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ANALYSIS: पहले फेज में बिहार की चार सीटों पर वोटिंग, जानें सारा सियासी हाल

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: April 11, 2019, 9:05 AM IST
ANALYSIS: पहले फेज में बिहार की चार सीटों पर वोटिंग, जानें सारा सियासी हाल
फाइल फोटो

गया में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, जमुई में चिराग पासवान, औरंगाबाद में बीजेपी के सांसद सुशील कुमार सिंह के साथ नवादा में राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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पहले चरण में बिहार की चार सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. इनमें भगवान बुद्ध की भूमि गया, भगवान महावीर की जन्मभूमि जमुई, बिहार का मिनी चित्तौड़गढ़ कहा जाने वाला औरंगाबाद और झारखंड से सटा नवादा लोकसभा क्षेत्र शामिल है. इनमें गया और जमुई सुरक्षित लोकसभा सीटें हैं. ये चारों सीटें फिलहाल एनडीए के कब्जे में हैं, हालांकि इस बार मुकाबला कड़ा माना जा रहा है. जाहिर है इस चरण का मतदान तय कर देगा कि बिहार आने वाले समय में क्या परिणाम सामने लेकर आएगा.

गया में पूर्व मुख्यमंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी, जमुई से एनडीए के प्रत्याशी चिराग पासवान, औरंगाबाद से बीजेपी के सांसद सुशील कुमार सिंह के साथ नवादा से आरजेडी के सजायाफ्ता नेता राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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गया में मांझी Vs मांझी

1967 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी तीसरी बार और तीसरे दल से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पिछली बार वह जेडीयू के उम्मीदवार थे और तीसरे स्थान पर रहे थे. इससे पहले कांग्रेस के टिकट पर उन्हें दूसरा स्थान मिला था.

गया में जीतन राम मांझी का मुकाबला जेडीयू के विजय मांझी से हैं. विजय मांझी की मां (दिवंगत) भगवती देवी सांसद रह चुकी हैं और बहन समता देवी बाराचट्टी से आरजेडी की विधायक हैं. विजय पहली बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारे गए हैं. वैसे यहां से कुल तेरह उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला जीतन मांझी और विजय मांझी के बीच ही माना जा रहा है.

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बीते पांच साल में यहां के समीकरण बिल्कुल उलट गए हैं. जेडीयू से अलग होकर जीतन राम मांझी अब महागठबंधन का हिस्सा हैं. इस बार उनके साथ आरजेडी, कांग्रेस और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी है.

दूसरी तरफ विजय मांझी को बीजेपी का साथ है, जिसने अपने लगातार दो बार के सांसद हरि मांझी का टिकट काटकर यह सीट जेडीयू को दिया है.

नवादा में अगड़ा-पिछड़ा का दंगल
नवादा के सियासी दंगल में इस बार सीधा मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच है. एनडीए से एलजेपी के चंदन सिंह और महागठबंधन से आरजेडी की विभा देवी आमने-सामने हैं. दोनों ही राजनीति में अभी नए आए हैं.

एक तरफ जहां विभा देवी के सामने पति और बाहुबली नेता राजबल्लभ प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत संभालने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ सूरजभान सिंह और उनकी सांसद पत्नी वीणा देवी के भरोसे को बनाए रखना चंदन सिंह के लिए बड़ी जिम्मेदारी है.

नवादा से राजद की प्रत्याशी विभा देवी को पति और पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव से राजनीति विरासत में मिली है. जबकि चंदन कुमार 35 साल के युवा होने के साथ ग्रेजुएट भी हैं. 2007 से ये राजनीति में हैं. युवा लोजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और पूर्व सांसद सूरजभान के छोटे भाई हैं.

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दोनों ही प्रत्याशी अपने-अपने कैडर वोट के बल पर एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन जिसने भी एक-दूसरे के वोटों में सेंधमारी की, यहां का सरताज वही बनेगा.

नवादा लोकसभा सीट दोनों ही गठबंधनों के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि यहां के चुनावी अखाड़े में सीएम नीतीश कुमार, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रामविलास पासवान, गिरिराज सिंह, सुशील मोदी से लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा समेत कई दिग्गजों ने प्रचार की कमान संभाली.

औरंगाबाद में BJP के लिए हैट्रिक की चुनौती
इस क्षेत्र में इस बार एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है. एनडीए से भाजपा के टिकट पर वर्तमान बीजेपी सांसद सुशील कुमार सिंह एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. वे 2009 से लगातार इस क्षेत्र से सांसद हैं और इसके पहले 1998 में भी वे यहां के सांसद रह चुके हैं. इस बार इनके सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है.

उनसे मुकाबले के लिए महागठबंधन ने हम उम्मीदवार उपेंद्र प्रसाद को चुनाव मैदान में उतारा है. उपेंद्र प्रसाद लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जेडीयू छोड़कर हम का दामन थाम लिए हैं. उपेंद्र पहली बार इस लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं.

औरंगाबाद की सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती रही है, लेकिन इस बार महागठबंधन की तरफ से यह सीट हम के खाते में चली गई है. इस कारण यहां के कांग्रेस के पूर्व सांसद निखिल कुमार के समर्थक और पुराने कांग्रेसी काफी नाराज हैं.

हाल ही में निखिल कुमार के समर्थकों ने सदाकत आश्रम में काफी हंगामा किया था. पुराने कांग्रेसियों के नाराज होने का खामियाजा महागठबंधन को उठाना पड़ सकता है.

जमुई की जातीय गणित में फंसी जीत की राह
इस सीट पर एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर है. कुछ जातियों को छोड़ दें तो आम मतदाता बिल्कुल शांत दिखाई पड़ते हैं. चिराग को इस बार भी मोदी लहर पर भरोसा है तो महागठबंधन के भूदेव चौधरी को अपने जातीय आधार और घटक दलों के आधार वोटों के भरोसे है.

पिछले लोकसभा चुनाव में यादव जाति के कुछ मतदाता मोदी लहर पर सवार हुए थे जिससे एनडीए की जीत की राह आसान हो गई थी. इस बार भी एनडीए यादव वोटो में सेंधमारी की भरपूर कोशिश कर रहा है. यदि सेंधमारी हुई तो परिणाम बदल सकता है.

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इस बार बिहार में चुनावी अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमुई से ही की. इसका क्षेत्र में असर भी देखा जा रहा है. खासकर युवा वर्ग में जिनसे पूछो मोदी लहर के साथ खड़ा नजर आ रहा है, लेकिन एनडीए को इस बार यहां अपनों से ही खतरा है.

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First published: April 11, 2019, 8:24 AM IST
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