महागठबंधन ने कन्‍हैया कुमार को नहीं दिया भाव, तेजस्वी यादव ने रोकी बेगूसराय से एंट्री

कन्हैया कुमार को महागठबंधन ने नहीं दिया टिकट

कन्हैया कुमार को महागठबंधन ने नहीं दिया टिकट

कन्हैया कुमार से महागठबंधन ने किनारा कर लिया है. पहले ऐसी खबर आ रही थी कि कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार हो सकते हैं.

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बिहार में महागठबंधन ने शुक्रवार को सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया. लोकसभा की 40 सीटों में से 20 पर आरजेडी लड़ेगी और कांग्रेस को 9 सीट मिली है. साथ ही बड़ी खबर ये भी है कि छात्र राजनीति से लोकसभा का चुनाव लड़ने का इरादा रखने वाले कन्हैया कुमार से महागठबंधन ने किनारा कर लिया है. कन्हैया का टिकट काटने में तेजस्वी यादव का हाथ बताया जा है. पहले ऐसी खबर आ रही थी कि कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय से महागठबंधन के उम्मीदवार हो सकते हैं. कन्‍हैया ने खुद कहा था कि वह बेगूसराय से चुनाव लड़ेंगे.

सीटों के बंटवारे से साफ हो गया कि कन्हैया कुमार को महागठबंधन का साथ नहीं मिलने वाला. बेगूसराय सीट आरजेडी के हिस्से आई है और आरजेडी अपने कोटे से एक सीट पहले ही सीपीआई(एम) को दे चुकी है. सीपीआई ने पहले जहां ऐलान किया था कि उसे बिहार में 3 से 4 सीट चाहिए पर सीटों के बंटवारे के वक्त सीपाआई को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. सीपीआई के राज्‍य सचिव नारायण सिंह ने कहा कि महागठबंधन ने हमारे साथ धोखा किया है.

उन्‍होंने कहा, 'एक साल पहले गठबंधन का वादा हुआ था. मैं लालू यादव से तीन बार मिला था, उनसे फोन पर भी बात हुई थी और तेजस्‍वी से भी बात हुई थी. उन्‍होंने गठबंधन का आश्‍वासन दिया था. 25 अक्‍टूबर की रैली में राजद के राज्‍य अध्‍यक्ष रामचंद्र पूर्वे और नेता तनवीर हसन ने कहा था कि हमें साथ मिलना लड़ना चाहिए. अब वे अलग हो गए हैं.'



नारायण सिंह ने दोहराया कि उनकी पार्टी बेगूसराय से चुनाव लड़ना चाहते हैं और कन्‍हैया और सीपीआई गठबंधन या बिना गठबंधन के लड़ने को तैयार थे. उन्‍होंने हमें भले ही बाहर कर दिया हो लेकिन बेगूसराय से लड़ेंगे और हमारी तैयारियां पूरी है. सीपीआई अब मधुबनी, मोतिहारी और खगडि़या से भी प्रत्‍याशी उतार सकती है.
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस वामदलों को साथ रखना चाहती थी लेकिन आरजेडी इसके पक्ष में नहीं थी. न्‍यूज18 ने कन्‍हैया से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका बयान नहीं मिल पाया.

बता दें कि युवा वामपंथी नेता कन्हैया उस समय खबरों में आए थे जब उन्हें एक रैली में भारत विरोधी नारे लगाने के आरोप में राजद्रोह के तहत गिरफ्तार किया गया था. देश में एक नई वाम राजनीति के चेहरे के रूप में उभरे कन्हैया को उनके उग्र भाषणों के कारण भी जाना जाता है और इसके चलते वे काफी मशहूर भी हुए हैं.

ऐसा कहा जा कहा है कि कन्हैया की छवि ही उनके राजनीतिक करियर के आड़े आ रही है. सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटी के निदेशक संजय कुमार ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस गठबंधन कन्हैया की इस इमेज से बच रहा है.

कुमार ने कहा, "कांग्रेस सुरक्षित खेलने की कोशिश कर रही है. वह कन्हैया की आक्रामक छवि से बचना चाहती. भले ही उनके(कन्‍हैया) खिलाफ लगे आरोप फर्जी हों, लेकिन कन्हैया के खिलाफ' राष्ट्रविरोधी 'का टैग लगा गया है. यूपीए किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष नहीं लेना चाहता, जिसे बहुत कट्टरपंथी माना जाता है.'

वे आगे कहते हैं कि इस घटना ने कन्‍हैया को राजनीति का बड़ा सबक भी सिखाया है. इसमें संदेश साफ है कि आपको इंतजार करना चाहिए. रातोंरात हीरो बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

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