Bihar Pol-trics : गुप्तेश्वर पांडे को जानें जिन्होंने अपने पद से दिया है दूसरी बार इस्तीफा

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. (File)
डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. (File)

गुप्तेश्वर पांडेय बिहार काडर के IPS अफसर हैं. पिछली सदी के 8वें दशक में बिहार के कई जिले नक्सलवाद की चपेट में थे. खास बात यह थी कि 1987 बैच के अफसर गुप्तेश्वर पांडेय की नियुक्ति उन्हीं जिलों में की जाती थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 23, 2020, 12:09 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. बिहार (Bihar) के पुलिस महानिदेशक (DGP) गुप्तेश्वर पांडे (Gupteshwar Pandey) ने वीआरएस (VRS) ले लिया है. पर ऐसा क्या है कि गुप्तेश्वर पांडे द्वारा वीआरएस लिए जाने की चर्चा इतनी जोर है? दरअसल इस वीआरएस का एक राजनीतिक अर्थ भी है. इससे पहले भी गुप्तेश्वर पांडे ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी. वह वक्त भी चुनावी मौसम था. इस बार भी मौसम वही है.

कौन हैं ये गुप्तेश्वर पांडेय

गुप्तेश्वर पांडेय बिहार काडर के IPS अफसर हैं. पिछली सदी के 8वें दशक में बिहार के कई जिले नक्सलवाद की चपेट में थे. खास बात यह थी कि 1987 बैच के अफसर गुप्तेश्वर पांडेय की नियुक्ति उन्हीं जिलों में की जाती थी. जहानाबाद, अरवल, बेगूसराय और नालंदा जैसी जगहों पर इन्हें पोस्टिंग दी जाती रही. बाद में गुप्तेश्वर पांडेय को मुंगेर और मुजफ्फरपुर जोन का DIG भी बनाया गया.



2009 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
वैसे तो गुप्तेश्वर पांडेय अपने कई काम की वजह से सुर्खियों में रहे हैं. लेकिन 2009 में जब इन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली तो उस समय यह चर्चा बहुत तेज उठी की गुप्तेश्वर पांडेय ने यह इस्तिफा लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए दिया है. उस वक्त राज्य सरकार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इस्तीफे के पीछे की कहानी के रूप में यह चर्चा सामने आई कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की बक्सर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. वह भी भाजपा के टिकट पर. गुप्तेश्वर पांडेय को उम्मीद थी कि बक्सर के सांसद लालमणि चौबे का टिकट भाजपा दोहराएगी नहीं.

जब टिकट नहीं मिला तो खोजा नौकरी में वापसी का रास्ता

कहते हैं कि बीजेपी में गुप्तेश्वर पांडेय की साख ठीक-ठाक थी. जब पांडेय जी की गोटी बक्सर सीट पर बैठने लगी तभी लालमणि चौबे बागी हो गए. इसके बाद भाजपा को अपनी स्ट्रैटजी बदलनी पड़ी और उसने टिकट लालमणि चौबे को ही पकड़ा दिया. इस्तीफा दे चुके गुप्तेश्वर पांडेय को न खुदा मिला न विसाले सनम. तब गुप्तेश्वर पांडेय ने सर्विस में वापसी का रास्ता खोजा. इस्तीफा देने के 9 महीने बाद पांडेय ने बिहार सरकार से कहा कि वे अपना इस्तीफा वापस लेना चाहते हैं और नौकरी करना चाहते हैं. तब बिहार में नीतीश कुमार की सरकार थी. उन्होंने इस्तीफा वापस कर दिया और गुप्तेश्वर पांडेय की नौकरी में वापसी हो गई. बिहार के कई अधिकारी इसे सर्विस रूल का उल्लंघन मानते हैं. कहते हैं कि चुनाव लड़ने के लिए VRS लिया और नहीं लड़ पाए तो चुपचाप सर्विस में वापसी भी हो गई. इधर गुप्तेश्वर पांडेय ये तो मानते हैं कि उन्होंने चुनाव लड़ने और राजनीति करने के लिए 2009 में सर्विस से इस्तीफा दिया था, लेकिन भाजपा से नाम जोड़े जाने को गलत सूचना बताते हैं. अब देखना है कि इस बार उनके वीआरएस का कौन सा इनाम उन्हें मिलने वाला है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज