कन्हैया पर देशद्रोह का मामला चलने से वाम दलों की उम्मीदों पर पानी फिरा! ये है वजह

कन्हैया पर देशद्रोह के मामले ने वाम दलों को फिर से नेपथ्य में ला दिया है.

कन्हैया पर देशद्रोह के मामले ने वाम दलों को फिर से नेपथ्य में ला दिया है.

साल 2016 में कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) जिस तरह से उभरे, सभी वाम पार्टियों को उनसे काफी उम्मीदें बंध गई. लेकिन देशद्रोह के मामले ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

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पटना. जेएनयू (JNU) छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई (CPI) नेता कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) से वाम दलों (Left Parties) को काफी उम्मीद है. कई दशकों से नेपथ्य में रहे वाम दलों को कन्हैया ने मंच पर ला दिया. ऐसे में उन पर देशद्रोह (Sedition) का मामला वाम दलों को रास नहीं आ रहा है. वो कह रहे हैं कि ये बड़ी साजिश है. साथ कन्हैया कि लड़ाई भी लड़ने की बात कह रहे हैं. वहीं, कन्हैया के मामले पर बीजेपी (BJP) हमलावर है और कह रही है कि देशद्रोहियों को सजा मिलेगी.



वामदलों के पोस्टर ब्‍वॉय बने थे कन्हैया

2016 में कन्हैया को लेकर वाम दलों में एक उम्मीद जगी थी. कन्हैया ने अब तक उस उम्मीद को कायम भी रखा. लेकिन अचानक 2016 की फाइल खुलती है. दिल्ली सरकार कन्हैया के ऊपर देशद्रोह का मामला दर्ज करने का आदेश देती है. उसके बाद लेफ्ट पार्टी का उभरता चेहरा और पोस्टर ब्‍वॉय कन्हैया पर ग्रहण लगता है. वाम दल की सारी उम्मीदें धाराशायी हो जाती है. कन्हैया ने अपने दम पर लेफ्ट की सभाओं में भीड़ जुटाना शुरू कर दिया था,लेकिन देशद्रोह के मामले ने वाम को फिर से नेपथ्य में ला दिया है.



केजरीवाल ने दिया धोखा
सीपीआई के नेता निवेदिता कहती हैं कि केजरीवाल ने धोखा दिया है. बीजेपी लेफ्ट को मिटाना चाहती है. वहीं, सीपीआई (एमएल) के नेता कुमार परवेज इसे बीजेपी की बड़ी साजिश करार दे रहे हैं. कहते हैं कि जो लेफ्ट विचारधारा से है, उसे फंसाया जा रहा है.





NRC, NPR और CAA के खिलाफ कन्हैया ने किया अभियान

बिहार में कन्हैया ने लगभग सभी जिलों में एनआरसी, सीएए और एनपीआर को लेकर सभाएं की. इन सभाओं में उम्मीद से ज्यादा भीड़ भी पहुंची. जैसे ही पटना के गांधी मैदान में सभा खत्म हुई, वैसे ही  दिल्ली सरकार ने कन्हैया पर 2016 के जेएनयू के विवादित मामले पर देशद्रोह का मामला दर्ज करने का आदेश दिल्ली पुलिस को दे दिया. आनन-फानन में दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज भी कर दिया. बीजेपी अब उत्साहित है. बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल कहते हैं कि जो कन्हैया ने किया है, उसका परिणाम तो भुगतना ही होगा. देशद्रोह के अपराध में उसको जेल जाना ही होगा.



अपनी साख बचाने की लड़ाई 

वाम दल की उम्मीदों का महल ढ़हने लगा है. अब लेफ्ट को कन्हैया को बचाने और अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़नी है वो भी उस समय जब बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं.​



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