10 जुलाई के आसपास पटना (Patna) आएंगे और बिहार विधानसभा चुनाव तक बिहार में ही कैंप करेंगे. कन्हैया के बिहार आने की सूचना से एनडीए (NDA) में नहीं, लेकिन राजद (RJD) को अपनी परंपरागत वोट बैंक में सेंघमारी का डर सताने लगा है. पार्टी नेता सत्यनरायण सिंह कहते हैं कि कन्हैया पहले दौर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वन टु वन होंगे. इसके लिए फेसबुक (Facebook), यूट्यूब और जूम ऐप का प्रयोग किया जाएगा. पार्टी के पटना दफ्तर में सोशल मीडिया कार्यालय भी बनाया जा रहा है. जो कि पार्टी नेताओं के कार्यक्रम को लाइव करने का काम करने में सहयोग करेगा.

पीएम पर कसा तंज

30 जून को कन्हैया ने अनलॉक-टू में पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणाओं पर तंज कसते हुए लिखा है कि
बोलो रे बेइमान, क्यूं सरेंडर किया देश का सम्मान, और क्यूं नहीं लिया अब तक चाइना का नाम. गलवान में शहीद हो गए हमारे 20 जवान और तुम पका रहे जुलाई में छठ पूजा का पकवान. बिहार में जदयू और भाजपा जहां पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणों से खुश हैं, वहीं कन्हैया का यह ट्वीट विधानसभा चुनाव में उनके तेवर बताने के लिए काफी है. हालांकि उनका यह ट्वीट सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से ट्रोल हुआ और यूजर्स ने उनसे कई प्रकार के सवाल भी किए. इधर, राजनीति के जानकार उनके इस ट्वीट को बिहार विधानसभा के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं. वे कहते हैं कि कन्हैया के इस ट्वीट से साफ है कि वे पिछले चुनाव की तरह इस दफा बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपना पूरा दमखम लगाने वाले हैं. कन्हैया को जानने वाले प्रिंस कहते हैं कि कोरोना संक्रमण काल में उन्होंने विधानसभा चुनाव की अपनी पूरी प्लानिंग की है.
जन-मन यात्रा से तैयार की थी अपनी जमात



लोकसभा चुनाव के बाद कन्हैया ने बिहार में अपनी जन-मन यात्रा कर के एक बड़ी जमात तैयार
कर ली थी. सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी जमात में युवाओं के साथ-साथ महिला और बुजुर्ग भी हैं.
हालांकि उनको अपनी यात्रा के दौरान कई जगहों पर विरोध का भी सामना करना पड़ा था. कई जगहों
पर तो उनके काफिले पर हमले भी हुए थे. कन्हैया इससे परेशान भी हुए और कई जगहों से भागना
भी पड़ा, लेकिन अपने ऊपर होने वाले हमले को अपनी सभा में चर्चा कर भाजपा पर तंज कसने का
कोई भी मौका नहीं छोड़ा. सीनियर पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि जिलों में उनकी सभा में जो
भीड़ उमड़ी थी, वह अगर वोट में तब्दील हो गई तो बिहार में सीपीआई का मजबूत जनाधार खड़ा हो
जाएगा. यह जनाधार सरकार के बनने और बिगाड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

राजद के परंपरागत वोट में सेंघमारी

भगदड़ से परेशान राजद के लिए कन्हैया भी एक चुनौती हैं. कन्हैया ने अपनी यात्रा के दौरान राजद
के ही पंपरागत वोटर को काटा है. 1990 से बिहार के ज्यादातर मुस्लिम वोटर राजद के साथ रहे हैं.
लालू प्रसाद के लिए उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया था. लेकिन, लोकसभा चुनाव के बाद कन्हैया की सभा
में जिस प्रकार से उनकी जमात ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था, इससे तब कहा जाने लगा था कि बिहार
के मुसलमानों ने लालू को छोड़कर कन्हैया को अपना नेता मान लिया है. लेकिन, वह समर्थन विधानसभा
चुनाव में भी कन्हैया को मिलता है या फिर मुसलमान लालू के प्रति ही अपनी एक बार फिर से निष्ठा
निभाते हैं. यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना पक्का है कि कन्हैया की सक्रियता से एनडीए में तो
नहीं, पर राजद में अपनी परंपरागत वोट को बचाने के लिए बेचैनी जरूर दिख रही है.

लोकसभा चुनाव में कन्हैया हुए थे चारों खाने चित

लोकसभा चुनाव में कन्हैया को गिरिराज सिंह ने हराया था. हालांकि पूरे चुनाव के दौरान दिल्ली, गुजरात सहित कई प्रदेशों से आई उनकी टीम ने ऐसा माहौल तैयार करने का प्रयास किया था कि कन्हैया जीत ही रहे हैं. लेकिन परिणाम आने पर वे चारों खाने चित मिले. चुनाव के दौरान भी देश विरोधी गतिविधियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग के अगुआ होने के आरोप में कई जगहों पर उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा था.
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